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पंत की तरह चुनौतीपूर्ण रही मयंक की टीम में वापसी: कोच देवेंद्र को पहले जैसी वापसी पर संशय था, जानें क्या कहा
सार
भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मयंक यादव इन दिनों न्यूजीलैंड दौरे पर हैं। मयंक चोट के कारण लंबे समय तक राष्ट्रीय टीम से बाहर रहे थे। मयंक यादव के कोच देवेंद्र शर्मा ने बताया कि किस तरह उनकी वापसी भी ऋषभ पंत की तरह चुनौतीपूर्ण थी। देवेंद्र को इस बात की खुशी है कि ऋषभ और मयंक दोनों ने सभी के कयासों को झुठलाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करके दिखाई है।
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कोच देवेन्द्र शर्मा के साथ मयंक यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
न्यूजीलैंड में बीते वर्ष लोअर बैक की सर्जरी कराने से पहले मयंक यादव ने सिर्फ तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलकर चार विकेट लिए थे, लेकिन आठ माह के कड़े पुनर्वास के बाद उन्होंने टीम में वापसी करते हुए आठ मैच में 10 विकेट ले डाले हैं। टी20 सीरीज के लिए न्यूजीलैंड दौरे पर मौजूद मयंक की यह वापसी आसान नहीं थी। यह कुछ वैसी चुनौती थी जो सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से चोटिल हुए उनके सोनेट क्लब के वरिष्ठ साथी ऋषभ पंत के सामने आई थी।
इन दोनों के कोच देवेंद्र शर्मा ने ऋषभ और मयंक की वापसी को नजदीकी से देखा है। पूर्व रणजी क्रिकेटर देवेंद्र अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि ऋषभ और मयंक, दोनों के ही मामलों में उनके दिमाग में यह बात आई थी कि वे पहले जैसी वापसी कर भी पाएंगे या नहीं, लेकिन देवेंद्र को इस बात की खुशी है कि ऋषभ और मयंक दोनों ने सभी के कयासों को झुठलाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करके दिखाई है।
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इन दोनों के कोच देवेंद्र शर्मा ने ऋषभ और मयंक की वापसी को नजदीकी से देखा है। पूर्व रणजी क्रिकेटर देवेंद्र अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि ऋषभ और मयंक, दोनों के ही मामलों में उनके दिमाग में यह बात आई थी कि वे पहले जैसी वापसी कर भी पाएंगे या नहीं, लेकिन देवेंद्र को इस बात की खुशी है कि ऋषभ और मयंक दोनों ने सभी के कयासों को झुठलाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करके दिखाई है।
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बस हिम्मत नहीं हारनी है
देवेंद्र को खुशी है कि ऋषभ की तरह मयंक ने भी हिम्मत नहीं हारी। जिंबाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ मयंक ने 149 से 150 तक की स्पीड निकाली। देवेंद्र बताते हैं कि न्यूजीलैंड में सर्जरी के बाद मयंक परेशान थे। मयंक ने देवेंद्र से कहा कि मेडिकल टीम कह रही है। वापसी में कम से कम छह माह का समय लगेगा। यह बड़ा समय है। तब मैंने उनसे कहा कि कोई बात नहीं यह समय निकल जाएगा। बस हिम्मत नहीं हारनी है। देवेंद्र कहते हैं ऐसे समय में किसी भी खिलाड़ी के दिमाग में यह बात आती है कि वह दोबारा खेल पाएगा या नहीं, तब मैंने उसे सिर्फ प्रोत्साहित कर उसका हौसला बढ़ाया।
देवेंद्र को खुशी है कि ऋषभ की तरह मयंक ने भी हिम्मत नहीं हारी। जिंबाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ मयंक ने 149 से 150 तक की स्पीड निकाली। देवेंद्र बताते हैं कि न्यूजीलैंड में सर्जरी के बाद मयंक परेशान थे। मयंक ने देवेंद्र से कहा कि मेडिकल टीम कह रही है। वापसी में कम से कम छह माह का समय लगेगा। यह बड़ा समय है। तब मैंने उनसे कहा कि कोई बात नहीं यह समय निकल जाएगा। बस हिम्मत नहीं हारनी है। देवेंद्र कहते हैं ऐसे समय में किसी भी खिलाड़ी के दिमाग में यह बात आती है कि वह दोबारा खेल पाएगा या नहीं, तब मैंने उसे सिर्फ प्रोत्साहित कर उसका हौसला बढ़ाया।
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शुरुआत में बेहद कमजोर थे पैर और जांघें
सच्चाई यह थी कि लोग कहने लगे थे कि मयंक अब पुरानी गति से कभी गेंदबाजी नहीं कर पाएगा, लेकिन मयंक ने उनसे कहा था कि वह पहले जैसी गति से ही गेंदबाजी करके दिखाएंगे। उन्होंने वाकई में ऐसा करके दिखाया है। देवेंद्र कहते हैं कि उन्होंने मयंक को वनडे और टेस्ट खेलने का लक्ष्य दिया है। इसके लिए उन्हें अपने ओवरों की संख्या बढ़ानी पड़ेगी। देवेंद्र कहते हैं कि उन्होंने मयंक को बिना किसी तकलीफ के रोजाना 30 ओवर फेंकने का लक्ष्य दिया। जिस दिन वह ऐसा करेंगे, वह वनडे और टेस्ट टीम में होंगे। देवेंद्र बताते हैं कि उनके पिता प्रभु यादव उन्हें सोनेट क्लब लाए थे। तब वह बेहद कमजोर थे उनकी जांघे और पैर भी कमजोर थी, लेकिन उनमें गजब की तेजी थी। यह भगवान की देन है। बाद में उन्होंने उनकी टांगें मजबूत कराईं।
सच्चाई यह थी कि लोग कहने लगे थे कि मयंक अब पुरानी गति से कभी गेंदबाजी नहीं कर पाएगा, लेकिन मयंक ने उनसे कहा था कि वह पहले जैसी गति से ही गेंदबाजी करके दिखाएंगे। उन्होंने वाकई में ऐसा करके दिखाया है। देवेंद्र कहते हैं कि उन्होंने मयंक को वनडे और टेस्ट खेलने का लक्ष्य दिया है। इसके लिए उन्हें अपने ओवरों की संख्या बढ़ानी पड़ेगी। देवेंद्र कहते हैं कि उन्होंने मयंक को बिना किसी तकलीफ के रोजाना 30 ओवर फेंकने का लक्ष्य दिया। जिस दिन वह ऐसा करेंगे, वह वनडे और टेस्ट टीम में होंगे। देवेंद्र बताते हैं कि उनके पिता प्रभु यादव उन्हें सोनेट क्लब लाए थे। तब वह बेहद कमजोर थे उनकी जांघे और पैर भी कमजोर थी, लेकिन उनमें गजब की तेजी थी। यह भगवान की देन है। बाद में उन्होंने उनकी टांगें मजबूत कराईं।
कृष्ण भक्त और शाकाहार के दम पर 150 की तेजी
देवेद्र याद करते हैं कि मयंक की शुरुआत में पैरों और जांघों की कमजोरी देखकर उन्होंने उनके पिता से पूछा कि इसे क्या खिलाते हैं। तो उन्होंने बताया कि यह शाकाहारी है। तब उन्होंने मयंक को मीट खिलाने की सलाह दी थी। देवेंद्र बताते हैं कि मयंक कन्हैया का भक्त है। वह नॉन वेज को हाथ भी नहीं लगाता है। उसने तब भी ऐसा किया। आज भी वह पनीर, टोफू और शाकाहार के सहारे 150 की गति निकालता है। देवेंद्र कहते हैं कि उसकी शुरुआती चोटों का कारण भी उसकी बॉडी का कमजोर होना था, जिस पर वीवीएस लक्ष्मण की निगरानी में एनसीओई में काफी मेहनत की गई है।
देवेद्र याद करते हैं कि मयंक की शुरुआत में पैरों और जांघों की कमजोरी देखकर उन्होंने उनके पिता से पूछा कि इसे क्या खिलाते हैं। तो उन्होंने बताया कि यह शाकाहारी है। तब उन्होंने मयंक को मीट खिलाने की सलाह दी थी। देवेंद्र बताते हैं कि मयंक कन्हैया का भक्त है। वह नॉन वेज को हाथ भी नहीं लगाता है। उसने तब भी ऐसा किया। आज भी वह पनीर, टोफू और शाकाहार के सहारे 150 की गति निकालता है। देवेंद्र कहते हैं कि उसकी शुरुआती चोटों का कारण भी उसकी बॉडी का कमजोर होना था, जिस पर वीवीएस लक्ष्मण की निगरानी में एनसीओई में काफी मेहनत की गई है।