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मनोहर का गुस्सा फूटा, श्रीनिवासन को बताया तानाशाह
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 04 Oct 2013 12:32 PM IST
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बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शशांक मनोहर ने बोर्ड अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की जमकर आलोचना करते हुए उन्हें तानाशाह कहा।
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मनोहर ने कहा कि आईपीएल में कथित भ्रष्टाचार के बाद श्रीनिवासन का अध्यक्ष पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। श्रीनिवासन एक तानाशाह की तरह हैं जिनका बोर्ड को साफ करने का कोई इरादा नहीं है और उन्होंने कुछ ही महीनों में बोर्ड की प्रतिष्ठा धूमिल कर दी है।
साथ ही मनोहर ने खुलासा करते हुए कहा कि जगमोहन डालमिया समेत बोर्ड के कई सदस्यों ने उनसे 29 सितंबर को बोर्ड की सालाना आम बैठक में श्रीनिवासन के खिलाफ अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने के लिए कहा था।
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श्रीनिवासन को तानाशाह बताते हुए मनोहर ने कहा, "वह अपनी टीम समेत सभी को बचा रहे हैं। वह नहीं चाहते कि यह गंदगी साफ हो। यदि मेरा बेटा श्रीनिवासन की जगह होता तो मैं उसे इस्तीफा देने के लिए कह देता।"
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उन्होंने कहा, "श्रीनिवासन एक तानाशाह हैं और सारी ताकत अपने पास रखना चाहते हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि उनका दामाद सिर्फ एक उत्साही क्रिकेटप्रेमी था। उनके वकील ने अदालत के समक्ष दलील दी कि श्रीनिवासन ने अपने दामाद को नहीं चुना था बल्कि उनकी बेटी ने उसे चुना था। यह हंसी की बात है।
बोर्ड में रहने का अधिकार नहीं
श्रीनिवासन पर बरसते हुए शशांक मनोहर ने कहा, "जो व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य का बचाव नहीं कर सकता उसे यह कहने का अधिकार नहीं है कि वह बोर्ड की जिम्मेदारी उठा लेगा। उन्हें अध्यक्ष पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा, "यदि आप के अंदर थोड़ा सा भी जमीर, आत्मसम्मान और बोर्ड की चिंता थी तो जब आपका दामाद गिरफ्तार हुआ था, तभी आपको इस्तीफा दे देना चाहिए था। लेकिन आपने ऐसा कुछ नहीं किया और परिणामस्वरूप बोर्ड की प्रतिष्ठा धूमिल हुई और लोगों का बोर्ड के ऊपर से भरोसा उठा।"
इस बीच मनोहर ने कहा कि उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि गुरुनाथ मयप्पन की चेन्नई सुपर किंग्स में भूमिका थी। उन्होंने कहा, "इस बात के काफी सबूत हैं कि मयप्पन चेन्नई टीम के टीम प्रिंसिपल थे और सच्चाई जल्द सामने आएगी।"
2008 से 2011 तक बीसीसीआई प्रमुख रहे मनोहर ने कहा कि बोर्ड के कुछ सदस्यों ने उनसे श्रीनिवासन के खिलाफ उतरने के लिए कहा था।
उन्होंने कहा, "डालमिया समेत कई सदस्यों ने मुझे आग्रह किया कि मैं वापस आऊं और चुनाव लडूं। मैं दो साल पहले बोर्ड को छोड़ चुका हूं और उसके बाद मैंने कभी दोबारा उसके परिसर में प्रवेश नहीं किया है। मेरा वापसी करने का कोई इरादा नहीं है।"