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एनआरआई कोटे के 125 छात्र बीएड परीक्षा से बाहर
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 08 Mar 2017 12:40 PM IST
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गढ़वाल विश्वविद्यालय
- फोटो : file photo
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गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध 24 बीएड कॉलेजों के 125 से ज्यादा एनआरआई बीएड छात्रों को विवि ने नियमों का हवाला देते हुए परीक्षा से बाहर कर दिया है।
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मामले में निजी बीएड कॉलेजों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट में 21 मार्च को मामले में सुनवाई होगी। उधर, विवि की बीएड परीक्षाएं बुधवार से शुरू होने जा रही हैं। लिहाजा परीक्षा से बाहर किए जाने वाले छात्र परेशान हैं। गढ़वाल विवि से संबद्ध 24 बीएड कॉलेजों में बीएड की सात-सात एनआरआई कोटे की सीटें हैं।
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नियमानुसार, इन सीटों पर दाखिले के लिए कॉलेजों को पहले विज्ञापन प्रकाशित करना था और इसके बाद एनआरआई छात्र नहीं आने पर उनकी जगह सामान्य छात्रों को दाखिले के लिए विवि से परमिशन लेनी थी। लेकिन कई कॉलेजों ने बिना परमिशन के ही एनआरआई कोटे की सीटों पर दाखिले कर दिए। हालांकि, करीब पांच कॉलेजों ने परमिशन के लिए विवि को पत्र भेजा था, लेकिन वह पत्र फाइलों के बीच अटककर रह गया।
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मामले में कुलपति प्रो. जेएल कौल ने विवि के कुलसचिव से जवाब मांगते हुए सभी एनआरआई कोटे के छात्रों के आठ मार्च से शुरू होने वाली बीएड परीक्षा में शामिल होने पर रोक लगा दी। वहीं, कॉलेजों ने मंगलवार को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विवि प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट के चेयरमैन सुनील अग्रवाल का कहना है कि हम विवि और हाईकोर्ट के सामने पूरा पक्ष रख चुके हैं। अब कोर्ट को फैसला लेना है।
क्या है एनआरआई कोटा
2008 में गढ़वाल विवि में फीस रिविजन नियम लागू हुआ था। तब हर कॉलेज में सात एनआरआई कोटे की सीटों पर दाखिले का प्रावधान किया गया था। यह भी नियम बनाया गया कि इन सीटों पर एनआरआई के न आने पर बाहरी छात्र को भी एडमिशन दिया जा सकता है। 2009 में गढ़वाल विवि केंद्रीय विवि बन गया, लेकिन राज्य सरकार का जीओ केंद्रीय विवि ने फॉलो नहीं किया।
मामले में कॉलेज हाईकोर्ट गए तो आदेश हुआ, जिस पर विवि ने फीस संबंधित नियम तो फॉलो किया, लेकिन एनआरआई कोटे का नियम लागू नहीं किया। वर्ष 2014 में कॉलेजों का प्रस्ताव मानते हुए विवि ने एनआरआई कोटा खोल दिया। 2015 में भी इसमें दाखिले हुए। इसी साल विवि ने सभी कॉलेजों को पत्र भेजकर कहा कि एनआरआई कोटे की सीट पर एडमिशन के लिए विज्ञापन जारी करना होगा। एनआरआई के नहीं आने पर सामान्य छात्रों के एडमिशन के लिए कॉलेजों को विवि से परमिशन लेनी होगी।