विराट कोहली, एबी डीविलियर्स जैसे दिग्गज और विस्फोटक बल्लेबाजों के बावजूद रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की टीम पिछली 12 कोशिशों में अभी तक एक भी खिताब नहीं जीत पाई है। 2009, 2011 और 2016 में टीम फाइनल तक जरूर पहुंची, लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत पाई। वहीं पिछले तीन सीजन की बात करें तो 2017, 2018 और 2019 में टीम को काफी संघर्ष करना पड़ा था और टीम निचले पायदान पर रही थी।
इस बार क्रिस मॉरिस और आरोन फिंच के जुड़ने से टीम और मजबूत नजर आ रही है। कोहली की मौजूदा टीम 2016 के बाद से सबसे संतुलति है जब वह तीसरी बार फाइनल में पहुंची थी, लेकिन फिर हार गई थी। आरसीबी ने दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजी हरफनमौला क्रिस मॉरिस पर दस करोड़ रूपये खर्च किए और प्रबंधन को डेथ ओवर्स में उनसे कसी हुई गेंदबाजी के अलावा निचले क्रम पर आक्रामक बल्लेबाजी की उम्मीद होगी।
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एबी डीविलियर्स और विराट कोहली
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आरसीबी की सबसे बड़ी कमजोरी संयोजित टीम न चुन पाना है। टीम को अभी तक स्थाई ओपनिंग जोड़ी नहीं मिली है। 2017 में क्रिस गेल के जाने के बाद से आरसीबी की बल्लेबाजी कोहली और एबी डीविलियर्स पर निर्भर रही है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के सीमित ओवरों के कप्तान आरोन फिंच के आने से उन पर दबाव कुछ कम होगा। कोहली अब फिंच के साथ पारी का आगाज कर सकते हैं या तीसरे नंबर पर उतर सकते हैं। ऐसे में पार्थिव पटेल या देवदत्त पडिक्कल उनके साथ पारी की शुरूआत करेंगे।
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शिवम दुबे
- फोटो : social media
स्टार खिलाड़ियों के नहीं चलने पर गुरकीरत सिंह मान और शिवम दुबे जैसे युवाओं पर जिम्मेदारी रहेगी। निचले क्रम पर मॉरिस के साथ मोईन अली भी हैं। गेंदबाजी में अली और लेग स्पिनर एडम जंपा में से एक को चुना जाएगा। युजवेंद्र चहल और वाशिंगटन सुंदर भी स्पिनरों में शामिल है। तेज गेंदबाजों में मॉरिस, डेल स्टेन, नवदीप सैनी, उमेश यादव और मोहम्मद सिराज हैं। कोचिंग स्टाफ भी नया है जिसमें माइक हेसन और साइमन कैटिच शामिल हैं।
आरसीबी के प्रशंसक दुआ कर रहे होंगे कि 13 साल का उनका इंतजार इस बार खत्म हो जाए। रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम ने अब तक खेले 181 मैच में 83 जीत में जीत मिली है जबकि 92 में शिकस्त और पांच मैच टाई भी रहे हैं। एक मैच का कोई परिणाम नहीं निकल सका। आरसीबी का डेथ ओवर्स में स्ट्राइक रेट स्ट्राइक रेट 159.21 रहा है, जो किसी भी बल्लेबाजी टीम द्वारा सर्वाधिक है।