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गंगा सिकुड़ चुकी, अब सहायक नदियों की बारी
ऋषिकेश/ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jul 2013 10:12 AM IST
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गंगा तट से दो सौ मीटर के दायरे में निर्माण कार्य पर रोक है। इस बाबत वर्ष-1997-98 में उच्च न्यायालय से बाकायदा आदेश पारित हो चुके हैं। इतना ही नहीं राज्य सरकार सन् 2000-01 में इस परिधि में निर्माण पर प्रतिबंध का शासनादेश भी जारी किया गया है, मगर निर्माण कार्य एक दशक बीत जाने के बावजूद थमे नहीं। इतना ही नहीं तीर्थनगरी में
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अतिक्रमण नदी के भीतर तक
कई घर और आश्रमों का अतिक्रमण नदी के भीतर तक हो चुका है। प्रतिबंध के बाद एक दशक में हुए निर्माण कार्यों से ऐसा कहीं नहीं लगता कि जिम्मेदार विभागों से कोर्ट अथवा शासनादेश का पालन सुनिश्चित कराने में रुचि दिखाई हो। विलंब से ही सही केदारनाथ त्रासदी के बाद सरकार को नदी तटों पर निर्माण कार्यों पर कड़ाई से प्रतिबंध की याद आ गई।
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दरअसल नदी तटों पर अतिक्रमण अथवा निर्माण के मामलों में तब तक रोक लग पाना संभव नहीं है, जब तक सरकार दोहरी मानसिकता नहीं बदलेगी।
सरकारी विभाग ही दुश्मन
मसलन एक ओर सरकार गंगा तट से दो सौ मीटर के दायरे में निर्माण पर रोक का शासनादेश जारी करती है, दूसरी ओर ऐसे निर्माण कार्यों को नहीं हटने देने की पैरवी करती है। अथवा सरकारी विभाग ही गंगा की प्राइम लोकेशन में गेस्ट हाउस, दफ्तरों का निर्माण करा रहे हैं।
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जिन सरकारी विभागों को गंगातटों पर निर्माण रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वही विभाग न्यायालय के आदेश और शासनादेश को दरकिनार कर निर्माण के लिए एनओसी जारी कर रहे हैं अथवा मानचित्रों को मंजूरी दी जा रही है।
यही स्थिति नगर क्षेत्र में अन्य सहायक नदियों के तटों की भी है। जिन्हें रोकने के लिए हरिद्वार विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन, नगर निकाय और सिंचाई विभाग नाकाम रहे हैं।
भवन गंगातट से दो सौ मीटर के दायरे में
तीर्थनगरी और समीपवर्ती क्षेत्रों में गंगा के प्रतिबंधित दायरे में निर्माण कार्यों की संख्या हजारों में है। शासनादेश के बाद ही डेढ़ हजार से अधिक भवन गंगातट से दो सौ मीटर के दायरे में बनाए गए हैं।
जबकि निर्माण कार्यों पर रोक का पालन कराने वाली संस्था हरिद्वार विकास प्राधिकरण नगर और आसपास करीब 150 अतिक्रमण ही चिह्नित कर पाई है। चिह्नित निर्माण कार्य कब ध्वस्त होंगे पता नहीं।
चंद्रभागा, खारास्रोत में बिछ रही बिसात
प्रतिबंध के बावजूद गंगा के तट लगातार सिकुड़ रहे हैं। अतिक्रमणकारियों की गिद्धदृष्टि इसकी सहायक नदियों पर भी पड़ चुकी है। गंगा की सहायक नदियां चंद्रभागा और खारास्रोत के दोनों किनारों पर गंगा तट से दो सौ मीटर की परिधि में ही स्थायी, अस्थायी निर्माण कार्यों की संख्या दो सौ से अधिक है।
इन अवैध बस्तियों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे गंगा में गिरकर उसे प्रदूषित कर रहा है।
यह विभाग हैं जिम्मेदार
हरिद्वार विकास प्राधिकरण
सिंचाई विभाग
जिला प्रशासन
नगर निकाय
तीन माह पूर्व आए न्यायालय के आदेश के बाद ऋषिकेश क्षेत्र में लगभग 145 अतिक्रमण चिह्नित किए जा चुके हैं, इस मामले में अग्रिम आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है, इसके बाद इन्हें ध्वस्त कर दिया जाएगा। कुछ और अतिक्रमण हो सकते हैं इनके चिह्निकरण की प्रक्रिया भी चलाई जाएगी।
- गिरधारी सिंह रावत, सचिव एचडीए