INDvSA: आखिर, तेज पिचों पर क्यों दम तोड़ जाती है भारतीय बल्लेबाजी?
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पिछले साल तमाम टेस्ट सीरीज में धुआंधार प्रदर्शन करने वाली टीम इंडिया इस साल पहले 'टेस्ट' में ही औंधे मुंह गिर गई। भारत में आग उगलने वाले टीम इंडिया के बल्लेबाजों के बल्ले दक्षिण अफ्रीका की तेज पिचों पर मुंह खोलने की भी हिम्मत नहीं कर पाए। नतीजतन, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले दोनों टेस्ट हारकर भारत साल की पहली सीरीज भी गंवा बैठा। टीम इंडिया को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन के दूसरे मैच में 135 रन की शिकस्त झेलनी पड़ी जबकि केपटाउन के पहले टेस्ट में उसे 72 रन की हार का सामना करना पड़ा था।
इस साल भारत के लिए आफत कम नहीं हैं, विराट कोहली के नेतृत्व वाली टीम इंडिया को 2018 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का भी दौरा करना है, जहां की पिच तेज गेंदबाजों के मुफीद ही मानी जाती हैं। बहरहाल, टीम इंडिया के बल्लेबाज पहले दो टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका की तेज और उछाल भरी पिचों पर असहाय नजर आए। कप्तान विराट कोहली की सेंचुरियन टेस्ट में खेली 153 रन की पारी और हार्दिक पांड्या की केपटाउन में 93 रन की पारी को छोड़ दिया जाए, तो कोई और बल्लेबाज अपनी क्षमता के हिसाब से भी प्रदर्शन नहीं कर पाया।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो जाता है कि आखिर क्या कारण है कि तेज पिचों पर भारतीय बल्लेबाजी दम तोड़ देती है? क्या वजह है कि भारत की पिचों पर रनों का अंबार लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज विदेश की तेज पिचों पर एक-एक रन के लिए तरस जाते हैं। जानकारों की मानें तो इसके कई मोटे मोटे कारण हैं।
भारत में तेज पिचों का टोटा
टीम इंडिया के बल्लेबाज तेज और उछाल भरी पिचों पर खेलने के आदि नहीं हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है देश में तेज पिचों की कमी। दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जाने से पहले टीम इंडिया श्रीलंका के खिलाफ सीरीज खेल रही थी। तब टीम ने तेज पिचों की मांग की थी। मगर पिच क्यूरेटर ऐसी पिच मुहैया कराने में असमर्थ रहे। जिसके बाद अफ्रीका पहुंची टीम इंडिया को तैयारी का पर्याप्त समय भी नहीं मिल पाया।
'मेन इन ब्लू' को सबसे बड़ी कमी इसी बात की खली कि जब देश में ही तेज गेंदबाजों के लिए मददगार पिच नहीं होंगी तो वो विदेश की तेज और उछाल भरी पिचों पर कैसे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। ऐसे में जरूरत है कि देश में भी कुछ ऐसी पिचें तैयार की जाएं, जिससे बल्लेबाज अपनी तकनीक में बदलाव करके बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
तेज पिचों पर बल्लेबाजों की हड़बड़ाहट
दक्षिण अफ्रीका दौरे पर स्पष्ट रूप से दिखा कि टीम इंडिया के बल्लेबाज तेज पिचों पर खेलने में असहज रहे। पहले मैच में शिखर धवन शॉर्ट गेंदों पर आउट हुए। वहीं अन्य बल्लेबाज समझ नहीं सके कि किस गेंद को फ्रंटफुट पर खेलना है और किसे बैकफुट पर। कुछ बल्लेबाजों ने क्रीज पर समय भी बिताया, लेकिन वह कभी भी सहज नहीं नजर आए।
चेतेश्वर पुजारा, मुरली विजय और केएल राहुल जैसे टेस्ट विशेषज्ञ बल्लेबाज भी तेज पिचों पर घबराए हुए दिखे। पुजारा, विजय और राहुल जब पिच पर थे तब उनके शॉट्स में आत्मविश्वास की कमी साफ झलक रही थी। इससे मेजबान टीम के गेंदबाजों को हावी होने का पूरा मौका मिला और दोनों टेस्ट के परिणाम सभी के सामने हैं।
भारतीय बल्लेबाज फ्रंटफुट पर खेलने के आदि
तेज गेंदबाजों के लिए मददगार पिचों पर अधिकांश देखने को मिला है कि बैकफुट पर खेलने वाले बल्लेबाज काफी सफल रहे हैं। मौजूदा भारतीय टीम के बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे विदेशों में कामयाब इसीलिए रहे हैं क्योंकि वह बैकफुट के अच्छे बल्लेबाज हैं। जबकि भारतीय बल्लेबाज फ्रंटफुट पर खेलने के आदि हैं क्योंकि देश की अधिकांश पिचों से स्विंग गेंदबाजों और स्पिनरों को मदद मिलती है। इनका सामना करने के लिए बल्लेबाज को फ्रंटफुट पर खेलना होता है।
दक्षिण अफ्रीका दौरे पर टीम इंडिया के बल्लेबाजों को अपनी शैली के विपरीत बैकफुट पर बल्लेबाजी का जलवा बिखेरना था। मगर चुनिंदा बल्लेबाज ही ऐसा करने में कामयाब रहे। टीम इंडिया को आखिरी टेस्ट में अपनी इस गलती को सुधारने की जरूरत होगी ताकि सीरीज का सम्मानजनक अंत करने में कामयाब हो।
उछाल भरी पिच पर स्विंग का सामना करने में असमर्थ
टीम इंडिया की सबसे ज्यादा तकलीफ दक्षिण अफ्रीका दौरे पर यही रही कि पिच के तेज होने के साथ-साथ गेंद स्विंग भी हो रही है और पूरा उछाल भी मिल रहा है। दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजी आक्रमण में वेर्नोन फिलेंडर, मोर्ने मोर्केल, कागिसो रबाडा और लुंगी एनगिडी ने अच्छा उछाल प्राप्त किया और स्विंग के साथ भारतीय बल्लेबाजों को खूब परेशान किया।
आप स्कोरकार्ड देखेंगे तो साफ हो जाएगा कि अधिकांश बल्लेबाजों के कैच कीपर या स्लिप में पकड़े गए। इससे स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय बल्लेबाज उछाल भरी पिच पर स्विंग का सामना करने में असमर्थ दिखे। टीम इंडिया अगर इस पहलू में सुधार कर ले तो उसकी जीत संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
पिच पर समय नहीं बिताने की कमजोरी
टीम इंडिया के बल्लेबाज जल्दी-जल्दी आउट होकर पवेलियन लौटते दिखे। इसको लेकर फैंस में भी गुस्सा दिखे जो भारतीय बल्लेबाजों के 'तू चल मैं आया' वाले रवैये से खासे नाराज थे। मुश्किल वक्त में एक बल्लेबाज के लिए जरूरी होता है वह पिच पर समय बिताए ताकि परिस्थितियों को समझकर खुलकर अपने शॉट्स खेले।
भारतीय बल्लेबाज इस मामले में पिछड़े हुए नजर आए। मौजूदा दौरे पर पहले दो टेस्ट में भारतीय बल्लेबाज पिच पर ज्यादा समय बिताने में ही कंजूसी करते दिखे। कुछ बल्लेबाज क्रीज पर असहज नजर आए तो उन्होंने समय लेने के बजाय जल्दी रन बनाने की जुगत में अपना विकेट गंवा दिया।