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रजत पाटीदार की कहानी: गेंदबाज बनना चाहते थे, पर इस वजह से बदला इरादा; जिससे मिला 'धोखा', उसे ही बनाया चैंपियन
Wed, 04 Jun 2025 02:36 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 04 Jun 2025 02:36 PM IST
सार
रजत की कहानी दृढ़ संकल्प और विपरीत परिस्थितियों में भी सपनों को पूरा करने की अडिग कोशिश की कहानी है। उनकी यात्रा इस विश्वास का प्रमाण है कि जुनून और कड़ी मेहनत से सबसे कठिन चुनौतियों को पार किया जा सकता है।
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आरसीबी ने ट्रॉफी जीती
- फोटो : ANI
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विस्तार
रजत पाटीदार...एक ऐसा नाम है जिसे वर्षों तक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के फैंस याद रखेंगे। बतौर कप्तान आईपीएल में अपने डेब्यू सीजन में ही उन्होंने आरसीबी को पहली बार चैंपियन बना दिया। एक ऐसा खिताब, जिसका इंतजार आरसीबी की टीम और फैंस 18 सत्रों से कर रहे थे। रजत ने पूरे सीजन में शानदार कप्तान की और कई रणनीतिक रूप से सही फैसले लिए। इसके अलावा उन्होंने बल्लेबाजी में भी दम दिखाया और जरूरत पड़ने पर आरसीबी को मुश्किल परिस्थिति से निकाला। हालांकि, उनका यह सफर इतना आसान नहीं रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर का यह खिलाड़ी पहले गेंदबाज बनना चाहता था, लेकिन फिर बल्ले से चमकने के बाद रजत ने इरादा बदल दिया। इतना ही नहीं, हाल फिलहाल में रजत ने आरसीबी से मिले 'धोखे' के बारे में भी बात की थी, लेकिन अब उन्होंने उसी टीम को चैंपियन बना दिया है। आइए रजत की कहानी जानते हैं...
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भारत के लिए टेस्ट खेल चुके हैं रजत
रजत भारत के लिए टेस्ट में डेब्यू कर चुके हैं। उन्हें 2024 में पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान ने टेस्ट कैप प्रदान की थी। बहुत कम लोगों को पता है कि रजत बचपन में बॉलर बनना चाहते थे। वे एक सफल बिजनेस फैमिली से हैं और इसके बावजूद उन्होंने क्रिकेट को करियर चुना। आईपीएल में अपने बल्ले से धूम मचाने वाले रजत ने रणजी क्रिकेट समेत घरेलू टूर्नामेंट्स में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
रजत भारत के लिए टेस्ट में डेब्यू कर चुके हैं। उन्हें 2024 में पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान ने टेस्ट कैप प्रदान की थी। बहुत कम लोगों को पता है कि रजत बचपन में बॉलर बनना चाहते थे। वे एक सफल बिजनेस फैमिली से हैं और इसके बावजूद उन्होंने क्रिकेट को करियर चुना। आईपीएल में अपने बल्ले से धूम मचाने वाले रजत ने रणजी क्रिकेट समेत घरेलू टूर्नामेंट्स में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
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रजत पाटीदार
- फोटो : PTI
बचपन में पहचान लिया था अपना शौक
रजत बताते हैं, 'मैंने बचपन से ही क्रिकेट की शुरुआत की थी। नौ साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। घरवालों ने मुझे पूरा सपोर्ट किया। जब उन्होंने जान लिया कि क्रिकेट ही मेरा जुनून है तो सबने मेरा साथ दिया। उन्होंने कभी भी मुझे पढ़ाई, नौकरी या बिजनेस के लिए दबाव नहीं डाला। इसके बाद से ही मेरे लिए क्रिकेट ही सब कुछ बन गया। 19 साल की उम्र तक मैंने यह पूरी तरह से तय कर लिया कि अब मैं इसी में करियर बनाऊंगा।'
रजत बताते हैं, 'मैंने बचपन से ही क्रिकेट की शुरुआत की थी। नौ साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। घरवालों ने मुझे पूरा सपोर्ट किया। जब उन्होंने जान लिया कि क्रिकेट ही मेरा जुनून है तो सबने मेरा साथ दिया। उन्होंने कभी भी मुझे पढ़ाई, नौकरी या बिजनेस के लिए दबाव नहीं डाला। इसके बाद से ही मेरे लिए क्रिकेट ही सब कुछ बन गया। 19 साल की उम्र तक मैंने यह पूरी तरह से तय कर लिया कि अब मैं इसी में करियर बनाऊंगा।'
रजत के दृढ़ संकल्प की कहानी
रजत की कहानी दृढ़ संकल्प और विपरीत परिस्थितियों में भी सपनों को पूरा करने की अडिग कोशिश की कहानी है। उनकी यात्रा इस विश्वास का प्रमाण है कि जुनून और कड़ी मेहनत से सबसे कठिन चुनौतियों को पार किया जा सकता है। स्कूल जाने से पहले मंद रोशनी में अभ्यास करना और सूरज के डूबने तक अपनी स्किल को निखारने के लिए मेहनत करना। रजत को अपने गृहनगर में संसाधनों और उचित कोचिंग सुविधाओं की कमी का भी सामना करना पड़ा। फिर भी उनके परिवार खासकर पिता से उन्हें अटूट समर्थन मिला, जो उनकी रीढ़ बन गए।
रजत की कहानी दृढ़ संकल्प और विपरीत परिस्थितियों में भी सपनों को पूरा करने की अडिग कोशिश की कहानी है। उनकी यात्रा इस विश्वास का प्रमाण है कि जुनून और कड़ी मेहनत से सबसे कठिन चुनौतियों को पार किया जा सकता है। स्कूल जाने से पहले मंद रोशनी में अभ्यास करना और सूरज के डूबने तक अपनी स्किल को निखारने के लिए मेहनत करना। रजत को अपने गृहनगर में संसाधनों और उचित कोचिंग सुविधाओं की कमी का भी सामना करना पड़ा। फिर भी उनके परिवार खासकर पिता से उन्हें अटूट समर्थन मिला, जो उनकी रीढ़ बन गए।
रजत पाटीदार
- फोटो : ANI
रजत के पिता ने खूब साथ दिया
रजत के पिता यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करते थे कि वह टूर्नामेंट के लिए शहर जा सकें। निराशा के ऐसे अनगिनत क्षण आए जब उनके सपने अधूरे लगने लगे। एक मार्मिक घटना तब हुई जब रजत को एक प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में चयन के लिए नजरअंदाज कर दिया गया। यह न केवल उनके लिए बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए एक झटका था। उस रात खाने की मेज पर सन्नाटा पसरा रहा। फिर भी रजत ने हार नहीं मानी। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ था, इसने रजत के करियर में फ्यूल का काम किया। उन्होंने और कठिन परिश्रम करना शुरू किया। एक दिन ऐसा भी आया जब उन्हें राज्य के लिए खेलने के लिए चुना गया। यह दिन उनकी जिंदगी का सबसे गौरवपूर्ण क्षण था। इसके बाद रजत को आईपीएल में भी चुना गया। वह अपने गृहनगर के युवाओं के लिए आशा की किरण बन गए। जब भी वह अपने शहर जाते हैं, युवाओं को अक्सर मुफ्त कोचिंग भी देते हैं।
रजत के पिता यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करते थे कि वह टूर्नामेंट के लिए शहर जा सकें। निराशा के ऐसे अनगिनत क्षण आए जब उनके सपने अधूरे लगने लगे। एक मार्मिक घटना तब हुई जब रजत को एक प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में चयन के लिए नजरअंदाज कर दिया गया। यह न केवल उनके लिए बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए एक झटका था। उस रात खाने की मेज पर सन्नाटा पसरा रहा। फिर भी रजत ने हार नहीं मानी। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ था, इसने रजत के करियर में फ्यूल का काम किया। उन्होंने और कठिन परिश्रम करना शुरू किया। एक दिन ऐसा भी आया जब उन्हें राज्य के लिए खेलने के लिए चुना गया। यह दिन उनकी जिंदगी का सबसे गौरवपूर्ण क्षण था। इसके बाद रजत को आईपीएल में भी चुना गया। वह अपने गृहनगर के युवाओं के लिए आशा की किरण बन गए। जब भी वह अपने शहर जाते हैं, युवाओं को अक्सर मुफ्त कोचिंग भी देते हैं।
