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रैंकिंग सुधारने के लिए सौरभ को चाहिए आर्थिक मदद
Mon, 18 Feb 2019 09:16 PM IST
अंशुल तलमले
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: अंशुल तलमले
Updated Mon, 18 Feb 2019 09:16 PM IST
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मौजूदा राष्ट्रीय चैंपियन सौरभ वर्मा को आर्थिक मदद की दरकार है। गुवाहाटी में शनिवार को तीसरी बार राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाले सौरभ ने कहा कि अपनी रैंकिंग सुधारने के लिए उन्हें और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भाग लेना होगा। 26 वर्षीय सौरभ ने वर्ष 2011 में पहली बार राष्ट्रीय खिताब जीता था। बार-बार चोट के चलते वह लगातार नहीं खेल सके। इससे उनकी रैंकिंग में काफी गिरावट आई है। वह 2012 में कॅरिअर की सर्वश्रेष्ठ 30वीं रैंकिंग पर थे, लेकिन अब 55वें नंबर पर खिसक गए हैं।
25 खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता दे सकता है बाई : उन्होंने कहा कि कि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए मुझे कोई आर्थिक मदद नहीं मिल रही। अब नए नियमों के अनुसार भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) सिर्फ शीर्ष 25 खिलाड़ियों को ही आर्थिक सहायता मुहैया करवा सकता है। इसके चलते मैं सीमित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट ही खेल पा रहा हूं। इससे मेरी रैंकिंग गिर रही है। बाई ने मुझे डच ओपन के लिए प्रायोजित किया था लेकिन मुझे और ज्यादा मदद की जरूरत है। रैंकिंग सुधारने के लिए मुझे कम से कम 10-12 टूर्नामेंटों में भाग लेना होगा। पिछले साल मेरे घुटने में दिक्कत थी। मैंने अपने स्तर पर इसका इलाज करवाया। मैं अपने खर्च पर टूर्नामेंट खेल रहा हूं। एक खिलाड़ी के लिए यह काफी मुश्किल होता है जब उसे खुद ही सब कुछ करना पड़े।
नहीं है ज्यादा टूर्नामेंट खेलने का विकल्प : सौरभ ने कहा कि उन्हें अगले दो टूर्नामेंट के लिए यात्रा की सभी व्यवस्थाओं का खुद ही भुगतान करना पड़ा। इन टूर्नामेंटों में स्विस ओपन और ऑरलियंस ओपन शामिल हैं। मैं बार्सिलोना मास्टर्स के बाद स्विस ओपन और ऑरलियंस ओपन खेलूंगा। मैंने अपने वीजा के लिए भुगतान किया है और खुद ही सारे खर्च (होटल और यात्रा) का वहन कर रहा हूं। इसलिए मेरे पास बड़े टूर्नामेंट खेलने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं। पिछले साल कंधे की चोट से उबर कर सौरभ ने रूस ओपन और डच ओपन के रूप में दो सुपर 100 टूर्नामेंट जीते। राष्ट्रीय चैंपियनशिप के उपविजेता लक्ष्य सेन भी बार्सिलोना में खेले जाने वाले स्पेन मास्टर्स में चुनौती पेश करेंगे। उत्तराखंड के 17 वर्षीय इस खिलाड़ी को मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर खेलने होंगे। पी कश्यप और अजय जयराम के अलावा शुभंकर डे भी चुनौती पेश करेंगे।
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25 खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता दे सकता है बाई : उन्होंने कहा कि कि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए मुझे कोई आर्थिक मदद नहीं मिल रही। अब नए नियमों के अनुसार भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) सिर्फ शीर्ष 25 खिलाड़ियों को ही आर्थिक सहायता मुहैया करवा सकता है। इसके चलते मैं सीमित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट ही खेल पा रहा हूं। इससे मेरी रैंकिंग गिर रही है। बाई ने मुझे डच ओपन के लिए प्रायोजित किया था लेकिन मुझे और ज्यादा मदद की जरूरत है। रैंकिंग सुधारने के लिए मुझे कम से कम 10-12 टूर्नामेंटों में भाग लेना होगा। पिछले साल मेरे घुटने में दिक्कत थी। मैंने अपने स्तर पर इसका इलाज करवाया। मैं अपने खर्च पर टूर्नामेंट खेल रहा हूं। एक खिलाड़ी के लिए यह काफी मुश्किल होता है जब उसे खुद ही सब कुछ करना पड़े।
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नहीं है ज्यादा टूर्नामेंट खेलने का विकल्प : सौरभ ने कहा कि उन्हें अगले दो टूर्नामेंट के लिए यात्रा की सभी व्यवस्थाओं का खुद ही भुगतान करना पड़ा। इन टूर्नामेंटों में स्विस ओपन और ऑरलियंस ओपन शामिल हैं। मैं बार्सिलोना मास्टर्स के बाद स्विस ओपन और ऑरलियंस ओपन खेलूंगा। मैंने अपने वीजा के लिए भुगतान किया है और खुद ही सारे खर्च (होटल और यात्रा) का वहन कर रहा हूं। इसलिए मेरे पास बड़े टूर्नामेंट खेलने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं। पिछले साल कंधे की चोट से उबर कर सौरभ ने रूस ओपन और डच ओपन के रूप में दो सुपर 100 टूर्नामेंट जीते। राष्ट्रीय चैंपियनशिप के उपविजेता लक्ष्य सेन भी बार्सिलोना में खेले जाने वाले स्पेन मास्टर्स में चुनौती पेश करेंगे। उत्तराखंड के 17 वर्षीय इस खिलाड़ी को मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर खेलने होंगे। पी कश्यप और अजय जयराम के अलावा शुभंकर डे भी चुनौती पेश करेंगे।
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