युवी को वर्ल्ड कप से बाहर करने पर धोनी ने तोड़ी चुप्पी
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भले ही टीम इंडिया लगातार 6 मैच जीतकर वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बेहद शान से पहुंच गई हो लेकिन टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले भारत के लिए परिस्थितियां बहुत अनुकूल नहीं थी। भारत का विदेशी धरती पर लगातार खराब रिकॉर्ड ने खिलाड़ियों के मनोबल को प्रभावित किया था।
साथ ही टीम चयन के दौरान चयनकर्ताओं और कप्तान धोनी की जमकर आलोचना भी हुई। उनकी सबसे ज्यादा आलोचना इस बात के लिए हुई कि उन्होंने जानबूझकर पिछले वर्ल्ड कप के हीरो रहे युवराज सिंह को टीम में शामिल नहीं किया। युवराज एक धाकड़ आलराउंडर हैं और कई मैचों में टीम को बड़ी जीत दिला भी चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे तेज पिचों पर होने वाले वर्ल्ड कप के लिए 2011 में खिताब जीतने वाली टीम से सिर्फ 4 खिलाड़ियों को ही इस बार टीम इंडिया में जगह दी गई थी। युवराज को टीम में नहीं रखने के पीछे धोनी का अडियल रुख उस समय खूब चर्चा में रहा।
युवराज के पिता योगराज समेत ढेरों आलोचकों ने धोनी की इस बात पर जमकर आलोचना की, लेकिन दो-ढाई महीने की लंबी चुप्पी के बाद भारतीय कप्तान ने अब युवराज को टीम से बाहर किए जाने को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है।
युवराज को लेकर धोनी ने बताई अपनी मजबूरियां
टीम इंडिया को 28 साल बाद 2011 में वर्ल्ड कप जीताने में अहम भूमिका निभाने वाले युवराज सिंह को इस बार वर्ल्ड कप में शामिल ही नहीं किया गया। युवराज ने पिछले टूर्नामेंट में 15 विकेट झटके थे जिसकी बदौलत धोनी खिताब उठाने में कामयाब रहे थे लेकिन इस बार उन्होंने युवी पर भरोसा नहीं दिखाया। अपने इस साहसिक फैसले पर धोनी ने लंबी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वह नए नियमों के अनुसार इस बार उतने प्रभावकारी नहीं होते जितना की पिछली बार हुए थे।
धोनी ने ध्यान दिलाया कि आज के क्रिकेट में क्षेत्ररक्षण (30 यार्ड दायरे के बाहर सिर्फ 4 खिलाड़ी ही रह सकते हैं) में काफी बदलाव आ गया है और यही अहम कारण है कि उन्हें इस बार वर्ल्ड कप टीम में शामिल नहीं किया गया। युवराज बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के साथ-साथ फिरकी गेंदबाज भी हैं।
उन्होंने कहा, "अगर आप देखें तो पाएंगे कि नियम में काफी बदलाव आ गए हैं, युवी के पास ज्यादा गेंदबाजी करने का मौका नहीं होता। नियम में बदलाव (क्षेत्ररक्षण) से उनकी वापसी हो सकती है। यहां उनकी गेंदबाजी प्रभावित होती, हालांकि वह टी-20 में लगातार गेंदबाजी कर रहे हैं।" धोनी ने यह बयान तब दिया जब उन्होंने सुरेश रैना को '2011 का युवराज सिंह' करार दिया।
धोनी चार क्षेत्ररक्षकों के साथ मैदान पर खेलने के कभी पक्षधर नहीं रहे हैं। उनका मानना है युवराज के अलावा और भी कई पार्टटाइम गेंदबाज जैसे सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग की भी गेंदबाजी नए नियमों से प्रभावित होती। उन्होंने कहा, "अगर पहले की बात होती तो वीरू पाजी, सचिन पाजी और युवी को काफी गेंदबाजी करने का मौका मिलता और हम उन पर काफी निर्भर भी रहते थे। लेकिन अब बेहतरीन बल्लेबाजी ट्रैक होने के नाते पार्ट टाइम गेंदबाजों का समय खत्म हो गया है, उन्हें यहां पर गेंदबाजी करने में काफी दिककत भी होती।"