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हिंदी में फैसले को लेकर राज्यपाल को लिखा पत्र
Dehradun
Updated Tue, 30 Jul 2013 05:34 AM IST
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देहरादून। उत्तराखंड के सबसे युवा और पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल व अदालती कार्रवाई में हिंदी के लिए संघर्षरत चंद्रशेखर उपाध्याय ने अब फैसले हिंदी में आने की मांग को लेकर राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी को खुला पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र के माध्यम से आवाज उठाई है कि नैनीताल हाईकोर्ट में हिंदी में फैसले देने की प्रक्रिया भी अमल में लाई जाए।
चंद्रशेखर उपाध्याय ने पत्र के माध्यम से राज्यपाल को अवगत कराया कि उत्तराखंड में देश के सबसे कम आयु के एडिशनल एडवोकेट जनरल के पद पर रहते हुए 12 अक्टूबर 2004 को सबसे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदी भाषा में प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया था। ऐसा करने वाले वह उत्तराखंड और देश के पहले सदस्य थे। उन्होंने कहा कि लंबा समय बीत जाने के बावजूद आज तक प्रदेश के उच्च न्यायालय में हिंदी शपथ पत्र दाखिल करने से ऊपर नहीं बढ़ पाई। भारत की इतनी बड़ी आबादी हिंदी भाषी है। अगर वह अपने मुकदमे की पूरी कार्रवाई हिंदी में सुनने और पढ़ने के साथ ही फैसला भी हिंदी में ही जानेंगे तो यह बेहद अच्छा होगा। उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि संविधान के अनुच्छेद 163(2) में प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को यह सुझाव दें कि वह स्वयं सितंबर मां में विशेषकर 14 सितंबर के दिन न सिर्फ समस्त वाद-कार्यवाही हिंदी में संपादित करें बल्कि फैसले भी हिंदी में ही पारित करें।
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चंद्रशेखर उपाध्याय ने पत्र के माध्यम से राज्यपाल को अवगत कराया कि उत्तराखंड में देश के सबसे कम आयु के एडिशनल एडवोकेट जनरल के पद पर रहते हुए 12 अक्टूबर 2004 को सबसे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदी भाषा में प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया था। ऐसा करने वाले वह उत्तराखंड और देश के पहले सदस्य थे। उन्होंने कहा कि लंबा समय बीत जाने के बावजूद आज तक प्रदेश के उच्च न्यायालय में हिंदी शपथ पत्र दाखिल करने से ऊपर नहीं बढ़ पाई। भारत की इतनी बड़ी आबादी हिंदी भाषी है। अगर वह अपने मुकदमे की पूरी कार्रवाई हिंदी में सुनने और पढ़ने के साथ ही फैसला भी हिंदी में ही जानेंगे तो यह बेहद अच्छा होगा। उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि संविधान के अनुच्छेद 163(2) में प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को यह सुझाव दें कि वह स्वयं सितंबर मां में विशेषकर 14 सितंबर के दिन न सिर्फ समस्त वाद-कार्यवाही हिंदी में संपादित करें बल्कि फैसले भी हिंदी में ही पारित करें।
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