इस शख्स ने बचाई थी धोनी की कप्तानी, 2011 विश्व कप के बाद विरोध में थे चयनकर्ता
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28 साल का सूखा खत्म कर भले ही महेंद्र सिंह धोनी ने 2011 में भारत को विश्व कप दिलाया हो, लेकिन चयनकर्ता 'क्रिकेट के महाकुंभ' के बाद उनसे यह जिम्मेदारी छिनना चाहते थे। यह खुलासा माही के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन ने किया है।
तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष और इंडिया सीमेंट्स के मालिक श्रीनिवासन की माने तो वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद 2011-12 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम टेस्ट सीरीज 0-4 से गंवा आई थी, जिसके फौरन बाद चयन समिती ने अगली वन-डे सीरीज के लिए धोनी को कप्तानी से हटाने का फैसला कर लिया था। तब बतौर बोर्ड अध्यक्ष अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर माही की कप्तानी बचाने वाले श्रीनिवासन ही थे।
तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष और इंडिया सीमेंट्स के मालिक श्रीनिवासन की माने तो वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद 2011-12 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम टेस्ट सीरीज 0-4 से गंवा आई थी, जिसके फौरन बाद चयन समिती ने अगली वन-डे सीरीज के लिए धोनी को कप्तानी से हटाने का फैसला कर लिया था। तब बतौर बोर्ड अध्यक्ष अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर माही की कप्तानी बचाने वाले श्रीनिवासन ही थे।
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो चयन समिति के इस फैसले को रोकने के लिए गोल्फ कोर्स से सीधे बैठक में पहुंचे श्रीनिवासन को इस बात की जानकारी बोर्ड के सचिव संजय जगदाले ने दी। बीसीसीआई के पुराने संविधान के मुताबिक, चयन समिति को टीम चुनने के लिए बोर्ड अध्यक्ष की मंजूरी लेनी होती थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्द द्वारा गठित लोढ़ी कमेटी की सिफारिशें अमल में आने के बाद से टीम चयन के अंतिम फैसले का अधिकार मुख्य सिलेक्टर को मिल गया।