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'जब दो साल एक भी सीरीज नहीं हारे तो बदलाव क्यों?': सूर्यकुमार ने तोड़ी चुप्पी; टीम से निकाले जाने पर क्या कहा?
Sat, 29 Aug 2026 11:07 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sat, 29 Aug 2026 11:07 AM IST
सार
टी20 विश्व कप 2026 में भारत को चैंपियन बनाने वाले पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टीम से बाहर किए जाने के फैसले पर पहली बार खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि चयनकर्ताओं के फैसले से वह निराश थे और उनके मन में सवाल उठा था कि विश्व कप जीतने के तुरंत बाद ऐसा कैसे हो सकता है। हालांकि, उन्होंने फैसले को सम्मान के साथ स्वीकार किया।
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सूर्यकुमार यादव
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत को 2026 टी20 विश्व कप में अपनी कप्तानी में चैंपियन बनाने वाले सूर्यकुमार यादव अब भारतीय टी20 टीम का हिस्सा नहीं हैं। टीम की कप्तानी भी उनसे लेकर श्रेयस अय्यर को सौंप दी गई। बीसीसीआई चयनकर्ताओं के इस फैसले ने क्रिकेट जगत को हैरान किया था। अब कई महीने बाद सूर्यकुमार यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। पूर्व भारतीय बल्लेबाज आकाश चोपड़ा के साथ बातचीत में सूर्यकुमार ने बताया कि टीम में अपना नाम नहीं देखकर उनकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह खुद को अगले दो वर्षों तक भारतीय टी20 टीम का नेतृत्व करते हुए देख रहे थे।
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टीम से नाम गायब देखा तो मुस्कुराए सूर्यकुमार
सूर्यकुमार ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि टीम में उनका नाम नहीं है तो उन्होंने गुस्सा या नाराजगी जाहिर करने के बजाय मुस्कुराना चुना। उन्होंने बताया कि दबाव की परिस्थितियों में शांत रहना उनकी आदत रही है। उन्होंने कहा, 'जब मेरा नाम वहां नहीं था तो मैं मुस्कुराया। क्योंकि जब मैं एक-दो साल तक टीम के साथ क्रिकेट खेल रहा था और जब भी खेल रहा था, तो ऐसी परिस्थितियां आई हैं, जब दबाव था या चीजें मेरे हिसाब से नहीं हो रही थीं। ऐसे समय में मैं हमेशा मुस्कुराता रहा हूं। मैं खुद को सहज रखता हूं। अतीत में भी जब मुझे अच्छा करने के मौके मिले, तब मैंने उन पलों के लिए आभारी रहना सीखा है।' हालांकि, यह फैसला उनके लिए पूरी तरह अप्रत्याशित था।
विश्वकप जिताने के बाद भी नहीं सोचा था ऐसा होगा
सूर्यकुमार ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि टीम में उनका नाम नहीं है तो उन्होंने गुस्सा या नाराजगी जाहिर करने के बजाय मुस्कुराना चुना। उन्होंने बताया कि दबाव की परिस्थितियों में शांत रहना उनकी आदत रही है। उन्होंने कहा, 'जब मेरा नाम वहां नहीं था तो मैं मुस्कुराया। क्योंकि जब मैं एक-दो साल तक टीम के साथ क्रिकेट खेल रहा था और जब भी खेल रहा था, तो ऐसी परिस्थितियां आई हैं, जब दबाव था या चीजें मेरे हिसाब से नहीं हो रही थीं। ऐसे समय में मैं हमेशा मुस्कुराता रहा हूं। मैं खुद को सहज रखता हूं। अतीत में भी जब मुझे अच्छा करने के मौके मिले, तब मैंने उन पलों के लिए आभारी रहना सीखा है।' हालांकि, यह फैसला उनके लिए पूरी तरह अप्रत्याशित था।
विश्वकप जिताने के बाद भी नहीं सोचा था ऐसा होगा
- सूर्यकुमार ने स्वीकार किया कि 2026 में विश्वकप जीतने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि वह आगे भी टीम की अगुआई करेंगे। उनके मुताबिक, उन्हें लगता था कि आगामी ओलंपिक और अगले टी20 विश्व कप तक टीम को आगे ले जाने की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।
- उन्होंने कहा, '2026 आने के बाद मुझे लगा था कि आगे के दो साल तक मैं इस टीम को आगे ले जाऊंगा। ओलंपिक आएंगे, फिर एक और टी20 विश्व कप आएगा और आगे नई चुनौती होगी। लेकिन आप जो सोचते हैं और दूसरा व्यक्ति जो सोचता है, वे दो अलग चीजें हैं। अगर उन्हें लगा कि आगे बढ़ने के लिए यह बेहतर फैसला है तो उन्होंने वही फैसला लिया। जरूरी है कि उनके विचारों का भी सम्मान किया जाए।' सूर्यकुमार ने यह भी साफ किया कि वह चयनकर्ताओं के फैसले को लेकर किसी तरह की कटुता नहीं रखते।
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'दो साल एक भी सीरीज नहीं हारे, फिर बदलाव क्यों?'
