दोहरा शतक जड़कर इतिहास रचने वाले फखर जमान कभी पाई-पाई को थे मोहताज
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पाकिस्तान के ओपनर फखर जमान ने शुक्रवार को जिम्बाब्वे के खिलाफ दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया। बाएं हाथ के बल्लेबाज ने पांच मैचों की सीरीज के चौथे वन-डे में नाबाद 210 रन की पारी खेली और सईद अनवर (194 रन) के 21 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा। सईद अनवर ने भारत के खिलाफ 1997 में चेन्नई के मैदान पर 194 रन की पारी खेली थी।
जमान पाकिस्तान की तरफ से दोहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं। इसके अलावा वह वन-डे क्रिकेट में दोहरा शतक जमाने वाले छठे बल्लेबाज हैं। जमान से पहले टीम इंडिया के रोहित शर्मा (3 बार), सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल और वेस्टइंडीज के खतरनाक बल्लेबाज क्रिस गेल दोहरे शतक जड़ चुके हैं।
वन-डे में दोहरा शतक जमाने वाले पहले पाकिस्तानी बल्लेबाज फखर जमान आज जिन बुलंदियों पर हैं, वह कभी इस मुकाम पर नहीं पहुंचते। इसके पीछे कई कारण हैं। बाएं हाथ के बल्लेबाज का बचपन काफी गरीबी में गुजरा। उन्हें बहुत ही कम उम्र में नौकरी करनी पड़ी।
नौकरी के साथ निजी जिंदगी में इतना परेशान रहे जमान
नौकरी के साथ-साथ क्रिकेट खेलने के तनाव के कारण जमान ने कई बार इस खेल को छोड़ने का मन बनाया। मगर एक मेंटर ने आकर उन्हें प्रोत्साहित किया और अब फखर जमान की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है। पाक बल्लेबाज की फैन फॉलोइंग विश्वभर में हो चुकी है।
हम आपको फखर जमान की निजी जिंदगी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो काफी प्रेरणादायी है। फखर की जिंदगी में खेल के प्रति समर्पण की भावना दिखती है, जिससे युवाओं को बहुत कुछ सीखने को जरूर मिलेगा।
जमान ने पाकिस्तान के गिलक्रिस्ट बनने का सपना देखा, आ गया बड़ा ट्विस्ट
फखर जमान का जन्म मर्दान के नजदीक छोटे से गांव कतलंग में हुआ। वह दिन-रात पाकिस्तान के एडम गिलक्रिस्ट बनने का सपना देखते थे। उनकी बाएं हाथ की बल्लेबाजी भी अपने आदर्श जैसी काफी आक्रामक थी। गिलक्रिस्ट के जैसे ही जमान भी गेंद को बाउंड्री लाइन के पार भेजने के सपने देख रहे थे। मगर अपना सपना पूरा करने से पहले ही पारिवारिक मुसीबतों ने युवा बल्लेबाज का तनाव बढ़ा दिया।
2007 की बात है जब फखर का परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। उनका पूरा परिवार पाई-पाई को मोहताज था। फखर की उम्र तब 17 वर्ष थी, जब उन पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई। लिहाजा युवा बल्लेबाज को नौकरी तलाशना पड़ी। तब उन्होंने पाकिस्तान नेवी में नाविक बनने का टेस्ट दिया। उन्होंने इस टेस्ट को पास किया और एक अच्छी नौकरी हासिल की।
हालांकि, फखर अपनी नौकरी से खुश नहीं थे। उन्होंने कहा था, 'मैं जो नौकरी कर रहा था, उससे ज्यादा खुश नहीं था। जमान ने नेवी में एक साल ट्रेनिंग की। वह सूर्योदय से पहले उठकर लंबी दौड़ लगाते थे। फिर वह स्कूल जाते थे और शाम को क्रिकेट का अभ्यास करते थे।'
फखर जमान को मिला ऐसा शख्स, जिसने बदल दी उनकी लाइफ