'रजत ने सपनों को बनाए रखा'
रजत ने क्या कुछ नहीं झेला। उनकी कहानी हर उस व्यक्ति से जुड़ती है जिसने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है, फिर भी अपने सपनों को बनाए रखने की हिम्मत दिखाई। उनका कहना है कि सफलता का मार्ग चुनौतियों से भरा जरूर है, लेकिन यह यात्रा ही है जो हमें आकार देती है, हमें कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है। रजत को आरसीबी से भी निराशा मिली थी। उन्होंने हाल ही में इसकी कहानी भी सुनाई थी। पाटीदार ने 'आरसीबी पॉडकास्ट' पर कहा, 'मुझे आईपीएल 2022 के लिए मेगा नीलामी से पहले एक संदेश मिला था कि आप तैयार रहें, हम आपको चुनेंगे। मुझे थोड़ी उम्मीद थी कि मुझे एक और मौका मिलेगा, लेकिन मुझे मेगा नीलामी में नजरअंदाज किया गया। मैं इससे थोड़ा दुखी था।'
रजत ने क्या कुछ नहीं झेला। उनकी कहानी हर उस व्यक्ति से जुड़ती है जिसने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है, फिर भी अपने सपनों को बनाए रखने की हिम्मत दिखाई। उनका कहना है कि सफलता का मार्ग चुनौतियों से भरा जरूर है, लेकिन यह यात्रा ही है जो हमें आकार देती है, हमें कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है। रजत को आरसीबी से भी निराशा मिली थी। उन्होंने हाल ही में इसकी कहानी भी सुनाई थी। पाटीदार ने 'आरसीबी पॉडकास्ट' पर कहा, 'मुझे आईपीएल 2022 के लिए मेगा नीलामी से पहले एक संदेश मिला था कि आप तैयार रहें, हम आपको चुनेंगे। मुझे थोड़ी उम्मीद थी कि मुझे एक और मौका मिलेगा, लेकिन मुझे मेगा नीलामी में नजरअंदाज किया गया। मैं इससे थोड़ा दुखी था।'
रजत पाटीदार।
- फोटो : अमर उजाला
आईपीएल 2022 ऑक्शन में मिला 'धोखा'
हालांकि, मध्यप्रदेश के इस 31 साल के बल्लेबाज को हालांकि अपने राज्य के ही एक खिलाड़ी के चोटिल होने के बाद आरसीबी में वापसी करने का मौका मिल गया। पाटीदार हालांकि बेंगलुरु वापस आने के लिए उत्सुक नहीं थे, क्योंकि उन्हें पता था कि बड़े खिलाड़ियों से भरी टीम में खेलने का मौका शायद ही मिले। उन्होंने कहा, 'मैंने नीलामी में नहीं चुने जाने के बाद इंदौर में अपने स्थानीय मैचों में खेलना शुरू कर दिया था। मुझे फिर फोन आया कि हम आपको लवनीथ सिसोदिया की जगह चुन रहे हैं।' सिसोदिया चोटिल होने के कारण उस सत्र में टीम से बाहर हो गए थे।
हालांकि, मध्यप्रदेश के इस 31 साल के बल्लेबाज को हालांकि अपने राज्य के ही एक खिलाड़ी के चोटिल होने के बाद आरसीबी में वापसी करने का मौका मिल गया। पाटीदार हालांकि बेंगलुरु वापस आने के लिए उत्सुक नहीं थे, क्योंकि उन्हें पता था कि बड़े खिलाड़ियों से भरी टीम में खेलने का मौका शायद ही मिले। उन्होंने कहा, 'मैंने नीलामी में नहीं चुने जाने के बाद इंदौर में अपने स्थानीय मैचों में खेलना शुरू कर दिया था। मुझे फिर फोन आया कि हम आपको लवनीथ सिसोदिया की जगह चुन रहे हैं।' सिसोदिया चोटिल होने के कारण उस सत्र में टीम से बाहर हो गए थे।
'किसी खिलाड़ी के विकल्प के रूप में नहीं आना चाहता था'
पाटीदार ने कहा, 'मैं सच कहूं तो किसी खिलाड़ी के विकल्प के रूप में नहीं आना चाहता था क्योंकि मुझे लग रहा था कि मुझे वहां खेलने का मौका नहीं मिलेगा। मुझे हमेशा लगता है कि मैं वहां(डगआउट में) नहीं बैठना चाहता।' कप्तान के तौर पर मध्यप्रदेश को 2024-25 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचने में अहम भूमिका निभाने वाले पाटीदार ने कहा, 'मैं थोड़े समय के लिए नाराज था लेकिन फिर सामान्य हो गया था।'
