मेलबर्न, सिडनी में टेस्ट इतिहास की दो महानतम वापसी के बाद चोटों ने टीम इंडिया की गाबा में होने वाले अंतिम टेस्ट की उलझनों को बढ़ा दिया है। शमी, उमेश यादव, केएल राहुल, रविंद्र जडेजा, हनुमा विहारी और जसप्रीत बुमराह के चोटिल होने से गाबा में भारत के अंतिम एकादश का चयन पेचीदा हो गया है। अश्विन, पंत पहले से चोटिल हैं लेकिन मयंक अग्रवाल के नेट के दौरान चोटिल होने से यह तय है कि गाबा में ऑस्ट्रेलिया फतेह का सपना संजोकर उतरने वाली भारत की मुख्य टीम तो नहीं होगी।
AUSvIND: अब ब्रिस्बेन में आर या पार की लड़ाई, कोच-कप्तान को करनी होगी माथापच्ची
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रहाणे, शास्त्री को करनी होगी माथापच्ची
कप्तान अजिंक्य रहाणे और कोच रवि शास्त्री को गाबा की टीम चुनने के लिए अत्यधिक दिमाग खपाना पड़ेगा। रहाणे ने मेलबर्न, सिडनी में पांच गेंदबाजों के साथ उतरना पसंद किया है। रविंद्र जडेजा की मौजूदगी उनकी पसंद को संतुलन प्रदान कर रही थी। लेकिन वह गाबा में नहीं होंगे। ऐसे में रहाणे को या तो एक बल्लेबाज की बलि देकर पांच विशुद्ध गेंदबाजों के साथ उतरना होगा या फिर चार गेंदबाजों का विकल्प आजमाना पड़ेगा। रहाणे अगर एक ऑलराउंडर के साथ उतरने को तरजीह देते हैं तो उनके पास ऑस्ट्रेलिया में रोक लिए गए वाशिंगटन सुंदर बचते हैं। यह भी हो सकता है कि रहाणे जडेजा की जगह सुंदर के टेस्ट कैप पहना दें।
शार्दुल, नटराजन में से खेलेगा एक
शमी, यादव, बुमराह के चोटिल होने से यह तय हो गया है कि गाबा में आक्रमण की अगुवाई नवोदित पेस अटैक करेगा। ऐसे में सिराज, सैनी के साथ शार्दुल ठाकुर या फिर टी नटराजन का खेलना तय है। अश्विन के साथ कुलदीप यादव को लाए जाने का भी विकल्प है,लेकिन गाबा हमेशा तेज गेंदबाजों की मदद करता आया है। ऐसे में दो स्पिनरों के साथ उतरने का जोखिम रहाणे को लेना होगा।
शुभमन गिल, रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा और अङ्क्षजक्य रहाणे के रूप में उच्च क्रम चिंता का विषय नहीं है। मयंक को हनुमा की जगह खिलाया जा सकता है। अगर वह भी फिट नहीं हुए तो पृथ्वी शॉ को आजमाना पड़ेगा या फिर ऋषभ पंत को बतौर बल्लेबाज और ऋद्धिमान साहा को विकेट कीपर के तौर पर लाना होगा।
बायो बबल में फिटनेस कायम रखना चुनौती
शमी, जडेजा और पंत ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजी का शिकार हुए हैं, लेकिन राहुल, बुमराह, उमेश, हनुमा विहारी, अश्विन को लंबे समय से खेलने के कारण फिटनेस में आई गिरावट ने चोटिल किया। इन क्रिकेटरों को मांसपेशियों, दर्द और खिचाव की समस्या रही है। बायो बबल में रहकर मैच फिनेस को बनाकर रखना चुनौती है। इसमें रहकर क्रिकेटर का न्यूरो मस्क्युलर कोआर्डिनेशन (दिमाग और मांसपेशियों का समन्वय) असंतुलित हो जाता है। जिससे खिचाव के साथ क्षमता की कमी हो जाती है। यही ऑस्ट्रेलिया में भारतीय क्रिकेटरों केसाथ हुआ है। भारतीय क्रिकेटर आईपीएल में भी बबल में रहे इस लिए और ज्यादा दिक्कत आई हैं।