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आपदा प्रभावितों में पर्यटकों का नहीं कोई जिक्र
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jul 2013 08:54 AM IST
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दैवी आपदा में सभी मरने वालों को तीर्थयात्री बताकर राज्य सरकार लोगों को गुमराह कर रही है। हर साल पर्यटन विभाग प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या जारी करता है। लेकिन आपदा से प्रभावित लोगों में कहीं भी पर्यटकों का जिक्र नहीं है।
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पर्यटन और तीर्थाटन के बारे जानकारी नहीं
यह कहना है द सोसायटी फार हिमालयन इंवाट फार हिमालयन इंवारमेंटल रिसर्च (शेर) के डॉ.शंकर काला और डॉ. अरुण कुमार बडोनी का। यहां जारी एक विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों में पर्यटन विशेषज्ञ की भूमिका निभा रहे लोगों को पर्यटन और तीर्थाटन के बारे जानकारी नहीं है।
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राज्य और केंद्र के पर्यटन विभाग की ओर से पारंपरिक तीर्थयात्रा को पर्यटन का स्वरूप देने का प्रयास हो रहा है। यह पूरी तरह से गलत है। तीर्थयात्रा का सीधा संबंध विश्वास से है और पर्यटन का मौज मस्ती से। तीर्थयात्रा को धार्मिक पर्यटन के नाम पर विदेशी संस्कृति में ढालने का परिणाम केदारनाथ में देखने को मिला।
एक याचिका भी दायर की गई थी
उन्होंने बताया कि विनाशकारी पर्यटन रोको (विपरो) संस्था 35 सालों से पाश्चात्य भोगवादी पर्यटन का विरोध कर रही है। लेकिन इस ओर न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ध्यान दे रही है। गांधीयन पर्यटन की ओर से मानवाधिकार आयोग में इस संबंध में एक याचिका भी दायर की गई थी।
इस संबंध में जल्द ही एक जनहित याचिका दायर की जाएगी। उन्होंने कहा कि शेर संस्था की ओर से केदारनाथ में किए गए एक शोध में पाया गया था कि हिमालय में मानव द्वारा की जा रहगी वातावरणीय छेड़छाड़ का परिणाम घातक होगा।
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