{"_id":"61ffbb9c63f1216f7270fd9b","slug":"u19-world-cup-star-indian-fast-bowler-ravi-kumar-story-father-rajinder-singh-soldier-story","type":"story","status":"publish","title_hn":"U19 World Cup: जब रवि कुमार के 'फौजी' पिता ने बेटे को नहीं बताई थी ग्रेनेड से घायल होने की खबर, टीवी से पता चला था","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
U19 World Cup: जब रवि कुमार के 'फौजी' पिता ने बेटे को नहीं बताई थी ग्रेनेड से घायल होने की खबर, टीवी से पता चला था
Sun, 06 Feb 2022 05:44 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 06 Feb 2022 05:44 PM IST
सार
रजिंदर ने कहा कि रवि हमेशा से अपने काम के प्रति समर्पित रहे हैं। हम लगातार वीडियो कॉल पर बातचीत करते रहते हैं। मैं उससे हमेशा कहता हूं कि देश से बढ़कर कुछ नहीं है।
विज्ञापन
रवि कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया। खिताबी मुकाबले में भारत के तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन कमाल का रहा। राज बावा ने पांच और रवि कुमार ने चार विकेट झटके। रवि कुमार इस विश्व कप में भारत के दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। उन्होंने छह मैचों में 10 विकेट झटके। नॉकआउट मुकाबलो में तो उनका प्रदर्शन कमाल का रहा। सेमीफाइनल और फाइनल में टीम इंडिया की जीत में उनका अहम योगदान रहा।
रवि कुमार भारत के लिए स्टार बनकर उभरे
रवि कुमार का स्टार बनकर सामने आने में न सिर्फ उनकी मेहनत का कमाल है, बल्कि उनके पिता की भी मेहनत है। रवि के पिता रजिंदर सिंह सीआरपीएफ में जवान हैं और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर की पद पर हैं। वह फिलहाल ओडिशा के माओवादी प्रभावित रायगढ़ जिले में तैनात हैं। रजिंदर ने अब तक अपनी पूरी जिंदगी देश की सेवा में लगा दी। अब उनका 18 साल का बेटा भी क्रिकेट में देश की सेवा कर रहा है। रवि की घातक गेंदबाजी की बदौलत ही भारत ने पांचवीं बार अंडर-19 विश्व कप का खिताब जीता।
2006 में ग्रेनेड हमले में घायल हुए थे रवि के पिता
रजिंदर ने कहा- हम गोली चला के देश की सेवा करते हैं और बेटा मैच में गेंद डाल के। वह बताते हैं कि 2006 में जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में एक ग्रेनेड हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए थे। तब रवि दो साल के थे। इस हमले में एक सैनिक की मौत हुई थी, वहीं 11 जवान घायल हो गए थे। हालांकि, उन्होंने कभी इसका जिक्र अपने परिवार से नहीं किया। रजिंदर ने लगभग सारा जीवन श्रीनगर में आतंकियों से प्रभावित इलाकों में बिताया है, लेकिन उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि उनकी पत्नी और तीन बच्चे चैन से रहें और सोएं।
विज्ञापन
परिवार को तकलीफ नहीं देना चाहते हैं रजिंदर
रजिंदर ने बताया कि मैंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि मेरा परिवार खुश रहे, बिना उस दर्द को जाने जो मैंने सहा है। यहां तक कि जब मेरे दोनों पैरों और हाथों में चोट लगी थी, तब भी मैंने उन्हें नहीं बताया था। उन्हें केवल टीवी से पता चला था कि कोई ग्रेनेड हमला हुआ था। अब रवि के विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद रजिंदर के कैंप में वह सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले जवान हैं। इसकी शुरुआत बांग्लादेश के खिलाफ मैच से हुई थी। उस मैच में रवि प्लेयर ऑफ द मैच बने थे।
रवि ने नॉकआउट मैचों में शानदार प्रदर्शन किया
