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मिताली राज को ड्रेसिंग रूम में नजरबंद रखना चाहते थे रमेश पोवार, शिकायती पत्र में सामने आई बात
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 27 Nov 2018 06:04 PM IST
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मिताली राज
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वन-डे कप्तान मिताली राज ने बीसीसीआई को शिकायती पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कोच रमेश पोवार पर पक्षपात का आरोप लगाया। राज का आरोप है कि पोवार ने वेस्टइंडीज में वर्ल्ड टी20 की शुरुआत से ही उन्हें अपमानित किया।
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राज ने अपने पत्र में खुलासा किया कि वर्ल्ड टी20 के सेमीफाइनल में टीम इंडिया से बाहर होने पर वह काफी निराश और हैरान हुईं। राज ने शिकायती पत्र में यह भी बताया कि कोच ने उन्हें ड्रेसिंग रूम में नजरबंद कर दिया था।
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पढ़िए मिताली राज का पूरा शिकायती पत्र
मिताली ने बीसीसीआई सीईओ राहुल जौहरी और क्रिकेट संचालन महाप्रबंधक सबा करीम को एक पत्र लिखा है। पत्र में मिताली ने अपनी आपबीती सुनाई, '20 बरस के लंबे करियर में पहली बार मैने अपमानित महसूस किया। मुझे यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि देश के लिए मेरी सेवाओं की अहमियत सत्ता में मौजूद कुछ लोगों के लिए है भी या नहीं या वे मेरा आत्मविश्वास खत्म करना चाहते हैं।'
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उसने कहा, 'मैं टी-20 कप्तान हरमनप्रीत के खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहती, लेकिन मुझे बाहर रखने के कोच के फैसले पर उसके समर्थन से मुझे दुख हुआ।'
मिताली ने कहा, 'मैं देश के लिए विश्व कप जीतना चाहती थी। मुझे दुख है कि हमने सुनहरा मौका गंवा दिया।'
उन्होंने भारत की पूर्व कप्तान एडुल्जी को आड़े हाथों लिया जिन्होंने उसे बाहर रखने के फैसले का समर्थन किया था।
मिताली ने कहा, 'मैने हमेशा डायना एडुल्जी पर भरोसा जताया ओर उनका सम्मान किया। मैंने कभी यह नहीं सोचा कि वह मेरे खिलाफ अपने पद का दुरूपयोग करेगी। खासकर तब जबकि वेस्टइंडीज में जो कुछ मेरे साथ हुआ, मैं उन्हें बता चुकी थी।'
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उसने कहा, 'मुझे सेमीफाइनल से बाहर रखने के फैसले को उनके समर्थन से मैं काफी दुखी हूं क्योंकि उन्हें तो असलियत पता थी।' पवार के बारे में उसने कहा कि ऐसी कई घटनाएं हुई जब उसने अपमानित महसूस किया।
उसने कहा, 'यदि मैं कहीं आसपास बैठी हूं तो वह निकल जाते थे या दूसरों को नेट पर बल्लेबाजी करते समय देखते थे लेकिन मैं बल्लेबाजी कर रही हूं तो नहीं रूकते थे। मैं उनसे बात करने जाती तो फोन देखने लगते या चले जाते।'
मिताली ने बताया, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच से पहले मेरे घुटने में सूजन थी और इतने दबाव के कारण मुझे बुखार भी आ गया था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच से एक दिन पहले शाम को टीम मीटिंग हुई। रमेश ने मेरे रूम में कॉल किया और निर्देश दिया कि ग्राउंड पर न आऊं क्योंकि वहां मीडिया होगी। मुझे समझ नहीं आया कि मेरे टीम के साथ रहने पर मीडिया को क्या करना है। मुझे कहा गया कि हमारे सबसे बड़े मुकाबलों में से एक में मैं अपनी टीम के साथ नहीं रहूं। मैं हैरान थी। मैंने तुरंत मैनेजर से बात की और कहा कि मैं गंभीर चोटिल नहीं हूं बल्कि बीमार हूं। मैं टीम के साथ जाकर मैच देखना चाहती हूं। मैनेजर तैयार हो गई और मुझे ग्राउंड में जाने की इजाजत दी।
उन्होंने आगे लिखा, 'मैनेजर से बात करने के कुछ समय बाद रमेश ने मुझे मैसेज किया कि ड्रेसिंग रूम से बाहर नहीं निकलना। मुझे अजीब लगा कि वह इसमें शामिल क्यों हो रहे हैं जब फैसला मैनेजर और फिजियो का है। जब हम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीते, तो रमेश ने मेरी टीम के साथी से बोला कि मिताली को डगआउट आने का बोलो ताकि विक्टरी लैप में टीम के साथ रहे। यह अनजान था क्योंकि मुझे पूरे मैच के दौरान नजरबंद रखा और कभी ड्रेसिंग रूम से निकलने की इजाजत नहीं दी।'
उसने कहा, 'यह काफी अपमानजनक था और सभी को दिख रहा था कि मुझे अपमानित किया जा रहा है। इसके बावजूद मैने अपना आपा नहीं खोया।'