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इस बार खुद को साबित करना चाहेगा जिम्बाब्वे
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 22 Jan 2015 05:24 PM IST
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1975 और 1979 के शुरुआती दो वर्ल्ड कप को छोड़ दें तो जिम्बाब्वे की टीम ने बाकी सभी वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है।
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पुरानी टीम होने और समय-समय पर कई अच्छे खिलाड़ी होने के बावजूद इस टीम को आज तक वह सम्मान नहीं मिल सका, जिसकी वह हकदार है।
वर्ल्ड कप में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 और 2003 में रहा जब टीम ने सुपर सिक्स चरण में जगह बनाने में कामयाबी हासिल की।
वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे ने कुल 52 मैच खेले हैं, जिनमें से उसने 11 जीते, जबकि 37 में उसे हार मिली। एक मैच टाई रहा जबकि 3 का कोई नतीजा नहीं निकल सका। क्रिकेट की दुनिया में प्रतिभाशाली खिलाड़ी होने के बावजूद अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकी यह टीम इस बार खुद को साबित करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देगी।
खास बातें
1992 में आईसीसी से टेस्ट दर्जा मिला।
कप्तान : एल्टन चिगुंबरा
कोच : एलन बुचर (इंग्लैंड)
जिम्बाब्वे टीम-एल्टन चिगुंबरा (कप्तान), रेगिस चकाबवा (विकेटकीपर), तेंदई चतारा, चामू चिभाभा, क्रेग इर्विन, कामुन गोजी, हैमिल्टन मसाकद्जा, तवांदा मुपारिवा, तिनाशे पान्यागारा, सिकंदर रजा, ब्रैंडन टेलर, प्रास्पर उत्सेया, सीन विलियम्स, सोलोमन मीरे और स्टुअर्ट मत्सिकेनयेरी।
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