पाटीदार ने कहा, 'मैं सच कहूं तो किसी खिलाड़ी के विकल्प के रूप में नहीं आना चाहता था क्योंकि मुझे लग रहा था कि मुझे वहां खेलने का मौका नहीं मिलेगा। मुझे हमेशा लगता है कि मैं वहां(डगआउट में) नहीं बैठना चाहता।' कप्तान के तौर पर मध्यप्रदेश को 2024-25 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचने में अहम भूमिका निभाने वाले पाटीदार ने कहा, 'मैं थोड़े समय के लिए नाराज था लेकिन फिर सामान्य हो गया था।'
रजत पाटीदार
- फोटो : अमर उजाला
रजत ने टाल दी थी शादी
जब रजत आईपीएल में नीलाम नहीं हुए तो उन्होंने नौ मई 2022 को अपनी शादी की तारीख तय कर ली थी। उनके पिता मनोहर पाटीदार ने बताया था कि हमने एक छोटा सा कार्यक्रम तय कर लिया था और उसके लिए इंदौर में एक होटल भी बुक कर लिया था, लेकिन रजत की किस्मत कुछ और ही कह रही थी। लवनीथ के चोटिल होने पर आरसीबी ने उन्हें शामिल किया। टीम में आश्चर्यजनक रूप से शामिल किए जाने के बाद रजत ने अपनी शादी की तारीख आगे बढ़ा दी। फिर बाद में उन्होंने रतलाम की ऐश्वर्या से शादी की।
जब रजत आईपीएल में नीलाम नहीं हुए तो उन्होंने नौ मई 2022 को अपनी शादी की तारीख तय कर ली थी। उनके पिता मनोहर पाटीदार ने बताया था कि हमने एक छोटा सा कार्यक्रम तय कर लिया था और उसके लिए इंदौर में एक होटल भी बुक कर लिया था, लेकिन रजत की किस्मत कुछ और ही कह रही थी। लवनीथ के चोटिल होने पर आरसीबी ने उन्हें शामिल किया। टीम में आश्चर्यजनक रूप से शामिल किए जाने के बाद रजत ने अपनी शादी की तारीख आगे बढ़ा दी। फिर बाद में उन्होंने रतलाम की ऐश्वर्या से शादी की।
'कोहली ने मेरा हौसला बढ़ाया'
पाटीदार ने कहा कि कोहली जैसे महान खिलाड़ी से कप्तान की जिम्मेदारी मिलने के बाद वह दबाव महसूस कर रहे थे, लेकिन इस स्टार बल्लेबाज की हौसला बढ़ाने वाले शब्दों ने उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया। उन्होंने कहा, 'मेरे मन में कई सवाल थे, जैसे की टीम में कई बड़े खिलाड़ी है। कोहली का रूतबा बहुत बड़ा है, मैं उन्हें कुछ करने के लिए कैसे कह सकता हूं? मुझे हालांकि इस मामले में उनका पूरा समर्थन मिला था।'
पाटीदार ने कहा कि कोहली जैसे महान खिलाड़ी से कप्तान की जिम्मेदारी मिलने के बाद वह दबाव महसूस कर रहे थे, लेकिन इस स्टार बल्लेबाज की हौसला बढ़ाने वाले शब्दों ने उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया। उन्होंने कहा, 'मेरे मन में कई सवाल थे, जैसे की टीम में कई बड़े खिलाड़ी है। कोहली का रूतबा बहुत बड़ा है, मैं उन्हें कुछ करने के लिए कैसे कह सकता हूं? मुझे हालांकि इस मामले में उनका पूरा समर्थन मिला था।'
रजत पाटीदार
- फोटो : IPL/BCCI
इंदौर के चमकते सितारों में शामिल हैं रजत
रजत ने इंदौर का नाम दुनियाभर में रोशन कर दिया है। वे इंदौर के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है। नरेन्द्र हिरवानी, अमय खुरासिया और नमन ओझा के बाद रजत पाटीदार ने राष्ट्रीय टीम में स्थान बनाया है। वहीं छोटे फार्मेट में शहर के इन नामों के अलावा तेज गेंदबाज आवेश खान, वेंकटेश अय्यर जैसे नाम भी शामिल रहे हैं।
रजत ने इंदौर का नाम दुनियाभर में रोशन कर दिया है। वे इंदौर के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है। नरेन्द्र हिरवानी, अमय खुरासिया और नमन ओझा के बाद रजत पाटीदार ने राष्ट्रीय टीम में स्थान बनाया है। वहीं छोटे फार्मेट में शहर के इन नामों के अलावा तेज गेंदबाज आवेश खान, वेंकटेश अय्यर जैसे नाम भी शामिल रहे हैं।