सूर्यकुमार ने माना कि चयनकर्ताओं के फैसले से उन्हें निराशा जरूर हुई। उनके मुताबिक, कप्तानी के दौरान टीम ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया था और ऐसे में बदलाव का कारण समझना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा, 'मैंने जो टीम चुनी गई है, उसे देखा है। मैंने श्रेयस के साथ काफी क्रिकेट खेली है। मैं जानता हूं कि वह अच्छे खिलाड़ी, अच्छे इंसान और अच्छे कप्तान भी हैं। इसलिए मेरे मन में यह नहीं था कि उन्हें कप्तान क्यों बनाया गया। लेकिन हां, मैं थोड़ा निराश था। क्योंकि आपने दो साल में एक भी सीरीज नहीं हारी है। आपने विश्व कप और एशिया कप जीता है। फिर आप चाहते हैं कि यही चीज आगे भी जारी रहे। जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो तो बदलाव क्यों? बदलाव का कारण क्या है? यही बात मेरे दिमाग में चल रही थी। मैं करीब डेढ़ महीने तक घर पर बैठा रहा।' यानी सूर्यकुमार को श्रेयस अय्यर के कप्तान बनने से आपत्ति नहीं थी, बल्कि उन्हें अपने हटाए जाने के फैसले ने परेशान किया।
सूर्यकुमार ने माना कि चयनकर्ताओं के फैसले से उन्हें निराशा जरूर हुई। उनके मुताबिक, कप्तानी के दौरान टीम ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया था और ऐसे में बदलाव का कारण समझना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा, 'मैंने जो टीम चुनी गई है, उसे देखा है। मैंने श्रेयस के साथ काफी क्रिकेट खेली है। मैं जानता हूं कि वह अच्छे खिलाड़ी, अच्छे इंसान और अच्छे कप्तान भी हैं। इसलिए मेरे मन में यह नहीं था कि उन्हें कप्तान क्यों बनाया गया। लेकिन हां, मैं थोड़ा निराश था। क्योंकि आपने दो साल में एक भी सीरीज नहीं हारी है। आपने विश्व कप और एशिया कप जीता है। फिर आप चाहते हैं कि यही चीज आगे भी जारी रहे। जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो तो बदलाव क्यों? बदलाव का कारण क्या है? यही बात मेरे दिमाग में चल रही थी। मैं करीब डेढ़ महीने तक घर पर बैठा रहा।' यानी सूर्यकुमार को श्रेयस अय्यर के कप्तान बनने से आपत्ति नहीं थी, बल्कि उन्हें अपने हटाए जाने के फैसले ने परेशान किया।
'मैं सोच रहा था, ऐसा कैसे हो सकता है?'
