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अपनों के आने की टूट रही आस
बिशन सिंह बोरा
Updated Wed, 26 Jun 2013 03:32 PM IST
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आपदा के बाद से कई गांवों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। समय बीतने के साथ अब ग्रामीण लापता अपनों के लौटकर आने की आस छोड़ चुके हैं, जो काफी हद तक मान चुके हैं कि उनका लौटकर आना संभव नहीं है।
ऐसे में कुछ गांवों में तो मृतकों की आत्मा की शांति के लिए क्रियाकर्म के बाद की प्रक्रिया पर विचार होने लगा है।
दियूली गांव के तेज कुमार तिवारी का कहना है कि दाह संस्कार नहीं हुआ, लेकिन मृतकों की आत्मा की शांति के लिए कुछ उपाय तो करने ही हैं।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
तिवारी ने बताया ऊखीमठ ब्लाक के दियूली, लमगोंडी, ल्वाणी, बडासु, रुद्रपुर समेत कई गांवों से सैकड़ों लोग लापता हैं। आपदा से रुद्रप्रयाग जनपद के गांव के गांव तबाह हो चुके हैं। कई ग्रामीणों के लापता होने के बाद गांव वाले मान चुके हैं कि अब कोई लौटकर नहीं आएगा।
दियूली गांव से 60 लोग लापता
दून में आराघर दुकानदार समिति के अध्यक्ष एवं दियूली गांव निवासी रामकृष्ण तिवारी बताते हैं कि 16 जून की रात से परिवार के कुछ लोग लापता हैं। यदि कुछ और दिनों तक इनका पता न चला तो आटे का पुतला बनाकर संस्कार की प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। तेजप्रकाश तिवारी के मुताबिक दियूली गांव से 60 लोग लापता हैं, इस गांव के अधिकतर लोग केदारनाथ मंदिर में पुरोहित और व्यवसायी थे। उनके होटल, दुकानें तबाह हो गए हैं।
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लमगोंणी में 25, ल्वाणी में 20, रुद्रपुर में 12, तुनंगा में 14 लोगों का कई रोज बाद भी कुछ अता पता नहीं हैं। लोग निर्णय सिंधु में उनकी आत्मा की शांति के लिए उपायों पर विचार कर रहे हैं।
27 लोग लापता, दो होटल बहे
दियूली गांव निवासी सुरेश तिवारी और उनके भाई का केदारनाथ में होटल बह गया। दोनों होटलों में दून और टिहरी के 27 लोग काम करते थे। इन होटलों में काम करने वाले केवल चार लोग टिहरी के बालम सिंह, उमेद सिंह, दून के रबल सिंह और टिहरी के राजू ही लौट पाए हैं।
अन्य का अब तक कुछ अता पता नहीं हैं। आराघर दुकानदार समिति के अध्यक्ष राम कृष्ण तिवारी बताते हैं कि 16 जून की रात केदारनाथ में पानी भरने लगा था। जिसके बाद सभी ने निर्णय लिया कि 17 को होटल बंद कर सभी वापस निकल जाएंगे, लेकिन 17 जून की सुबह फिर से मलबे के साथ पानी आया। जिसके बाद से होटल मालिक सुरेश तिवारी सहित होटल में काम करने वाले 27 लोगों का कुछ पता नहीं चल पाया है।
दाह संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाए परिजन
कई ग्रामीणों को उनके अपनों के दाह संस्कार में केदारनाथ नहीं जाने दिया। दियूली के तेज कुमार तिवारी ने कहा शासन-प्रशासन ने ग्रामीणों को दाह संस्कार में जाने से रोक दिया है।
रोंगटे खड़े कर देती है तबाही
दून निवासी सुबोध सेमवाल बताते हैं कि पत्नी कल्पना के साथ 14 जून को गौरीकुंड में जिस होटल में रुके थे वह आपदा की भेंट चढ़ गया। होटल के कर्मचारियों का कई रोज बाद भी पता नहीं चल पाया है। पत्नी इस तबाही को याद कर सिहर उठती है।
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ऐसे में कुछ गांवों में तो मृतकों की आत्मा की शांति के लिए क्रियाकर्म के बाद की प्रक्रिया पर विचार होने लगा है।
दियूली गांव के तेज कुमार तिवारी का कहना है कि दाह संस्कार नहीं हुआ, लेकिन मृतकों की आत्मा की शांति के लिए कुछ उपाय तो करने ही हैं।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
तिवारी ने बताया ऊखीमठ ब्लाक के दियूली, लमगोंडी, ल्वाणी, बडासु, रुद्रपुर समेत कई गांवों से सैकड़ों लोग लापता हैं। आपदा से रुद्रप्रयाग जनपद के गांव के गांव तबाह हो चुके हैं। कई ग्रामीणों के लापता होने के बाद गांव वाले मान चुके हैं कि अब कोई लौटकर नहीं आएगा।
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दियूली गांव से 60 लोग लापता
दून में आराघर दुकानदार समिति के अध्यक्ष एवं दियूली गांव निवासी रामकृष्ण तिवारी बताते हैं कि 16 जून की रात से परिवार के कुछ लोग लापता हैं। यदि कुछ और दिनों तक इनका पता न चला तो आटे का पुतला बनाकर संस्कार की प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। तेजप्रकाश तिवारी के मुताबिक दियूली गांव से 60 लोग लापता हैं, इस गांव के अधिकतर लोग केदारनाथ मंदिर में पुरोहित और व्यवसायी थे। उनके होटल, दुकानें तबाह हो गए हैं।
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लमगोंणी में 25, ल्वाणी में 20, रुद्रपुर में 12, तुनंगा में 14 लोगों का कई रोज बाद भी कुछ अता पता नहीं हैं। लोग निर्णय सिंधु में उनकी आत्मा की शांति के लिए उपायों पर विचार कर रहे हैं।
27 लोग लापता, दो होटल बहे
दियूली गांव निवासी सुरेश तिवारी और उनके भाई का केदारनाथ में होटल बह गया। दोनों होटलों में दून और टिहरी के 27 लोग काम करते थे। इन होटलों में काम करने वाले केवल चार लोग टिहरी के बालम सिंह, उमेद सिंह, दून के रबल सिंह और टिहरी के राजू ही लौट पाए हैं।
अन्य का अब तक कुछ अता पता नहीं हैं। आराघर दुकानदार समिति के अध्यक्ष राम कृष्ण तिवारी बताते हैं कि 16 जून की रात केदारनाथ में पानी भरने लगा था। जिसके बाद सभी ने निर्णय लिया कि 17 को होटल बंद कर सभी वापस निकल जाएंगे, लेकिन 17 जून की सुबह फिर से मलबे के साथ पानी आया। जिसके बाद से होटल मालिक सुरेश तिवारी सहित होटल में काम करने वाले 27 लोगों का कुछ पता नहीं चल पाया है।
दाह संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाए परिजन
कई ग्रामीणों को उनके अपनों के दाह संस्कार में केदारनाथ नहीं जाने दिया। दियूली के तेज कुमार तिवारी ने कहा शासन-प्रशासन ने ग्रामीणों को दाह संस्कार में जाने से रोक दिया है।
रोंगटे खड़े कर देती है तबाही
दून निवासी सुबोध सेमवाल बताते हैं कि पत्नी कल्पना के साथ 14 जून को गौरीकुंड में जिस होटल में रुके थे वह आपदा की भेंट चढ़ गया। होटल के कर्मचारियों का कई रोज बाद भी पता नहीं चल पाया है। पत्नी इस तबाही को याद कर सिहर उठती है।