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बीसीसीआई के आगे फिर आईसीसी को टेकने पड़े घुटने
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 07 Sep 2016 08:11 PM IST
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बीसीसीआई
- फोटो : getty
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क्रिकेट के सबसे धनी बोर्ड बीसीसीआई के आगे एक बार फिर आईसीसी को घुटने टेकने पड़े हैं। क्रिकेट की सर्वोच्च नियामक संस्था आईसीसी टेस्ट क्रिकेट में टू-टीयर फॉर्मेट चाहता था, लेकिन भारतीय क्रिकेट बोर्ड इसके पक्ष में नहीं था।
फिर बीसीसीआई की जिद के आगे आईसीसी को अपना टू-टीयर टेस्ट का प्रपोजल वापस लेना पड़ा। भारत को इस मामले में श्रीलंका, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे का समर्थन मिला। मुख्य कार्यकारी कमेटी की दो दिन की मीटिंग के बाद दुबई में यह फैसला लिया गया।
आईसीसी अब इसे नए सिरे से देखेगी। बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर इस प्रस्ताव के बड़े आलोचक रहे हैं। उन्होंने इस फैसले को उन देशों के लिए खराब और बुरा बताया जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ऐसे देशों ने इस फैसले का स्वागत किया है। अध्यक्ष अनुराग ठाकुर का कहना है कि मौजूदा फॉर्मेट के चलते क्रिकेट को नुकसान नहीं होने वाला।
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फिर बीसीसीआई की जिद के आगे आईसीसी को अपना टू-टीयर टेस्ट का प्रपोजल वापस लेना पड़ा। भारत को इस मामले में श्रीलंका, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे का समर्थन मिला। मुख्य कार्यकारी कमेटी की दो दिन की मीटिंग के बाद दुबई में यह फैसला लिया गया।
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आईसीसी अब इसे नए सिरे से देखेगी। बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर इस प्रस्ताव के बड़े आलोचक रहे हैं। उन्होंने इस फैसले को उन देशों के लिए खराब और बुरा बताया जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ऐसे देशों ने इस फैसले का स्वागत किया है। अध्यक्ष अनुराग ठाकुर का कहना है कि मौजूदा फॉर्मेट के चलते क्रिकेट को नुकसान नहीं होने वाला।
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अपनी हार होता देख आईसीसी ने बदला फैसला
अनुराग ठाकुर
- फोटो : getty
बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा, “मैं शुक्रगुजार हूं कि आईसीसी ने हमारे नजरिए को भी समझा और इस प्रस्ताव को वापस ले लिया। विश्व क्रिकेट में बड़ा हिस्सेदार होने के कारण बीसीसीआई सभी के हितों के बारे में चिंतित है और सुनिश्चित करता है कि क्रिकेट के विकास से समझौता नहीं किया जाएगा।”
आईसीसी को किसी भी बुनियादी बदलाव के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। ऐसे में उसे 10 में से 7 वोट चाहिए थे, जो मिलना मुमकिन नजर नहीं आ रहा था।
संभावना यह भी थी कि वोटिंग के दौरान वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड भी भारत का साथ दे देता। सूत्रों ने बताया कि वेस्टइंडीज अनुमानों के प्रतिकूल दो भागों में टीमों के विभाजन के पक्ष में नहीं था। हालांकि कैरेबियाई बोर्ड डे-नाइट और 4 दिन के फॉर्मेट के पक्ष में था। आईसीसी ने अपना बयान जारी कर कहा है कि इस मुद्दे पर और बातचीत की जरूरत हैं।
आईसीसी को किसी भी बुनियादी बदलाव के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। ऐसे में उसे 10 में से 7 वोट चाहिए थे, जो मिलना मुमकिन नजर नहीं आ रहा था।
संभावना यह भी थी कि वोटिंग के दौरान वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड भी भारत का साथ दे देता। सूत्रों ने बताया कि वेस्टइंडीज अनुमानों के प्रतिकूल दो भागों में टीमों के विभाजन के पक्ष में नहीं था। हालांकि कैरेबियाई बोर्ड डे-नाइट और 4 दिन के फॉर्मेट के पक्ष में था। आईसीसी ने अपना बयान जारी कर कहा है कि इस मुद्दे पर और बातचीत की जरूरत हैं।