सबसे ज्यादा भावुक क्षणों के बारे में बताते हुए सूर्यकुमार ने कहा कि उनके मन में बार-बार यही सवाल आ रहा था कि विश्व कप जीतने के तुरंत बाद उन्हें टीम से बाहर कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'मैं सोच रहा था, ऐसा कैसे हो सकता है? यह कैसे संभव है? हमने अभी विश्व कप जीता था। हां, आईपीएल उतना अच्छा नहीं रहा था, जितना मैं चाहता था। हम घर पर बैठे थे। दोस्त आए, परिवार आया। सभी ने कहा कि ठीक है, यह जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन जब वे घर से चले जाते हैं तो हम घर पर अकेले रह जाते हैं।' इस बयान से साफ है कि बाहर किए जाने का फैसला उनके लिए भावनात्मक रूप से आसान नहीं था।
सबसे ज्यादा भावुक क्षणों के बारे में बताते हुए सूर्यकुमार ने कहा कि उनके मन में बार-बार यही सवाल आ रहा था कि विश्व कप जीतने के तुरंत बाद उन्हें टीम से बाहर कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'मैं सोच रहा था, ऐसा कैसे हो सकता है? यह कैसे संभव है? हमने अभी विश्व कप जीता था। हां, आईपीएल उतना अच्छा नहीं रहा था, जितना मैं चाहता था। हम घर पर बैठे थे। दोस्त आए, परिवार आया। सभी ने कहा कि ठीक है, यह जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन जब वे घर से चले जाते हैं तो हम घर पर अकेले रह जाते हैं।' इस बयान से साफ है कि बाहर किए जाने का फैसला उनके लिए भावनात्मक रूप से आसान नहीं था।
चयनकर्ताओं ने दो दिन पहले ही बता दिया था
सूर्यकुमार ने यह भी खुलासा किया कि टीम की घोषणा से दो-तीन दिन पहले चयनकर्ताओं ने उनसे बात की थी। उन्हें साफ तौर पर कहा गया था कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, 'टीम की घोषणा से दो-तीन दिन पहले उन्होंने मुझे फोन किया था। उन्होंने कहा कि अब आगे बढ़ने का समय है। मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। क्योंकि यह मेरी गलती नहीं है। सूर्यकुमार ऐसा कभी नहीं रहा है। जिसने भी फैसला लिया, उसने जरूर सोचा होगा कि टीम के लिए यही बेहतर है और आगे चलकर यह अच्छा फैसला होगा। आपने फैसला लिया और मुझे बताया, इसमें कोई समस्या नहीं है।' सूर्यकुमार ने साफ किया कि वह भविष्य में भी क्रिकेट खेलने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'मैं तैयार हूं। आप मुझे कभी भी बुला सकते हैं। मैं कभी भी क्रिकेट खेल रहा हूं और खेलता रहूंगा। जब आपको लगे कि समय सही है और परिस्थितियां सही हैं, मैं तैयार हूं।'
सूर्यकुमार ने यह भी खुलासा किया कि टीम की घोषणा से दो-तीन दिन पहले चयनकर्ताओं ने उनसे बात की थी। उन्हें साफ तौर पर कहा गया था कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, 'टीम की घोषणा से दो-तीन दिन पहले उन्होंने मुझे फोन किया था। उन्होंने कहा कि अब आगे बढ़ने का समय है। मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। क्योंकि यह मेरी गलती नहीं है। सूर्यकुमार ऐसा कभी नहीं रहा है। जिसने भी फैसला लिया, उसने जरूर सोचा होगा कि टीम के लिए यही बेहतर है और आगे चलकर यह अच्छा फैसला होगा। आपने फैसला लिया और मुझे बताया, इसमें कोई समस्या नहीं है।' सूर्यकुमार ने साफ किया कि वह भविष्य में भी क्रिकेट खेलने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'मैं तैयार हूं। आप मुझे कभी भी बुला सकते हैं। मैं कभी भी क्रिकेट खेल रहा हूं और खेलता रहूंगा। जब आपको लगे कि समय सही है और परिस्थितियां सही हैं, मैं तैयार हूं।'
कप्तानी गई, लेकिन टीम के लिए बुरा नहीं सोचते
सूर्यकुमार ने श्रेयस अय्यर के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि नई कप्तानी में भी भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। उनका रुख यह बताता है कि कप्तानी और टीम से बाहर किए जाने की निराशा के बावजूद उन्होंने चयनकर्ताओं के फैसले को सार्वजनिक विवाद में बदलने के बजाय सम्मान के साथ स्वीकार किया है। अब देखना होगा कि क्या भविष्य में भारतीय टीम को उनकी दोबारा जरूरत महसूस होती है और सूर्यकुमार को एक बार फिर टी20 जर्सी पहनने का मौका मिलता है।
सूर्यकुमार ने श्रेयस अय्यर के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि नई कप्तानी में भी भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। उनका रुख यह बताता है कि कप्तानी और टीम से बाहर किए जाने की निराशा के बावजूद उन्होंने चयनकर्ताओं के फैसले को सार्वजनिक विवाद में बदलने के बजाय सम्मान के साथ स्वीकार किया है। अब देखना होगा कि क्या भविष्य में भारतीय टीम को उनकी दोबारा जरूरत महसूस होती है और सूर्यकुमार को एक बार फिर टी20 जर्सी पहनने का मौका मिलता है।