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श्रीनिवासन करें फैसला, BCCI या CSK
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 10 Dec 2014 09:39 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को एक बार फिर सवालों के कटघरे में खड़ा किया। कोर्ट ने श्रीनिवासन से पूछा कि बीसीसीआई अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद वह बीसीसीआई की वर्किंग कमेटी की बैठक में तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के तौर पर कैसे शामिल हुए, जबकि उन्होंने कहा था कि जांच पूरी होने तक बीसीसीआई के कामकाज के दूर रहेंगे।
इस पर श्रीनिवासन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह गलती उनके मुवक्किल से हुई है।
न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि क्रिकेट की पवित्रता बनी रहनी चाहिए। पीठ ने श्रीनिवासन के भरोसे पर शक जताते हुए इशारा किया कि जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई जाएगी जो हितों का टकराव पर गौर करेगी और साथ ही यह निर्णय लेगी कि आईपीएल में हुई अनियमितताओं में शामिल लोगों को क्या सजा होनी चाहिए।
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इस पर श्रीनिवासन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह गलती उनके मुवक्किल से हुई है।
न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि क्रिकेट की पवित्रता बनी रहनी चाहिए। पीठ ने श्रीनिवासन के भरोसे पर शक जताते हुए इशारा किया कि जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई जाएगी जो हितों का टकराव पर गौर करेगी और साथ ही यह निर्णय लेगी कि आईपीएल में हुई अनियमितताओं में शामिल लोगों को क्या सजा होनी चाहिए।
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गुरुनाथ की सजा पर बीसीसीआई करे फैसला
देश की शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि एन श्रीनिवासन के दामाद और चेन्नई सुपर किंग्स टीम के अधिकारी गुरुनाथ मैयप्पन के खिलाफ जल्द कार्रवाई होनी चाहिए। इसकी सजा क्या होनी चाहिए यह बीसीसीआई तय करें।
अदालत ने कहा कि बीसीसीआई के कामकाज में दखल देने का उसका कोई इरादा नहीं है। हम चाहते है कि सिस्टम प्रभावी और बेहतर हो। पीठ ने कहा कि उच्च स्तरीय कमेटी श्रीनिवासन के हितों के टकराव की विभिन्न कोणों से जांच करेगी। अगर कमेटी यह कहती है कि श्रीनिवासन के मामले में हितों का टकराव था तो भविष्य में संबंधी नियमों में बदलाव हो सकता है। कमेटी यह बात पर भी गौर करेगी कि आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों को क्या सजा मिलनी चाहिए। इस ड्रामे में श्रीनिवासन की क्या भूमिका है। अगर श्रीनिवासन और मैयप्पन की संलिप्तता का पता चलता है तो उन्हें क्या सजा मिलेगी।
पीठ ने कहा कि बीसीसीआई कह रही है कि खेल में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है लेकिन पूरा देश ठगा हुआ महसूस कर रहा है। क्या इसका कोई समाधान है, नहीं तो देश का क्या होगा?
अदालत ने कहा कि बीसीसीआई के कामकाज में दखल देने का उसका कोई इरादा नहीं है। हम चाहते है कि सिस्टम प्रभावी और बेहतर हो। पीठ ने कहा कि उच्च स्तरीय कमेटी श्रीनिवासन के हितों के टकराव की विभिन्न कोणों से जांच करेगी। अगर कमेटी यह कहती है कि श्रीनिवासन के मामले में हितों का टकराव था तो भविष्य में संबंधी नियमों में बदलाव हो सकता है। कमेटी यह बात पर भी गौर करेगी कि आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों को क्या सजा मिलनी चाहिए। इस ड्रामे में श्रीनिवासन की क्या भूमिका है। अगर श्रीनिवासन और मैयप्पन की संलिप्तता का पता चलता है तो उन्हें क्या सजा मिलेगी।
पीठ ने कहा कि बीसीसीआई कह रही है कि खेल में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है लेकिन पूरा देश ठगा हुआ महसूस कर रहा है। क्या इसका कोई समाधान है, नहीं तो देश का क्या होगा?
दोनों में से एक चुनें श्रीनिवासन
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वासित अध्यक्ष एन श्रीनिवासन से कहा कि वह या तो बीसीसीआई प्रमुख रह सकते हैं या चेन्नई टीम के मालिक।
अदालत ने श्रीनिवासन को इनमें से कोई एक विकल्प चुनने के लिए कहा है। बीसीसीआई प्रमुख होना और टीम का मालिक होने में स्वाभाविक रूप से हितों का टकराव दिखता है।
पीठ ने कहा, "अगर आप बोर्ड प्रमुख रहेंगे तो टीम में आपकी हिस्सेदारी नहीं होगी और आप बीसीसीआई प्रमुख नहीं रहेंगे तो टीम में आपकी हिस्सेदारी बनी रहेगी।"
अदालत ने श्रीनिवासन को इनमें से कोई एक विकल्प चुनने के लिए कहा है। बीसीसीआई प्रमुख होना और टीम का मालिक होने में स्वाभाविक रूप से हितों का टकराव दिखता है।
पीठ ने कहा, "अगर आप बोर्ड प्रमुख रहेंगे तो टीम में आपकी हिस्सेदारी नहीं होगी और आप बीसीसीआई प्रमुख नहीं रहेंगे तो टीम में आपकी हिस्सेदारी बनी रहेगी।"