रवि ने उस मैच में 14 रन देकर तीन विकेट झटके थे। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 37 रन देकर दो विकेट झटके। फिर फाइनल में इंग्लैंड के शानदार प्रदर्शन ने रवि को स्टार बना दिया। रजिंदर बोले- आमतौर पर परिवार वाले अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए परेशान रहते हैं, लेकिन मेरा बेटा देश को गर्व महसूस करा रहा है। रजिंदर हमेशा से अपने घर से दूर रहे हैं और उन्हें रवि के साथ ज्यादा समय बिताने को नहीं मिला।
13-14 साल पहले रवि ने क्रिकेट खेलना शुरू किया
रजिंदर बताता हैं कि बाद में मुझे पता चला कि अरविंद भारद्वाज जी ने रवि को क्रिकेट में डाल दिया है। इस तरह 13-14 साल पहले रवि के क्रिकेट करियर की शुरुआत हुई। मुझे तब इस बात की चिंता था कि मेरे पास पैसा नहीं था और मैं रवि के क्रिकेटिंग करियर को आगे कैसे बढ़ाऊंगा, लेकिन उसने अपनी मेहनत से नाम कमाया। यह दिखाता है कि उनमें लड़ने का जुनून है। उम्मीद करता हूं कि वह सीनियर लेवल तक जा पाएंगे।
रवि के लिए आसान नहीं रहा है क्रिकेट में सफर
रवि के लिए भी यह सफर आसान नहीं रहा है। उन्होंने यूपी से खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद वह बंगाल चले गए। कोलकाता पहुंचकर उन्होंने सेकंड डिविजन क्रिकेट खेलना शुरू किया। इसके बाद रवि हावड़ा यूनियन र बेलीगुंगे यूनाइटेड क्लब से भी खेले। इन टीमें के लिए अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उनका चयन बंगाल अंडर-19 क्रिकेट के लिए हुआ। पिछले साल दिसंबर में विश्व कप के लिए भारतीय अंडर-19 टीम को मजबूत बनाने के लिए एक टूर्नामेंट खेला गया था।
रवि कुमार को तैयारियों में शामिल नहीं किया गया था
इसमें भारतीय अंडर-19 टीम ए, भारतीय अंडर-19 टीम बी और बांग्लादेश की अंडर-19 टीम शामिल हुई थीं। इस टूर्नामेंट का मकसद विश्व कप के लिए खिलाड़ियों को तैयार करना था। इस टूर्नामेंट में रवि कुमार को शामिल नहीं किया गया था। पिछले एक साल में रवि ने अपनी फिटनेस पर काफी काम किया था। इसी वजह से उनका चयन भारतीय अंडर-19 टीम में हो पाया और अब उन्होंने अपने प्रदर्शन से टीम को जीत दिलाई।
रवि से लगातार वीडियो कॉल पर बातचीत होती है
रजिंदर ने कहा कि रवि हमेशा से अपने काम के प्रति समर्पित रहे हैं। हम लगातार वीडियो कॉल पर बातचीत करते रहते हैं। मैं उससे हमेशा कहता हूं कि देश से बढ़कर कुछ नहीं है। हम 'भारत माता' के लिए सबकुछ न्योछावर कर दंगे। मैं रवि से कहता हूं कि मैं युद्ध में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं और तुम्हारा काम देश के लिए अपनी गेंदबाजी से मैच जीतना है।
विज्ञापन
रवि कुमार भारत के लिए स्टार बनकर उभरे
रवि कुमार का स्टार बनकर सामने आने में न सिर्फ उनकी मेहनत का कमाल है, बल्कि उनके पिता की भी मेहनत है। रवि के पिता रजिंदर सिंह सीआरपीएफ में जवान हैं और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर की पद पर हैं। वह फिलहाल ओडिशा के माओवादी प्रभावित रायगढ़ जिले में तैनात हैं। रजिंदर ने अब तक अपनी पूरी जिंदगी देश की सेवा में लगा दी। अब उनका 18 साल का बेटा भी क्रिकेट में देश की सेवा कर रहा है। रवि की घातक गेंदबाजी की बदौलत ही भारत ने पांचवीं बार अंडर-19 विश्व कप का खिताब जीता।
विज्ञापन
2006 में ग्रेनेड हमले में घायल हुए थे रवि के पिता
रजिंदर ने कहा- हम गोली चला के देश की सेवा करते हैं और बेटा मैच में गेंद डाल के। वह बताते हैं कि 2006 में जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में एक ग्रेनेड हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए थे। तब रवि दो साल के थे। इस हमले में एक सैनिक की मौत हुई थी, वहीं 11 जवान घायल हो गए थे। हालांकि, उन्होंने कभी इसका जिक्र अपने परिवार से नहीं किया। रजिंदर ने लगभग सारा जीवन श्रीनगर में आतंकियों से प्रभावित इलाकों में बिताया है, लेकिन उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि उनकी पत्नी और तीन बच्चे चैन से रहें और सोएं।
