फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Badrinath Puja is incomplete without Badri Tulsi now the fragrance is in trouble Chardham Yatra 2025

Badrinath: मां लक्ष्मी के रूप में पूजनीय बदरी तुलसी के बिना अधूरी है बदरीविशाल की पूजा, अब सुगंध पर ही संकट

Wed, 30 Apr 2025 02:14 PM IST
रेनू सकलानी प्रमोद सेमवाल, गोपेश्वर ( चमोली)
प्रमोद सेमवाल, गोपेश्वर ( चमोली) Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 30 Apr 2025 02:14 PM IST
सार

तुलसी भगवान बदरीनाथ की बेहद प्रिय है। तुलसी के बिना बदरीनाथ की पूजा अधूरी मानी जाती है। हर दिन महाभिषेक के बाद बदरीनाथ भगवान का तुलसी की माला से शृंगार किया जाता है। 

विज्ञापन
Badrinath Puja is incomplete without Badri Tulsi now the fragrance is in trouble Chardham Yatra 2025
भगवान बदरीनाथ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बदरीनाथ धाम में मां लक्ष्मी के रूप में पूजनीय दुर्लभ बदरी तुलसी पर संकट मंडरा रहा है। प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होने से बदरी तुलसी का भी अनियोजित ढंग से दोहन होने लगा है। छह माह तक बदरी तुलसी का दोहन होता है जिससे अब कई जगहों पर तुलसी की पौधे पनप नहीं पा रही हैं।

विज्ञापन


भगवान बदरीनाथ को बदरी तुलसी प्रिय है। तुलसी के बिना बदरीनाथ की पूजा अधूरी मानी जाती है। यही कारण है कि हर दिन महाभिषेक के बाद बदरीनाथ भगवान का तुलसी की माला से शृंगार किया जाता है। श्रद्धालु भी बदरीनाथ को बड़ी संख्या में बदरी तुलसी अर्पित करते हैं। साथ ही तुलसी की माला को प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं।
विज्ञापन


ग्रामीण बदरी तुलसी की माला है बनाते
बदरीनाथ के रड़ांग बैंड, कंचननाला के ऊपर, घुड़शिल, वसुधारा, माणा गांव, नाग-नागिन, इंद्रधारा और हनुमान चट्टी क्षेत्र में बदरी तुलसी उगती है। यह तुलसी बामणी (पांडुकेश्वर), लामबगड़ और हनुमान चट्टी के ग्रामीणों की आजीविका का साधन है। सीजन में 800 से अधिक ग्रामीण बदरी तुलसी की माला बनाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें...Chardham Yatra: हेलिकॉप्टर से फूलों की बारिश; जयकारों से गूंजते धाम...अद्भुत अहसास कराएंगी ये खास तस्वीरें

प्रतिदिन मंदिर में लगभग 10,000 तुलसी की माला की बिक्री होती है। इस माला की 50 रुपये से लेकर 500 रुपये में बिक्री होती है। तीर्थयात्रा में हर वर्ष इजाफा होने से तुलसी माला की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। इसका अनियोजित ढंग से दोहन होने लगा है। पांडुकेश्वर की विजया देवी कहती हैं कि तुलसी माला बनाने का काम यात्रा बढ़ने पर अधिक हो गया है। कई जगहों से तुलसी धीरे-धीरे कम हो रही है। नीती घाटी के तपोवन क्षेत्र से तुलसी की आपूर्ति करनी पड़ती है। जुलाई माह तक तुलसी ढूंढे नहीं मिलती है। वे कहती हैं कि बदरीनाथ क्षेत्र में तुलसी की पैदावार बढ़ाने पर काम होना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed