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रामबाड़ा की जगह सिर्फ मलबा, नहीं बचा नामोनिशान
देहरादून/ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jun 2013 07:52 PM IST
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रविवार रात को बादल फटने से मची तबाही के बाद मंगलवार को करीब-करीब यह साफ हुआ कि रामबाड़ा का नामोनिशान नहीं रह गया है। आयुक्त गढ़वाल सुवर्द्धन ने दो चक्कर हेलीकाप्टर से इस क्षेत्र के लगाए और दोनों ही बार रामबाड़ा की जगह सिर्फ मलबा दिखाई दिया।
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अब आयुक्त का कहना है कि बुधवार को छोटे हेलीकाप्टर से जाकर मौके पर उतरने की कोशिश की जाएगी। हताहत कितने हुए, बचे कितने, अभी यह भी साफ नहीं हुआ। गढ़वाल आयुक्त सिर्फ इतना कह रहे हैं कि मरने वालों की संख्या 200 तो हो ही सकती है। जबकि हताहत होने वालों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है।
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मौसम के साथ देने की वजह से मंगलवार को राहत कार्य में तेजी आई और केदारनाथ के इस क्षेत्र से करीब 500 लोगों को हेलीकॉप्टरों के जरिए गुप्तकाशी पहुंचाया जा सका। कुछ भोजन के पैकेट भी केदारनाथ और उसके आस पास केस्थान पर गिराए गए हैं।
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देर शाम सचिवालय में हुई प्रेस वार्ता में मुख्य सचिव सुभाष कुमार, गढ़वाल आयुक्त सुवर्द्धन, आपदा प्रबंधन सचिव भास्करानंद यही कह सके की हालात बेहद खराब हैं। इन अधिकारियों ने खुलकर नहीं कहा पर यह जरूर माना कि ऐरियल व्यू में ही सही पर रामबाड़ा कहीं दिख नहीं रहा है।
मंदिर को भी नुकसान पहुंचा
सुवर्द्धन आर्मी के बड़े हेलीकाप्टर एमआई 17 में थे और यह हेलीकाप्टर वहां उतर नहीं पाया। सुवर्द्धन के मुताबिक केदारनाथ मंदिर में भी मलबा दिख रहा है। मंदिर को भी नुकसान पहुंचा है। कुछ लोग मंदिर में भी दिखाई दिए।
मुख्य सचिव के मुताबिक केदारनाथ और गौरीकुंड के बीच के रास्तें में आसपास के क्षेत्र में करीब 800 लोगों के फंसे होने का अनुमान है। यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है। कारण यह है कि गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाले यात्रियों की कोई गिनती नही होती। लिहाजा यह कहना मुश्किल हो रहा है कि इस बाढ़ की चपेट में कितने लोग आए होंगे।
डीजीपी सत्यव्रत बंसल के मुताबिक पीएसी के करीब 15 जवान हैं जिनके बारे में कोई सूचना नही है। इसमें महिला कांस्टेबल भी शामिल हैं। आरआरबी के करीब 15 जवान हैं जो रामबाड़ा की ओर बढ़ रहे थे और पानी आने पर उँचे स्थान पर आने में कामयाब रहे।
500 लोगों को केदारनाथ से निकाला गया
मौसम का साथ मिला तो बचाव के काम में कुछ तेजी भी आई। मुख्य सचिव के मुताबिक करीब 500 लोगों को केदारनाथ से निकाल कर गुप्तकाशी पहुंचाया गया। इनमें से 30 जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे हैं, को देर शाम केदारनाथ से जौलीग्रांट लेकर आया गया। इन लोगों को शांतिकुंज भेजा गया है।
बचाव कार्य में कुल 10 हेलीकाप्टर लगाए गए हैं। अस्थाई व्यवस्था हो जाने पर गोविंदघाट से करीब 3000 लोगों को निकालकर जोशीमठ पहुंचाया जा सका है। हेमकुंड में कोई नहीं फंसा हुआ है।
तीस लोगों के हताहत होने की आशंका
पिथौरागढ़ में मुन्स्यारी के पास तेजम नाम की जगह पर भूस्खलन के कारण मलबे में दब कर करीब तीस लोगों के हताहत होने की आशंका है। कुमाऊं आयुक्त के पास एक हेलीकाप्टर है और वो राहत और बचाव कार्य में इसका उनपयोग कर रहे हैं।
उत्तरकाशी नालूपानी में भी हजारों लोग फंसे हुए हैं और इनको सेना ने रसद और अन्य सामग्री पहुंचाई है। धरासू बैंड के कारण उत्तरकाशी का सड़क मार्ग खोलने में अभी तीन दिन का और समय लग सकता है। मंगलवार को देवप्रयाग तक सड़क मार्ग खोल दिया गया पर रुद्रप्रयाग तक कनेक्टिविटी बनाने में अभी दो दिन का और समय लगेगा।