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आज भी हरा है 2003 World Cup का जख्म, जब 17 साल पहले भारत हारा था फाइनल

Mon, 23 Mar 2020 11:07 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: अंशुल तलमले Updated Mon, 23 Mar 2020 11:07 AM IST
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On This Day in 2003, India lost final of icc cricket world cup, Australia sealed second consecutive trophy
क्रिकेट विश्व कप 2003 - फोटो : अमर उजाला

सौरव गांगुली को दुनिया भले ही बतौर खब्बू बल्लेबाज, बेहतरीन कप्तान, कभी हार न मानने वाला योद्धा और कुशल प्रशासक जानती हो, लेकिन आज भी टीम इंडिया के इस 'महाराज' के मन में ICC वर्ल्ड कप हारने की कसक बाकी है। रह-रहकर वो उस खिताबी हार को याद भी करते हैं। अपनी आत्मकथा ए सेंचुरी इज नॉट इनफ ('A Century is Not Enough') में भी दादा ने 2003 विश्व कप के सुनहरे सफर और फिर फाइनल में लचर प्रदर्शन का जिक्र किया है।

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2003 विश्व कप की भारतीय टीम - फोटो : अमर उजाला

आज ही के दिन हारा था फाइनल

9 फरवरी से 23 मार्च के बीच खेले गए आठवें विश्व कप का आयोजन पहली बार अफ्रीकी धरती (दक्षिण अफ्रीका/केन्या/जिंबाब्वे) पर किया गया था। केन्या सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली गैर टेस्ट दर्जा प्राप्त टीम बनी थी। पहली बार इस वैश्विक टूर्नामेंट में रिकॉर्ड 14 टीमों ने भाग लिया था। 23 मार्च यानी आज ही के दिन ठीक 17 साल पहले उस विश्व कप का फाइनल खेला गया। वॉन्डर्स के मैदान पर समूचे हिंदुस्तान को वंडर की उम्मीद थी, लेकिन वो होते-होते रह गया। खिताब की दहलीज पर पहुंची भारतीय टीम को फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों 125 रन की शर्मनाक हार मिली। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने लगातार दूसरी और कुल तीसरी बार चैंपियन बनी।

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विश्व कप 2003 - फोटो : सोशल मीडिया

गांगुली की एक गलती और हाथ से फिसल गया विश्व कप

पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा था। खिताबी मुकाबले में जैसे ही सौरव गांगुली मैदान पर टॉस के लिए उतरे टीवी पर टकटकी लगाकर बैठे दर्शक भारत के टॉस जीतने की कामना करने लगे। भारतीयों की दुआओं ने काम किया और सिक्का टीम इंडिया के पक्ष में गिरा। दर्शक खुश थे। इसी बीच गांगुली ने पहले गेंदबाजी का फैसला लेकर सभी को चौंका दिया। असल में पहले गेंदबाजी का फैसला सौरव ने इसलिए किया था, क्योंकि मैच से पहले सुबह बरसात हुई थी। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि पिच की नमी गेंदबाजी में मददगार रहेगी। उनका यह दांव उल्टा पड़ गया। भारतीय गेंदबाज बेअसर साबित हुए। माना जाता है कि गांगुली का यह फैसला ही टीम की हार प्रमुख कारण बना।

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2003 विश्व कप विजेता ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम - फोटो : अमर उजाला

रिकी पोंटिंग के तूफान में उड़ा भारत

साल 2003 के विश्वकप फाइनल में भारतीय फैन्स के दिल उस वक्त टूट गए थे, जब टीम इंडिया 20 साल बाद विश्वकप खिताब से मात्र एक कदम दूर रह गई। किसी को भरोसा नहीं हो रहा था टीम को जीतना सिखाने वाले 'दादा' यानी सौरव गांगुली की टीम हार गई है। ऑस्ट्रेलिया ने टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करते हुए कप्तान रिकी पोंटिंग (140*) और डेमियन मार्टिन (88*) के दम पर दो विकेट पर 359 रन बनाए। जहीर खान, जवागल श्रीनाथ, आशीष नेहरा, हरभजन सिंह हर गेंदबाज की जमकर पिटाई हुई। जवाब में भारत 39.2 ओवर में 234 रन ही बना पाया। वीरेंद्र सहवाग ने सर्वाधक 82 और राहुल द्रविड़ ने 47 रन बनाए। ऑस्ट्रेलियाई टीम पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही। वहीं भारतीय टीम ने दो मैच गंवाए और दोनों ऑस्ट्रेलिया से।

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2003 विश्व कप के दौरान सचिन तेंदुलकर - फोटो : अमर उजाला

फाइनल में सचिन ने किया निराश

सचिन तेंदुलकर 2003 के विश्वकप के टूर्नामेंट के मैन ऑफ द टूर्नामेंट जरुर रहे थे। उन्होंने लगभग हर मैच में बल्ले के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। कई मौकों पर तो भारत को जीत भी दिलाई थी। टूर्नामेंट की 11 पारियों में 61.18 की औसत से 673 रन बनाकर सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज भी थे। जिसमें छह अर्धशतक और एक शतक भी शामिल था। बावजूद इसके ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में उन्होंने सभी को बहुत निराश किया। टीम इंडिया जब ऑस्ट्रेलिया के विशालकाय स्कोर का पीछा करने उतरी तो सभी की नजरें इस लिटिल मास्टर पर टिकी हुई थी। वह 4 के स्कोर पर थे, तभी ग्लेन मैक्ग्रा ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। सचिन के आउट होते ही पूरी टीम लखड़खड़ा गई। सहवाग को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज पिच पर नहीं टिक सका। एक-एक करके सभी बल्लेबाज वापस लौटते रहे। आखिर में भारतीय टीम 39.2 ओवर में सिर्फ 234 रनों तक ही पहुंच सकी। भारत को इस फाइनल मुकाबले में 125 रन की करारी हार का सामना करना पड़ा।

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