Ravi Bishnoi: तीन विश्व कप से चूके, फिर भी नहीं टूटा हौसला! रवि बिश्नोई बोले- अब वापसी नहीं, जगह पक्की चाहिए
लगातार तीन विश्व कप से बाहर होने के बाद लेग स्पिनर रवि बिश्नोई की टीम इंडिया में वापसी हुई है। उन्होंने कहा कि वह अब 'कमबैक मैन' के रूप में नहीं, बल्कि टीम में स्थायी सदस्य बनना चाहते हैं।
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भारतीय लेग स्पिनर रवि बिश्नोई अपने उतार-चढ़ाव वाले अंतरराष्ट्रीय करियर में बार-बार 'कमबैक' करने वाले खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान नहीं बनाना चाहते। चयनकर्ताओं के राडार पर रहने के बावजूद पिछले तीन टी20 वर्ल्ड कप की टीम में जगह बनाने से चूकने वाले बिश्नोई की एक बार फिर भारतीय टीम में वापसी हुई है।
एक नए वर्ल्ड कप चक्र की शुरुआत के साथ टीम में लौटे जोधपुर के 25 वर्षीय इस स्पिनर को उम्मीद है कि इस बार उन्हें टीम में लंबा मौका मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें आयरलैंड, इंग्लैंड और एशियाई खेलों के आगामी दौरे के लिए टीम में कुलदीप यादव से पहले चुना गया है। इस समय टीम में वरुण चक्रवर्ती के साथ वे इकलौते विशेषज्ञ स्पिनर हैं, जबकि अक्षर पटेल और वाशिंगटन सुंदर ऑलराउंडर की भूमिका निभा रहे हैं।
IPL अच्छा नहीं रहा, पर अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड है दमदार
आमतौर पर एक अच्छा आईपीएल सीजन खिलाड़ियों को टी20 प्रारूप में भारतीय टीम का टिकट दिला देता है, लेकिन रवि बिश्नोई के लिए हालिया आईपीएल कुछ खास नहीं रहा था। टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्हें बेंच पर बैठना पड़ा था और उनकी जगह नए खिलाड़ी यश राज पुंजा को मौका दिया गया था। इसके बावजूद, बिश्नोई का अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड काफी शानदार रहा है। उन्होंने अब तक 44 मैचों में 7.40 की बेहतरीन इकोनॉमी रेट से 64 विकेट चटकाए हैं। वह आईसीसी (ICC) टी20 रैंकिंग में नंबर एक गेंदबाज भी रह चुके हैं।
न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बिश्नोई ने साफ किया कि वह साल 2028 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। भारतीय टीम प्रबंधन नए कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में आयरलैंड सीरीज से नए खिलाड़ियों और संयोजनों को आजमाने जा रहा है। टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर हैं। चूंकि भारतीय टीम अभी वनडे सीरीज खेल रही है, इसलिए बिश्नोई ने अभी तक श्रेयस और गंभीर से बात नहीं की है, लेकिन उनके दिमाग में अपनी भूमिका को लेकर पूरी स्पष्टता है।
वर्ल्ड कप चूकना निराशाजनक था, पर आगे बढ़ना जरूरी
बिश्नोई ने भारत के लिए अपना आखिरी मैच इसी साल जनवरी में खेला था, जिसके बाद वे घरेलू सरजमीं पर हुए वर्ल्ड कप की बस पकड़ने से चूक गए थे। लगातार तीन वर्ल्ड कप में विचार न किए जाने पर उन्होंने कहा कि उनके पास घर पर अपने कोच शाह रुख भाई के साथ अपनी कला पर काम करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
बिश्नोई ने कहा "वर्ल्ड कप में खेलना और उसे जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है। यह मेरा भी सपना है। भले ही मैं पिछले वर्ल्ड कप चूक गया, लेकिन मेरे पास आगे और भी मौके हैं। इसलिए मैं इस बार कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता और इसे यादगार बनाना चाहता हूं।"
रवि बिश्नोई को उनकी बहुत तेज टर्न होने वाली लेग ब्रेक गेंदों के लिए नहीं जाना जाता है, बल्कि उनकी असली ताकत उनकी स्लाइडर और गुगली गेंदे हैं। पिछले कुछ समय से वे कुछ बहुत ज्यादा नया करने के बजाय अपनी सटीकता बनाए रखने पर ध्यान दे रहे हैं।
अपनी रणनीति साझा करते हुए बिश्नोई ने कहा कि मैं अपनी गेंदबाजी को इतना सीधा और सरल रखता हूं कि अगर मैं गेंद को 5-6 मीटर की लेंथ वाले एरिया में गिराता हूं, तो वहां से शॉट मारना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए घर लौटने के बाद, मैं जितनी बार हो सके उस एरिया में गेंद डालने का अभ्यास करता हूं। इन दिनों मैं अपने बेसिक्स (बुनियादी चीजों) पर काम कर रहा था। मैं अपनी गेंदबाजी को बहुत उलझा हुआ नहीं, बल्कि सरल रखना चाहता हूं। मेरी गेंदबाजी की खासियत यही है कि अगर मैं इसमें सादगी रखता हूं, तो मुझे सफलता मिलती है।