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T20 World Cup 2026: फॉर्मेट पर उठे सवालों पर सुनील गावस्कर की दो टूक राय, पूछा- पहले क्यों नहीं आपत्ति जताई?
Sun, 22 Feb 2026 12:53 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 22 Feb 2026 12:53 PM IST
सार
टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 फॉर्मेट को लेकर आईसीसी की आलोचना हो रही है। प्री-सीडिंग के कारण सभी ग्रुप विजेता एक ही ग्रुप में आ गए हैं। इस पर सुनील गावस्कर ने कहा कि अब सवाल उठाना बेकार है और लॉजिस्टिक कारणों से यह फैसला लिया गया होगा। आईसीसी ने इसे आयोजन की जरूरत बताया है।
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सुनील गावस्कर
- फोटो : ANI
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विस्तार
टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 चरण के लिए जैसे ही दोनों ग्रुप घोषित हुए, सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद द्वारा अपनाए गए 'प्री-सीडिंग' फॉर्मेट के कारण सभी चार ग्रुप विजेता- भारत, जिम्बाब्वे, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका को एक ही ग्रुप में रखा गया। वहीं दूसरे ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमें पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड शामिल हैं। इस व्यवस्था के चलते आलोचकों का मानना है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमें ही ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ में फंस गई हैं, जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमों का रास्ता अपेक्षाकृत आसान हो गया है।
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सुनील गावस्कर का स्पष्ट रुख
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने इस विवाद पर साफ शब्दों में अपनी राय रखी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब टूर्नामेंट शुरू होने से पहले फॉर्मेट तय था, तब किसी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई? गावस्कर का कहना है कि अब इस मुद्दे को उठाना व्यर्थ है। उनके अनुसार, अगर किसी को फॉर्मेट से समस्या थी तो उसे पहले ही आवाज उठानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आईसीसी के पास इस निर्णय के पीछे ठोस कारण रहे होंगे।
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने इस विवाद पर साफ शब्दों में अपनी राय रखी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब टूर्नामेंट शुरू होने से पहले फॉर्मेट तय था, तब किसी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई? गावस्कर का कहना है कि अब इस मुद्दे को उठाना व्यर्थ है। उनके अनुसार, अगर किसी को फॉर्मेट से समस्या थी तो उसे पहले ही आवाज उठानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आईसीसी के पास इस निर्णय के पीछे ठोस कारण रहे होंगे।
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लॉजिस्टिक्स भी बड़ी वजह
गावस्कर ने प्री-सीडिंग के पीछे लॉजिस्टिक कारणों को अहम बताया। चूंकि टूर्नामेंट दो देशों में खेला जा रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा, वीज़ा, इमिग्रेशन, कस्टम क्लियरेंस, होटल बुकिंग और उड़ानों की व्यवस्था जैसे कई पहलुओं पर पहले से योजना बनानी पड़ती है।
हर टीम का सपोर्ट स्टाफ अलग-अलग संख्या में होता है। कुछ टीमें 35-40 कमरों की जरूरत रखती हैं, जबकि कुछ कम लोगों के साथ यात्रा करती हैं। ऐसे में आयोजकों को महीनों पहले होटल और यात्रा की पुष्टि करनी होती है। गावस्कर के मुताबिक, संभवतः इन्हीं व्यावहारिक कारणों से आईसीसी ने प्री-सीडिंग का फैसला लिया।
गावस्कर ने प्री-सीडिंग के पीछे लॉजिस्टिक कारणों को अहम बताया। चूंकि टूर्नामेंट दो देशों में खेला जा रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा, वीज़ा, इमिग्रेशन, कस्टम क्लियरेंस, होटल बुकिंग और उड़ानों की व्यवस्था जैसे कई पहलुओं पर पहले से योजना बनानी पड़ती है।
हर टीम का सपोर्ट स्टाफ अलग-अलग संख्या में होता है। कुछ टीमें 35-40 कमरों की जरूरत रखती हैं, जबकि कुछ कम लोगों के साथ यात्रा करती हैं। ऐसे में आयोजकों को महीनों पहले होटल और यात्रा की पुष्टि करनी होती है। गावस्कर के मुताबिक, संभवतः इन्हीं व्यावहारिक कारणों से आईसीसी ने प्री-सीडिंग का फैसला लिया।
प्री-सीडिंग विवाद क्या है?
दरअसल, विवाद इस बात को लेकर है कि सुपर 8 के ग्रुप टूर्नामेंट से पहले तय रैंकिंग के आधार पर बनाए गए, न कि ग्रुप चरण के वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर। आलोचकों का तर्क है कि यह व्यवस्था “उत्कृष्टता को दंडित” करती है, क्योंकि जो टीमें ग्रुप स्टेज में शीर्ष पर रहीं, उन्हें एक-दूसरे से ही भिड़ना पड़ रहा है। इससे सेमीफाइनल की राह कठिन हो गई है। हालांकि आईसीसी का पक्ष है कि यह निर्णय प्रसारण, यात्रा और प्राइम-टाइम मुकाबलों की योजना को सुचारू रखने के लिए जरूरी था।
दरअसल, विवाद इस बात को लेकर है कि सुपर 8 के ग्रुप टूर्नामेंट से पहले तय रैंकिंग के आधार पर बनाए गए, न कि ग्रुप चरण के वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर। आलोचकों का तर्क है कि यह व्यवस्था “उत्कृष्टता को दंडित” करती है, क्योंकि जो टीमें ग्रुप स्टेज में शीर्ष पर रहीं, उन्हें एक-दूसरे से ही भिड़ना पड़ रहा है। इससे सेमीफाइनल की राह कठिन हो गई है। हालांकि आईसीसी का पक्ष है कि यह निर्णय प्रसारण, यात्रा और प्राइम-टाइम मुकाबलों की योजना को सुचारू रखने के लिए जरूरी था।
खेल बनाम प्रबंधन
यह विवाद खेल और प्रबंधन के संतुलन को सामने लाता है। एक ओर प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन की बात है, तो दूसरी ओर वैश्विक टूर्नामेंट के संचालन की जटिलताएं। गावस्कर ने स्पष्ट किया कि बड़े टूर्नामेंट में केवल क्रिकेट नहीं, बल्कि आयोजन की व्यावहारिक चुनौतियां भी अहम होती हैं।
यह विवाद खेल और प्रबंधन के संतुलन को सामने लाता है। एक ओर प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन की बात है, तो दूसरी ओर वैश्विक टूर्नामेंट के संचालन की जटिलताएं। गावस्कर ने स्पष्ट किया कि बड़े टूर्नामेंट में केवल क्रिकेट नहीं, बल्कि आयोजन की व्यावहारिक चुनौतियां भी अहम होती हैं।