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सरकारी मेडिकल कॉलेजों से सस्ती शिक्षा का सपना देख रहे युवाओं को झटका, दाखिले के नियम बदले
Fri, 28 Jun 2019 08:30 AM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 28 Jun 2019 08:30 AM IST
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से सस्ती शिक्षा का सपना देख रहे युवाओं को झटका लगा है। इस वर्ष से देहरादून और हल्द्वानी के मेडिकल कॉलेजों में बांड भरकर एमबीबीएस करने का मौका नहीं मिलेगा। अब केवल श्रीनगर मेडिकल कॉलेज और भविष्य में अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज से छात्र-छात्राएं सस्ती शिक्षा हासिल कर सकते हैं।
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सचिव नितेश कुमार झा की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक, प्रदेश में डॉक्टरों के 679 पद रिक्त हैं। इन पदों को भरने के लिए अब बांड के नियमों का पालन किया जाएगा। जो युवा पहाड़ के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेंगे, उन्हें ही बांड से सस्ती शिक्षा लेने का मौका दिया जाएगा। बांड भरने पर एमबीबीएस का शुल्क 50 हजार रुपये सालाना होता है जबकि बांड न भरने पर शुल्क चार लाख रुपये सालाना रहता है।
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बांड भरने वालों के लिए भी नियम सख्त कर दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेजों में जूनियर और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की कमी को देखते हुए बांड से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को पहले एक साल मेडिकल कॉलेजों में सेवा देनी होगी। उसके बाद दो साल तक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर सेवा देनी होगी।
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इसके बाद दो वर्ष तक जिला चिकित्सालयों या दुर्गम के चिकित्सालयों में सेवा की अनिवार्यता रहेगी। दूसरी ओर, इस साल भी निजी मेडिकल कॉलेजों की 50 प्रतिशत सीटें राज्य कोटा और 50 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया मैनेजमेंट कोटा से भरने का शासनादेश जारी किया गया है।