विज्ञापन
परिवार को तकलीफ नहीं देना चाहते हैं रजिंदर
रजिंदर ने बताया कि मैंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि मेरा परिवार खुश रहे, बिना उस दर्द को जाने जो मैंने सहा है। यहां तक कि जब मेरे दोनों पैरों और हाथों में चोट लगी थी, तब भी मैंने उन्हें नहीं बताया था। उन्हें केवल टीवी से पता चला था कि कोई ग्रेनेड हमला हुआ था। अब रवि के विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद रजिंदर के कैंप में वह सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले जवान हैं। इसकी शुरुआत बांग्लादेश के खिलाफ मैच से हुई थी। उस मैच में रवि प्लेयर ऑफ द मैच बने थे।
रवि ने नॉकआउट मैचों में शानदार प्रदर्शन किया
रवि ने उस मैच में 14 रन देकर तीन विकेट झटके थे। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 37 रन देकर दो विकेट झटके। फिर फाइनल में इंग्लैंड के शानदार प्रदर्शन ने रवि को स्टार बना दिया। रजिंदर बोले- आमतौर पर परिवार वाले अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए परेशान रहते हैं, लेकिन मेरा बेटा देश को गर्व महसूस करा रहा है। रजिंदर हमेशा से अपने घर से दूर रहे हैं और उन्हें रवि के साथ ज्यादा समय बिताने को नहीं मिला।
13-14 साल पहले रवि ने क्रिकेट खेलना शुरू किया
रजिंदर बताता हैं कि बाद में मुझे पता चला कि अरविंद भारद्वाज जी ने रवि को क्रिकेट में डाल दिया है। इस तरह 13-14 साल पहले रवि के क्रिकेट करियर की शुरुआत हुई। मुझे तब इस बात की चिंता था कि मेरे पास पैसा नहीं था और मैं रवि के क्रिकेटिंग करियर को आगे कैसे बढ़ाऊंगा, लेकिन उसने अपनी मेहनत से नाम कमाया। यह दिखाता है कि उनमें लड़ने का जुनून है। उम्मीद करता हूं कि वह सीनियर लेवल तक जा पाएंगे।
रवि के लिए आसान नहीं रहा है क्रिकेट में सफर
रवि के लिए भी यह सफर आसान नहीं रहा है। उन्होंने यूपी से खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद वह बंगाल चले गए। कोलकाता पहुंचकर उन्होंने सेकंड डिविजन क्रिकेट खेलना शुरू किया। इसके बाद रवि हावड़ा यूनियन र बेलीगुंगे यूनाइटेड क्लब से भी खेले। इन टीमें के लिए अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उनका चयन बंगाल अंडर-19 क्रिकेट के लिए हुआ। पिछले साल दिसंबर में विश्व कप के लिए भारतीय अंडर-19 टीम को मजबूत बनाने के लिए एक टूर्नामेंट खेला गया था।
रवि कुमार को तैयारियों में शामिल नहीं किया गया था
इसमें भारतीय अंडर-19 टीम ए, भारतीय अंडर-19 टीम बी और बांग्लादेश की अंडर-19 टीम शामिल हुई थीं। इस टूर्नामेंट का मकसद विश्व कप के लिए खिलाड़ियों को तैयार करना था। इस टूर्नामेंट में रवि कुमार को शामिल नहीं किया गया था। पिछले एक साल में रवि ने अपनी फिटनेस पर काफी काम किया था। इसी वजह से उनका चयन भारतीय अंडर-19 टीम में हो पाया और अब उन्होंने अपने प्रदर्शन से टीम को जीत दिलाई।
रवि से लगातार वीडियो कॉल पर बातचीत होती है
रजिंदर ने कहा कि रवि हमेशा से अपने काम के प्रति समर्पित रहे हैं। हम लगातार वीडियो कॉल पर बातचीत करते रहते हैं। मैं उससे हमेशा कहता हूं कि देश से बढ़कर कुछ नहीं है। हम 'भारत माता' के लिए सबकुछ न्योछावर कर दंगे। मैं रवि से कहता हूं कि मैं युद्ध में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं और तुम्हारा काम देश के लिए अपनी गेंदबाजी से मैच जीतना है।