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मैदान पर दिखाई दिए एक अद्भुत तेंदुलकर
सुनील गावस्कर
Updated Fri, 15 Nov 2013 12:03 PM IST
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वानखेड़े स्टेडियम में सबसे पहला टेस्ट मैच भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया था। सीरीज दो टेस्ट मैच की थी, इसलिए वानखेड़े टेस्ट निर्णायक मैच था।
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वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लॉयड ने नाबाद 242 रन की पारी खेली और वेस्टइंडीज ने आखिरी दिन इस टेस्ट में जीत दर्ज की।
अपना 150वां टेस्ट मैच खेलने वाले शिवनारायण चंद्रपॉल को उनकी उपलब्धि के लिए विशेष स्मृति चिन्ह देने के लिए क्लाइव लॉयड इस मैच में भी वानखेड़े स्टेडियम में मौजूद थे।
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हालांकि वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान को अपनी टीम की बल्लेबाजी देखकर बिल्कुल भी खुशी नहीं हुई होगी। खासतौर से मौजूदा कप्तान डेरेन सैमी के गैरजिम्मेदाराना शॉट को देखकर। इस टीम को शायद ही अंदाजा है कि टेस्ट मैच की पारी कैसे खेली जाती है।
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टेस्ट क्रिकेट के लिए काफी सारी प्रतिबद्धता चाहिए होती है, लेकिन वेस्टइंडीज की पारी में काफी हद तक यह नहीं देखने को मिला।
गेंदबाजों ने भी दिखाया कमाल
प्रज्ञान ओझा को कोलकाता में मुश्किल से ही गेंदबाजी करने को मिली लेकिन यहां की पिच पर ईडन गार्डंस की तुलना में ज्यादा पेस और बाउंस है जहां उनकी फ्लैट गेंदों को खेलना नामुमकिन हो गया।
अश्विन ने भी शानदार गेंदबाजी की और अगर भाग्य ने उनका थोड़ा और साथ दिया होता तो उन्हें ज्यादा विकेट मिल सकते थे। उन्होंने बल्लेबाजों को कई बार बीट किया और उन्हें साधारण बना दिया। इसका फायदा शायद ओझा को मिला।
स्पिन गेंदबाज वैसे भी जोड़ियों में शिकार करते हैं और अश्विन व ओझा ने ऐसा ही किया और भारत को जीत की स्थिति में पहुंचा दिया।
सचिन ने दिए यादगार लम्हे
वेस्टइंडीज को मैच में वापसी करने के लिए शुरुआत में ही विकेट लेने थे, लेकिन सैमी ने गेंदबाजी की शुरुआत खुद की। यह एक अजीबोगरीब फैसला था क्योंकि नई गेंद के उपयोग के लिए टीम में दो अन्य खिलाड़ी भी हैं। शायद वेस्टइंडीज के लिए मैच का पहला दिन फैसले लेने के लिए सही दिन नहीं रहा।
हालांकि यह कहा जा सकता है कि तेंदुलकर के लिए उन्होंने जिस तरह की फील्डिंग लगाई वह बिल्कुल सटीक थी। ‘द मास्टर’ ने जब मैदान में कदम रखा, वेस्टइंडीज टीम ने उन्हें जिस तरह से गार्ड ऑफ ऑनर दिया, उसे मैदान में मौजूद कोई भी व्यक्ति शायद ही कभी भूल पाएगा।
कुछ ओवरों के बाद लोगों के लिए और भी खुश और यादगार लम्हे आने वाले थे। ‘द मास्टर’ ड्राइव लगा रहे थे, बैकफुट पर आकर शॉट खेल रहे थे और पंच लगा रहे थे। यह एक अद्भुत तेंदुलकर थे।