पीएनएस कर्साज में फखर जमान की मुलाकात नाजिम खान से हुई, जो पाकिस्तान नवल क्रिकेट एकेडमी के कोच थे। फखर ने क्रिकेट खेलने की अपनी इच्छा जाहिर की और नाजिम ने दोनों हाथ फैलाकर इसका स्वागत किया। फखर ने आजम को प्रभावित करने में ज्यादा समय नहीं लिया और अंतरराज्जीय अंडर-19 के मैच में अर्धशतक जमा दिया। इस पारी में उन्होंने चार छक्के जमाए थे।
नाजिम को विश्वास हो चुका था कि फखर जमान का करियर सर्विस में नहीं बल्कि खेलों में हैं। उन्होंने एक एप्लीकेशन लिखकर फखर को नाविक की ड्यूटी से रिलीज कराया और नेवी में बतौर पेशेवर खिलाड़ी के रूप में दाखिल कराया। फखर का परिवार इससे खुश नहीं था, लेकिन नाजिम ने उनका दृष्टिकोण बदल दिया।
एप्लीकेशन को मंजूरी मिली और 2008 में फखर नेवी में बतौर पेशेवर खिलाड़ी जुड़े। फखर का संघर्ष यही नहीं थमा। उनके प्रोफाइल में एक विशेष क्लॉज जोड़ा गया कि अगर वह क्रिकेटर के रूप में सफल नहीं हुए तो दोबारा उनका एडमिशन नाविक के रूप में किया जाएगा।
कई बार बनाया क्रिकेट छोड़ने का मन, कारण रहा कुछ ऐसा
आगे चलकर फखर ने कराची अंडर-19 और अंडर-23 में खेला और इसके बाद फर्स्ट क्लास लेवल पर उनका चयन हुआ। हालांकि, परिवार में आर्थिक तंगी और मैदान पर फेल होने के कारण कई बार फखर को अपने आप पर संदेह हुआ। वह कई बार क्रिकेट छोड़ने का मन बना चुके थे। मगर आजम खान उनके मेंटर बने। आजम ने फखर का हौसला बढ़ाया और उन्हें खेल जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। इस बात के लिए फखर आज भी आजम का शुक्रियाअदा करते नहीं थकते हैं।
फखर याद करते हैं, 'मैं सीनियर जिला टूर्नामेंट खेल रहा था और पहले तीन मैचों में केवल २५ रन बना पाया था। तब मैंने आखिरी बार क्रिकेट छोड़ने का मन बनाया था। आजम भाई ने मुझे कहा कि भले ही तुम बिना खाता खोले आउट हो या शतक जमाओ, मैं तुम्हें टीम से बाहर नहीं करूंगा। इससे मुझे विश्वास मिला और अगले तीन मुकाबलों में मैंने लगातार 150 रन की पारियां खेली।'
आजम ने फिर जमान को कराची की तरफ से खेलने के लिए कहा क्योंकि यहां से उनके प्रदर्शन पर ध्यान जाने की अधिक संभावना थी। 2011 में फखर जमान कराची लौटे। अगले साल पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेशनल डिफेंड क्रिकेट चैलेंज में डेब्यू किया, जो फोर्सेस के लिए विश्व कप जैसा होता है। फखर ने अपनी टीम को चैंपियन बनाया और पाकिस्तान कप के साथ स्वदेश लौटा।
जमान को लगा झटका, फिर ऐसे चढ़े सफलता की सीढ़ी का शिखर
यह फखर का नेवी के साथ अंतिम क्रिकेट असाइनमेंट था। 2013 में उन्होंने नेवी छोड़ी और घरेलू टीम हबीब बैंक लिमिटेड के साथ जुड़े। हालांकि, एक बार फिर फखर जमान की जिंदगी में ट्विस्ट आया क्योंकि उन्हें पाकिस्तान सुपर लीग के पहले संस्करण में नहीं चुना गया।
मगर पाकिस्तान कप में फखर को यूनिस खान के नेतृत्व वाली पैखतुनवा ने अपने साथ जोड़ा। बाएं हाथ के बल्लेबाज ने इस टूर्नामेंट में अपनी टीम के लिए पांच मैच खेले और 297 रन बनाए। फाइनल में फखर जमान ने 115 रन बनाए और मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता।
यहां से फखर जमान की जिंदगी ने नई करवट ली और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका सिक्का चला। फखर जमान ने चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया के खिलाफ फाइनल में शतक जमाकर विश्व क्रिकेट में डंका बजाया था।