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सार्वजनिक शौचालय की जगह बना पार्क

Wed, 12 Jun 2013 11:20 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Wed, 12 Jun 2013 11:20 AM IST
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public toilet facilities
गढ़ी कैंट के सभासदों ने बोर्ड अधिकारियों पर सार्वजनिक शौचालयों (पीजीएल) के नाम लाखों की धांधली का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि कागजों में शौचालय का निर्माण दिखाया गया है, लेकिन मौके पर हुआ नहीं। सभासदों ने बोर्ड अध्यक्ष मेजर जनरल एसके अग्रवाल से मामले को लेकर विशेष बोर्ड बुलाने की मांग की है।
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मामले का खुलासा किया
मंगलवार को छावनी परिषद के उपाध्यक्ष जीपी तिवारी, सभासद विष्णु प्रसाद, कमलराज और अजय क्षेत्री ने पत्रकार वार्ता में इस मामले का खुलासा किया। इन सभासदों ने तीन जून को आफिस सुप्रीटेंडेंट व जेई के साथ यहां अधिकारिक निरीक्षण किया तो तमाम गड़बड़ियां सामने आईं। उन्होंने बताया कि दस्तावेजों में वार्ड 3 में शौचालय पर 14 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया है, लेकिन यहां कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ।

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यहां एक पार्क का निर्माण जरूर हुआ है, लेकिन बजट शौचालय के लिए जारी हुआ था। सभासदों ने कहा कि 15 अक्टूबर 2012 के बोर्ड रेजुलेशन से छेड़छाड़ कर पीजीएल निर्माण के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान किया गया। दोबारा 17 मई 2013 को हुई बोर्ड बैठक में पीजीएल के रिवाइजड एस्टिमेट में 412437.29 रुपये की वृद्धि कर 24 मई को भुगतान कर दिया गया।
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लागत वास्तविक खर्च से ज्यादा दिखाई
वहीं, लाहौर गली डाकरा वार्ड 6 में जनता के विरोध के बाद रुके पीजीएल निर्माण के बदले 6 लाख रुपये की लागत से एक पुस्ता बनाया गया। आरोप है कि लागत वास्तविक खर्च से ज्यादा दिखाई गई है। उपाध्यक्ष व सदस्यों का आरोप है कि बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी व जेई की मिलीभगत से यह खेल हुआ है।

उधर, वार्ड तीन के सभासद ओपी गुप्ता ने कहा कि जीपीएल बनाने का स्थानीय जनता ने विरोध किया था, जिसके बाद उन्होंने सीईओ को चिह्नित स्थल पर पार्क बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन निर्माण में वित्तीय अनियमितता हुई है तो जांच होनी चाहिए।


पीजीएल निर्माण में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। प्रेमनगर में पीजीएल निर्माण का जनता ने विरोध किया, जिसके बाद स्थानीय सभासद ने पार्क निर्माण का प्रस्ताव भेजा। सभी सदस्यों को अवगत कराने के बाद मौके पर पब्लिक पार्क बनाया गया है।
-अरविंद द्विवेदी, कार्यवाहक सीईओ

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