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Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   Champions Trophy 2025: 'Not confident about returning to Team India', Shami feared his career would be over

Champions Trophy: 'चोट के बाद टीम इंडिया में वापसी को लेकर आश्वस्त नहीं था', शमी को था करियर खत्म होने का डर

Thu, 20 Feb 2025 12:21 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 20 Feb 2025 12:21 PM IST
सार

शमी ने आईसीसी से कहा, 'विश्व कप के दौरान शानदार फॉर्म के बाद मुझे अचानक ही खुद को ऑपरेशन टेबल पर देखना पड़ा। उस शानदार फॉर्म के बाद चोटिल होना वास्तव में बेहद मुश्किल दौर था।'

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Champions Trophy 2025: 'Not confident about returning to Team India', Shami feared his career would be over
बुमराह और शमी - फोटो : PTI

विस्तार

भारत के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने खुलासा किया है कि टखने की चोट के बाद ऐसे क्षण भी आए जब उन्हें डर था कि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म हो जाएगा लेकिन देश के लिए फिर से खेलने की उनकी अटूट इच्छा ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नवंबर 2023 में वनडे विश्व कप फाइनल के दौरान शमी के टखने में चोट लग गई थी, जिसके लिए सर्जरी की जरूरत पड़ी। उनके बाएं घुटने में सूजन ने चीजों को और जटिल बना दिया और उन्हें 14 महीने तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर रहना पड़ा।
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'खुद को ऑपरेशन टेबल पर देखना पड़ा'
शमी ने आईसीसी से कहा, 'विश्व कप के दौरान शानदार फॉर्म के बाद मुझे अचानक ही खुद को ऑपरेशन टेबल पर देखना पड़ा। उस शानदार फॉर्म के बाद चोटिल होना वास्तव में बेहद मुश्किल दौर था। पहले दो महीनो में अक्सर मुझे संदेह हो जाता था कि क्या मैं फिर से खेल पाऊंगा या नहीं क्योंकि इस तरह की चोट और 14 महीने तक बाहर रहने से आपके हौसले पस्त हो सकते हैं।'
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'शमी की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफल वापसी'
इस 34 वर्षीय खिलाड़ी ने हालांकि इस महीने के शुरू में इंग्लैंड के खिलाफ दो टी20 और इतने ही वनडे मैच में खेल कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफल वापसी की। अब जसप्रीत बुमराह के चोटिल होने के कारण चैंपियंस ट्रॉफी में वह भारतीय गेंदबाजी के अगुआ हैं। शमी ने कहा, 'मेरा डॉक्टर से पहले सवाल यही था कि मुझे वापस मैदान पर लौटने में कितना समय लगेगा। डॉक्टर ने मुझसे कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता मुझे चलाना, फिर जॉगिंग कराना और उसके बाद दौड़ाना है। प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में खेलना तो अभी दूर की बात है।'
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शमी के लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण था
एक सक्रिय खिलाड़ी से बैसाखी पर निर्भर होने का दौर शमी के लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा यही सोचता रहता था कि मैं कब अपने पांव जमीन पर रख पाऊंगा। मेरे मन में कई तरह के विचार आ रहे थे। 60 दिनों के बाद जब उन्होंने मुझसे अपने पैर ज़मीन पर रखने के लिए कहा, तो आप मुझ पर विश्वास नहीं करेंगे, लेकिन मैं अपना पैर ज़मीन पर रखने से पहले कभी नहीं डरा था।'

'जैसे मैं दोबारा शुरुआत कर रहा हूं...'
शमी ने कहा, 'ऐसा लगा जैसे मैं दोबारा शुरुआत कर रहा हूं, जैसे कोई बच्चा चलना सीख रहा हो। मैं किसी तरह की मुश्किल आने को लेकर चिंतित था। इस बीच देश की तरफ से फिर से खेलने की अदम्य इच्छा शक्ति ने मुझे प्रेरित किए रखा।'
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