मुन्नाभाइयों के खुलासे से हड़कंप, खतरे में कई डॉक्टरों की डिग्री
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में एडमिशन के फर्जीवाड़े में तीन बैचों के 31 छात्रों के निष्कासन के बाद अब पुराने छात्रों पर भी गाज गिरना तय है। पकड़े गए छात्रों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि कई पासआउट छात्रों ने भी इसी तरह एडमिशन लिया था।
इस पर कॉलेज प्रशासन ने वर्ष 2011-12 बैच के छात्रों की जांच कराने की संस्तुति उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से कर दी है। इससे पासआउट हो चुके 150 छात्रों (अब डॉक्टर) की डिग्री पर संकट के बादल मंडराने लग गए हैं।
देहरादून में सात अगस्त को मेडिकल प्रवेश परीक्षा के दौरान मुन्नाभाइयों के पकड़ में आने के बाद उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने वर्ष 2013, 2014 और 2015 बैच के छात्रों की जांच पड़ताल करवाई थी। पड़ताल में तीनों बैच के 31 छात्र ऐसे पाए गए थे जिनकी प्रवेश परीक्षा किसी दूसरे छात्रों ने दी थी।
कॉलेज प्रशासन सभी को निष्कासित कर चुका है। तीन बैचों में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद उससे पहले बैच के छात्रों पर सवाल उठ रहे हैं। अब कॉलेज प्रशासन ने वर्ष 2011 और 2012 बैच के छात्रों की जांच का प्रस्ताव विश्वविद्यालय को भेज दिया है। विवि की हरी झंडी मिलते ही पुराने छात्रों की कुंडली खंगालने का काम शुरू हो जाएगा। इन दो बैचों के पास आउट हो चुके 150 से ज्यादा छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जो सरकारी नौकरी में हैं।
पिछले तीन बैच के 31 छात्रों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पुराने छात्रों की जांच पड़ताल भी जरूरी हो गई है। इस बारे में विश्वविद्यालय को पत्र लिखा गया है। विवि का निर्देश मिलते ही जांच शुरू कर दी जाएगी।
-प्रो. आदित्य नारायण पांडेय, निदेशक ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज