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अब कैसे रसूखदारों को बचाएगी बीसीसीआई?
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 31 Jul 2013 01:33 AM IST
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मुंबई हाईकोर्ट की ओर से स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी मामले में बीसीसीआई की दो सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद बोर्ड में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
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बोर्ड के कर्ता-धर्ता अब इस मामले से निपटने के लिए नए सिरे से रणनीति बनाने में जुट गए हैं। बावजूद इसके बोर्ड अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ा है।
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दो माह बाद सितंबर के अंतिम सप्ताह में होने वाले बोर्ड के चुनाव को ध्यान में रखते हुए बोर्ड के इस दिग्गज के खिलाफ अब खुलकर सामने आने की कोई भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
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हालांकि कोर्ट का आदेश आने के बाद इस चर्चा को हवा जरूर मिल गई है कि श्रीनिवासन दो अगस्त को दिल्ली में होने वाली बोर्ड वर्किंग कमेटी की अगुआई करेंगे या नहीं।
ससुर-दामाद को क्लीन चिट देने वाली कमेटी अवैध घोषित
इस संबंध में बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि फिलहाल उन्हें कोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं मिली है। आदेश की समीक्षा किए जाने के बाद इस बारे में निर्णय लिया जाएगा। दो अगस्त को होने वाली बैठक की अध्यक्षता कौन करेगा, इस पर भी अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
हालांकि सच्चाई यह है कि श्रीनिवासन को छोड़ बोर्ड में यह किसी को नहीं मालूम है कि उनका अगला कदम क्या होगा। कोलकाता में जगमोहन डालमिया भी कह चुके हैं कि बैठक में पहुंचने का निर्णय खुद श्रीनिवासन को लेना है।
सच्चाई यह भी है कि इस वक्त श्रीनिवासन के खिलाफ खुलकर कदम उठाने की स्थिति में कोई भी नहीं है। यहां तक अरुण जेटली की अगुआई वाली उत्तरी क्षेत्र लॉबी भी फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
खुद श्रीनिवासन ने एक माह पूर्व आरोप लगाया था कि उत्तरी क्षेत्र लॉबी उन्हें हटाने का कार्य कर रही है। लेकिन अब स्थिति ऐसी नहीं है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए सभी श्रीनिवासन की उपयोगिता को समझ रहे हैं।
यह भी एक सच्चाई है कि वर्तमान परिस्थितियों के बावजूद श्रीनिवासन के पास बोर्ड मेंबरों का बड़ा वोट बैंक है। जिसके चलते कोर्ट के आदेश के बावजूद पहले की तरह उनके खिलाफ विस्फोटक कदम उठाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा रहा है।
'बोर्ड की जांच आंखों में धूल झोंकने वाली थी'
बीसीसीआई के पूर्व सचिव जयवंत लेले ने बांबे हाई कोर्ट के आदेश की सराहना करते हुए कहा कि बीसीसीआई का आंतरिक जांच पैनल आंखों में धूल झोंकने के लिए था।
लेले ने कहा, ‘बांबे हाई कोर्ट ने बिलकुल सही फैसला किया है। दो सदस्यीय पैनल में नियुक्त जज एन श्रीनिवासन के लोग थे। हमें तब तक इंतजार करना होगा जब तक अदालत की कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती।’
'हमें शर्मनाक स्थिति में डाल दिया गया है'
बीसीसीआई के अंतरिम प्रमुख जगमोहन डालमिया ने स्वीकार किया कि दो सदस्यीय जांच पैनल को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार देने के बांबे हाईकोर्ट के फैसले ने उन्हें शर्मनाक स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।
क्रिकेट बोर्ड के सामने आ रहे संकट के बारे में पूछने पर डालमिया ने कहा कि मुझे नहीं पता कि यह संकट कितना बड़ा है लेकिन मैं कह सकता हूं कि मैं भी उतना ही अंधेरे में हूं। हमें अब तक फैसले की प्रति नहीं मिली है। यहां से कहां जाना है, हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा।