फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   INDvBAN Big challenge will be save the pink ball from getting dirty and the dew in Eden Gardens

ऐतिहासिक डे-नाइट टेस्टः मैली हुई गुलाबी गेंद तो होगी दिक्कत...

Wed, 20 Nov 2019 08:30 AM IST
Rohit Ojha हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली Published by: Rohit Ojha Updated Wed, 20 Nov 2019 08:30 AM IST
विज्ञापन
INDvBAN Big challenge will be save the pink ball from getting dirty and the dew in Eden Gardens
गुलाबी गेंद - फोटो : getty

भारत और बांग्लादेश के बीच इडन गार्डन में होने जा रहे ऐतिहासिक टेस्ट में गुलाबी गेंद के कोप से बचने के लिए उसे ओस और गंदा होने से बचाना होगा। जुलाई-सितंबर 2016 में देश में पहली बार हुए गुलाबी गेंद से दलीप ट्रॉफी के मुकाबलों में बीसीसीआई की पिच और ग्राउंड्स कमेटी ने इन्हीं बातों का ख्याल रखा था।

विज्ञापन


तत्कालीन पिच और ग्राउंड्स कमेटी के चेयरमैन दलजीत सिंह दो लाइनों में स्पष्ट करते हैं कि कोलकाता में गुलाबी गेंद की हरकत से बचने के लिए मैदान पर कम और पिच पर बड़ी घास रखनी होगी। दलजीत के मुताबिक पिच पर घास हरी नहीं बल्कि भूरी होनी चाहिए। वरना मुकाबला जल्द खत्म हो जाएगा।
विज्ञापन


देश में गुलाबी गेंद के लिए पिच तैयार करने का अनुभव दलजीत सिंह, क्यूरेटर तापोस और यूपीसीए के शिवकुमार को है। इन तीनों ही ने मिलकर ग्रेटर नोएडा के शहीद पथिक सिंह स्टेडियम में दलीप ट्राफी के गुलाबी गेंद से हुए मुकाबलों की पिचें तैयार की थीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

एडीलेड टेस्ट का अनुभव आया था काम

INDvBAN Big challenge will be save the pink ball from getting dirty and the dew in Eden Gardens
पिंक बॉल - फोटो : Wikipedia


दलजीत के मुताबिक उस वक्त यह बड़ी चुनौती थी, क्यों कि उससे पहले एडीलेड में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच गुलाबी गेंद से डे नाइट टेस्ट हुआ था। उन्होंने इस टेस्ट मैच का फीड बैक मंगवाया था। उसके बाद दलीप ट्रॉफी की पिचों के लिए काम शुरू किया। सबसे बड़ी समस्या गुलाबी गेंद के जल्दी गंदा होने की सामने आई थी। कोलकाता में भी इस दिक्कत से बचना होगा। 

वन-डे क्रिकेट में गेंद को गंदा होने से बचाने के लिए आईसीसी 25-25 ओवर के लिए दो सफेद गेंदों का प्रयोग करता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में 80 ओवर बाद गेंद बदली जाती है। पिच पर अगर घास कम है तो इसका मिट्टी से सीधा संपर्क होगा और गेंद जल्दी गंदी होगी। जिससे शाम और रात के समय में यह गेंद न तो बल्लेबाज को दिखाई देगी और न ही बाउंड्री पर खड़े क्षेत्ररक्षकों को नजर आएगी।

ऐसे में गेंद को गंदा होने से बचाना होगा। इसके लिए पिच पर सामान्य से बड़ी घास रखनी होगी। अगर यह घास हरी रहती है तो तेज गेंदबाजों को एसजी की गुलाबी गेंद की मोटी सीम का फायदा मिलेगा और टेस्ट जल्दी खत्म होने अवसर रहेंगे। पेसर और स्पिनर दोनों के फायदे के लिए पिच पर भूरी घास रखनी होगी। दलीप ट्राफी में पिच तैयार करने वाले ग्रीन पार्क कानपुर के क्यूरेटर शिवकुमार खुलासा करते हैं कि गेंद को गंदा होने से बचाने के लिए उस दौरान पिच पर छह से सात मिलीमीटर की घास रखी गई थी। जबकि सामान्य तौर पर तीन से चार मिलीमीटर की घास रखी जाती है।

ईडन गार्डन की शाम की ओस होगा बचना

INDvBAN Big challenge will be save the pink ball from getting dirty and the dew in Eden Gardens
गुलाबी गेंद

दो दशकों तक बीसीसीआई के चीफ क्यूरेटर रहे दलजीत खुलासा करते हैं कि कोलकाता में साढ़े तीन चार बजे के बाद सूरज जल्दी ढल जाता है। वह खुद कोलकाता में  22 साल तक खेले हैं। इस दौरान ओस जल्दी पड़ेगी। ओस का ध्यान रखना पड़ेगा। इसके लिए आउटफील्ड में कम घास रखनी होगी। यही नहीं आउट फील्ड में दो-तीन पहले से पानी डालना बंद करना पड़ेगा, जिससे नमी नहीं रहने पाए। नमी रहेगी तो गेंद जल्द गीला होगा। आउटफील्ड में कम घास होने से ओस का असर कम हो जाएगा। 

टेस्ट मैच के दौरान ओस से निपटने के उपायों को अपनाना होगा। इसके लिए घास पर दवा छिड़कनी होगी जिससे ओस नीचे बैठ जाए, साथ ही दरियों से ओस हटाया पड़ेगा। दलजीत साफ करते हैं कि कोलकाता में दोनों अच्छे क्यूरेटर हैं और समझदार हैं। उन्हें सब मालूम है और उनके पास अच्छे संसाधन हैं।

शुरूआत में स्विंग करेगी गुलाबी गेंद

शिवकुमार के अनुसार दलीप ट्राफी में गेंद को ओस से बचाने के लिए उनकी ओर से मैचों में रोचाना मैदान की घास कटवाई गई थी। अमूमन मैच में मैदान की घास नौ मिलीमीटर की होती है, लेकिन इसे छोटा किया गया था। हालांकि शिवकुमार के मुताबिक ऐसे में गेंद जल्द पुरानी होगी और पेसरों को रिवर्स स्विंग ज्यादा मिलेगा। इसका फायदा शमी, इंशात और उमेश यादव उठाएंगे।

दलजीत के मुताबिक एसजी की लाल गेंद की सबसे मोटी सीम होती है। पेसर और स्पिनर दोनों को अच्छा ग्रिप मिलता है। उन्हें उम्मीद है एसजी की गुलाबी गेंद में भी ऐसा होगा। गुलाबी गेंद में कोटिंग ज्यादा होती जिससे गेंद ज्यादा चमकती है। इससे स्विंग का फर्क पड़ेगा। गेंद शुरू में ज्यादा स्विंग करेगा। वहीं शिवकुमार दलीप ट्राफी में अपने अनुभव के आधार पर बताते हैं कि लाल के मुकाबले गुलाबी गेंद से कोलकाता में जरूर कुछ न कुछ अलग देखने को मिलेगा।   

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें क्रिकेट समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। क्रिकेट जगत की अन्य खबरें जैसे क्रिकेट मैच लाइव स्कोरकार्ड, टीम और प्लेयर्स की आईसीसी रैंकिंग आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed