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Gaurav Yadav: दिल्ली के खिलाफ उलटफेर के हीरो गौरव की कहानी, खेतों से शुरू हुआ संघर्ष; अब रणजी में किया कमाल

Tue, 09 Jan 2024 04:45 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शक्तिराज सिंह Updated Tue, 09 Jan 2024 04:45 PM IST
सार

21 साल की उम्र में गौरव के लिए क्रिकेट खेलना नामुमकिन सा हो गया था, चोट की वजह से उनकी परेशानी और बढ़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इस तेज गेंदबाज ने आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत की है।
 

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Gaurav Yadav story who led puducherry win over delhi journey from field to Ranji trophy Wonders
गौरव यादव - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

रणजी ट्रॉफी 2024 में गौरव यादव ने अपने पहले ही मैच में कमाल किया है। उन्होंने 10 विकेट लेकर पुडुचेरी को दिल्ली के खिलाफ जी दिला दी। यह इस सीजन का सबसे बड़ा उलटफेर हो सकता है। इस मैच में दिल्ली की हार के बाद यश ढुल को कप्तानी भी गंवानी पड़ी। गौरव यादव 32 साल की उम्र में कमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे पहले का सफर उनके लिए आसान नहीं रहा है। गौरव ने एक ईएसपीएन क्रिकइनफो के साथ बातचीत में अपने संघर्ष के बारे में बताया है।
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जब उन्होंने क्रिकेटर बनने की ठानी तो उनके पिता भविष्य को लेकर चिंतित थे। ऐसे में उन्होंने अपने पिता से कहा "क्या आपने मुझे खेत में काम करके बड़ा नहीं किया? अगर क्रिकेट नहीं चला तो मैं भी यही काम करूंगा।" इसके बाद उनके पिता उन्हें क्रिकेटर बनाने के लिए राजी हो गए। इस समय गौरव की उम्र 21 साल थी। मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाके बिसोनी कलां में बड़े होने वाले गौरव ने किसी भी प्रकार का ग्रुप स्टेज क्रिकेट नहीं खेला था, लेकिन वह तेजी से गेंदबाजी करने और नाम कमाने की इच्छा रखते थे।
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इंदौर में जब उन्होंने एक स्थानीय क्लब में क्रिकेट खेलने के बारे में पूछा तो उनका मजाक बना दिया गया। "मैंने पूछा कि किसी ऐसे व्यक्ति के लिए क्या रास्ता है जिसने पहले ग्रुप स्टेज क्रिकेट नहीं खेला है? उन्होंने मुझसे तुरंत कहा 'मत खेलो'। लेकिन मुझे पता था कि मैं इतनी आसानी से हार नहीं मान सकता।"
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गौरव को पहली बार टेनिस बॉल क्रिकेट से भारत के पूर्व लेगस्पिनर नरेंद्र हिरवानी ने चुना था। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने यादव को एक अंडर-25 गेम के लिए चुना, जहां उन्होंने मुंबई टीम के खिलाफ पांच विकेट लिए थे। अगले सप्ताह उन्होंने इंदौर में गुजरात के खिलाफ पहला रणजी मैच खेला। गौरव ने कहा "हिरवानी सर ने मुझे एक ओवर गेंदबाजी करते हुए देखा और तुरंत संजय जगदाले (पूर्व एमपीसीए प्रमुख) से कहा कि मुझे निखारना चाहिए। मैं एक ट्रायल मैच खेल रहा था। पहले दिन के बाद, चयनकर्ताओं में से एक ने मुझसे कहा 'कल मत आना'। मैं चौंक गया क्योंकि मैंने शानदार गेंदबाजी की थी। फिर वह हंसे और कहा, आप रणजी टीम में शामिल हो रहे हैं।"

पिछले कुछ वर्षों में यादव लगातार चोटों से जूझते रहे हैं। अपने दूसरे सीजन में, तेज गेंदबाजी करने के प्रयास में सीजन से पहले उनका टखना मुड़ गया। ठीक होने के बाद, वह बाइक से गिर गए और बाएं पैर में चोट लग गई। एक सीजन की शुरुआत से पहले उन्हें चिकनगुनिया हो गया। गौरव का कहना "आप मुझसे पूछते हैं कि मैं इतना कम क्यों खेला हूं, ये सभी कारण हैं जिन्होंने एक प्रमुख भूमिका निभाई है। जब आप नहीं खेलते हैं, तो आपका फॉर्म खराब हो जाता है। जब आप चोटिल होते हैं, तो चयनकर्ता कभी-कभी सोचते हैं कि क्या यह जोखिम उठाने लायक है।"

गौरव को उनकी मेहनत का पुरस्कार 2021-22 में मिला जब वह विजयी रणजी ट्रॉफी विजेता मध्य प्रदेश टीम का हिस्सा बने। उस सीजन में पांच मैचों में उनके 23 विकेट सभी तेज गेंदबाजों में सबसे अधिक थे। यादव कहते हैं, "उस सीजन के बाद, मैंने सोचा था कि मैं सभी प्रारूपों में प्रदेश की टीम में नियमित खिलाड़ी बन जाऊंगा, लेकिन किसी कारण से मौका नहीं मिला। पिछले सीजन मैंने आंध्र के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में शानदार गेंदबाजी की थी। (मैच में पांच विकेट लिए, जिसमें दूसरी पारी में 10 रन देकर 3 विकेट भी शामिल थे।) उस मैच के दौरान मैं घायल हो गया, लेकिन चयनकर्ताओं और कोच (चंद्रकांत पंडित) ने कहा कि मुझे (बंगाल के खिलाफ) सेमीफाइनल के लिए जोर लगाना चाहिए। हम वह मैच हार गए और बाहर हो गए। मेरे लिए यह अच्छा नहीं था। फिर ईरानी कप से पहले, चोट बढ़ गई और मैं बाहर हो गया। फिर भी, मुझे पूरी तरह से फिट होने के बाद सीमित ओर क्रिकेट की टीम में वापसी की उम्मीद थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 31 साल की उम्र में, मैं टीम का नियमित सदस्य नहीं था। मुझ पर एक प्रारूप का गेंदबाज होने का ठप्पा लगा दिया गया था। मैंने एमपी के लिए खेलने के लिए आईपीएल टीमों के साथ ट्रायल के मौके छोड़े थे। मुझे लगा कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है।"

इस सीजन से पहले, यादव को उनके मध्य प्रदेश टीम के साथी वेंकटेश अय्यर ने पुडुचेरी के लिए खेलने की सलाह दी। पुडुचेरी एक तेज गेंदबाज की तलाश में थी और गौरव उस भूमिका के लिए सटीक थे। यहां आने के बाद पहले ही मैच में उन्होंने कमाल किया है। यादव कहते हैं, "मुझे लगा कि अगर मैं यहां जाता हूं और यह काम नहीं करता है, तो भी मैं इसे स्वीकार करूंगा, कम से कम मुझे कोशिश न करने का पछतावा नहीं रहेगा। मुझे लगता है कि मैं सफेद गेंद से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता हूं। मैं विजय हजारे ट्रॉफी 2019-20 में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला गेंदबाज था और फिर कोरोना आ गया। तब से मेरे बारे में शायद ही विचार किया गया था, इसलिए अनिवार्य रूप से मैं बिना यह सोचे खेल रहा हूं कि मैं हर फॉर्मेट की टीम में हूं या नहीं।"

पिछले साल, पहली बार, उन्होंने अंततः एक आईपीएल फ्रेंचाइजी के साथ ट्रायल में भाग लिया और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने उन्हें नेट गेंदबाज के रूप में चुना। यह एक ऐसा अवसर है जो पहले उनके हाथ से निकल गया था क्योंकि पंडित ने "मुझे सख्ती से लाल गेंद वाले क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा था। पहले कुछ नेट सत्रों में से एक में, मैं विराट (कोहली) भाई को प्रभावित करने में कामयाब रहा। सत्र के बाद, मैं अन्य नेट गेंदबाजों के साथ एक कोने में बैठा था। जाहिर तौर पर आप नहीं जानते कि उनके जैसे बड़े खिलाड़ी से सवाल कैसे पूछा जाए। वह आए और खुद ही बात की। उनके शब्द बहुत उत्साहजनक थे। इससे मदद मिली मुझमें बहुत आत्मविश्वास है।"

गौरव ने 2023-24 के रणजी ट्रॉफी ओपनर में 98 रन पर 10 विकेट लेकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने अरुण जेटली स्टेडियम में दिल्ली पर पुडुचेरी को उलटफेर का शिकार बनाया था। मध्य प्रदेश से आने के बाद पुडुचेरी के लिए यह यादव का पहला प्रथम श्रेणी मैच था। 2012-13 में उनके लिए पदार्पण करने के एक दशक से अधिक समय के बाद, यादव को कुछ हद तक निराशाजनक यात्रा का सामना करना पड़ा, जिसमें दस साल की अवधि में केवल 30 प्रथम श्रेणी मैच शामिल थे। वह सफेद गेंद के नियमित खिलाड़ी भी नहीं थे।


यादव को पता है कि 32 साल की उम्र में वह खोए हुए समय की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन वह पछतावे से आगे बढ़ चुके हैं। इसके बजाय, वह अपनी ऊर्जा को अपनी टीम के लिए मैच जीतने में लगाना चाहते हैं। वह कहते हैं, "मैं अब ज्यादा नहीं सोचता, मैं बस वर्तमान में जीना चाहता हूं। मैं जो अगली गेंद फेंकता हूं वह सबसे महत्वपूर्ण होती है और यह मैच मैं अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मैच खेल रहा हूं। अगर रणजी नहीं, तो क्लब क्रिकेट। मुझे अब और उम्मीद नहीं है। अगर आईपीएल होता है, तो बहुत अच्छा। यह खेल मेरा फोकस है। मैं लंबे स्पेल में गेंदबाजी करना चाहता हूं और तेज गेंदबाजी करके अपनी टीम के लिए मैच जीतना चाहता हूं।"
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