जेईई मेन में अब 12वीं के अंकों की बाध्यता खत्म, परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर होगा एडमिशन
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जेईई मेंस की मेरिट बनाने में 12वीं के अंकों की बाध्यता पूर्ण रूप से खत्म हो चुकी है। इस बार भी 12वीं के अंकों के बिना ही मेरिट तैयार होगी।
हर साल सीबीएसई बोर्ड देश के तमाम बोर्ड से उनका 12वीं का डाटा मिलने का इंतजार करता है। इस वजह से समय से कॉमन मेरिट लिस्ट तैयार नहीं हो पाती थी। लिहाजा, 12वीं के अंकों का नियम खत्म कर दिया गया था। सीबीएसई ने जेईई मेन 2018 के नोटिफिकेशन में यह जानकारी जारी की है।
इसके मुताबिक इस बार केवल जेईई मेन परीक्षा के आधार पर ही छात्रों को रैंक जारी की जाएगी। प्रक्रिया के हिसाब से अब तक जेईई मेन देने वाले छात्रों में से शीर्ष 2 लाख (इस बार 2.24 लाख) का चयन आईआईटी प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस के लिए करता था।
बचे हुए सभी अभ्यर्थियों की एक कॉमन मेरिट लिस्ट जारी होती थी। इस लिस्ट में उन्हें ऑल इंडिया रैंक जारी की जाती है। यह लिस्ट जेईई मेन परीक्षा के 60 प्रतिशत और 12वीं के 40 प्रतिशत अंकों के वेटेज के आधार पर तैयार की जाती है।
इसमें सभी राज्य बोर्डों से छात्रों का 12वीं का डाटा मंगाया जाता है। इस प्रक्रिया में लगातार दो साल से विलंब होने की वजह से आईआईटी तक की काउंसिलिंग में फर्क पड़ रहा है। लिहाजा, इस साल जेईई मेन में 12वीं के अंकों की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। अब केवल जेईई मेन परीक्षा के प्रदर्शन को ही दाखिले का आधार बनाया गया है।
इस बार 2.24 लाख को मिलेगा आईआईटी का टिकट
जेईई मेन एग्जाम से इस बार दो लाख के बजाए दो लाख 24 हजार अभ्यर्थियों का चयन आईआईटी में दाखिले की प्रवेश परीक्षा के लिए किया जाएगा। आईआईटी कानपुर अपने नोटिफिकेशन में इसकी जानकारी जारी कर चुका है।
जेईई मेन परीक्षा से पहले 1.80 लाख अभ्यर्थियों का चयन आईआईटी प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस के लिए हुआ करता था। इसके बाद साल दर साल इस संख्या में इजाफा होता आ रहा है।
वर्ष 2016 में यह संख्या दो लाख 20 हजार पहुंच गई थी। इस साल आईआईटी ने जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 2.24 लाख कर दी है।
यानी जेईई मेन से क्वालिफाई करने वाले इतने अभ्यर्थियों को एडवांस का टिकट मिलेगा। माना जा रहा है कि लगातार आईआईटी में आने वाले कम योग्य छात्रों और सीटें खाली रहने की समस्या की वजह से यह संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है।