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बर्थडे स्पेशलः सौरव गांगुली को दादा बनाने वाले 5 लम्हें
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 08 Jul 2013 03:35 PM IST
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टीम इंडिया को अपनी कप्तानी में चरम पर पहुंचाने का श्रेय महेंद्र सिंह धोनी को जाता है। लेकिन प्रशंसकों से लेकर क्रिकेट पंडित तक, सभी मानते हैं कि टीम को जीत तक ले जाने का जज्बा सौरव गांगुली से मिला है। आज उन्होंने अपनी जिंदगी का 41वां पड़ाव पार किया है।
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दादा ने अब भले ही क्रिकेट से संन्यास ले लिया हो, लेकिन उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता। आक्रामक कप्तानी करने में माहिर गांगुली ने न सिर्फ अपने खिलाड़ियों में जोश भरा बल्कि टीम इंडिया को दुनिया के किसी भी मैदान पर जीत हासिल करने का जज्बा दिया।
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प्रशंसकों के अलावा आलोचक भी मैदान पर उनके आक्रामक अंदाज को बेहद पसंद करते थे। उन्हें टीम इंडिया को चैंपियन बनाने का श्रेय दिया जाता है। अपने समय में उन्होंने दुनिया के सफलतम कप्तान स्टीव वॉ से भी मोर्चा लिया था।
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महान क्रिकेटर ब्रायन लारा भी उनके अंदाज के बड़े प्रशंसक हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गांगुली के आक्रामक कप्तानी की जमकर तारीफ की थी।
आइए, आज हम 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' के उन पांच चुनिंदा क्षणों को याद करते हैं, जिसमें उनकी अगुवाई में टीम इंडिया ने कई नायाब जीत हासिल की और सौरव को दादा बना दिया।
सहारा कप में पाकिस्तान को पीटा
कनाडा में 1996-98 के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच पांच-पांच वनडे मैचों की द्विपक्षीय सीरीज सहारा कप खेला गया था। सहारा कप के दूसरे संस्करण (1997) में गांगुली ने अपनी अगुवाई में भारत को 4-1 से जोरदार जीत दिलाई थी।
इस सीरीज में पांच मैन ऑफ द मैच खिताब भारत को मिले। इनमें से चार कप्तान गांगुली के खाते में आए। सीरीज के दूसरे मैच में गांगुली ने अपने वनडे कैरियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 10 ओवर में 16 रन देकर चार विकेट झटके थे।
लॉर्ड्स में उतारी टी-शर्ट, आक्रामकता दिखाई
अपनी आक्रामक कप्तानी का लोहा मनवा चुके गांगुली ने लॉर्ड्स में भी जमकर जलवा दिखाया। 2002 में भारतीय टीम इंग्लैंड के दौरे पर थी और लॉर्ड्स में नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल मैच खेला जा रहा था। 326 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरे भारत के लिए युवराज सिंह और मुहम्मद कैफ ने यादगार प्रदर्शन करते हुए टीम को जीत दिलाई।
उसी समय लॉर्ड्स की बॉलकनी में मैच देख रहे गांगुली ने उत्साह में टी-शर्ट निकाल कर हवा में लहरा दिया। उन्होंने ऐसा एंड्रयू फ्लिंटॉफ को सबक सीखाने के लिए किया था। फ्लिंटॉफ ने भारत दौरे पर मैदान में टी-शर्ट निकाल कर हवा में लहराई थी।
ईडेन में थामा कंगारुओं का विजयी रथ
ऑस्ट्रेलियाई टीम 2000-2001 में टेस्ट क्रिकेट में लगातार 15 मैच जीतकर विजयी रथ पर सवार थी। कंगारू टीम का अगला दौरा भारत का था। तीन मैचों की सीरीज में स्टीव वॉ की अगुवाई में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने मुंबई में पहला टेस्ट आसानी से जीतकर सीरीज में बढ़त बना ली थी और ऐसा लग रहा था कि यहां पर आसानी से जीत हासिल कर लेंगे।
लेकिन कोलकाता के ईडेन गार्डंस में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के रिकॉर्डतोड़ साझेदारी के दम पर पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए भारत ने यह मैच जीत लिया। इसके बाद भारत ने चेन्नई टेस्ट भी जीतकर सीरीज 2-1 से अपने नाम कर लिया। कोलकाता टेस्ट जीतकर गांगुली की टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया के लगातार 16 जीत का रिकॉर्ड को तोड़ा।
ढाका की ऐतिहासिक जीत
1998 में ढाका में हुए इंडिपेंडेंस कप में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को पीटकर खिताबी जीत हासिल करना। बांग्लादेश की आजादी के 25 साल पूरे होने पर आयोजित इस टूर्नामेंट के तीन मैचों के फाइनल में भारत और पाक आमने-सामने थे। पहला मैच भारत ने आठ विकेट से जीत लिया।
दूसरा मैच पाक के नाम रहा जिसने भारत को इस मैच में छह विकेट से हरा दिया और चैंपियन टीम का फैसला तीसरे मैच से होना था। निर्णायक जंग में पाक ने पहले बल्लेबाजी करते हुए संशोधित 48 ओवर में 314 रन बनाए। भारत को 48 ओवर में ही 315 रन बनाने थे और उसने एक गेंद शेष रहते 316 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया।
2003 विश्व कप के फाइनल में पहुंचा भारत
गांगुली की अगुवाई में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2003 के विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, खिताबी जंग में भारत को ऑस्ट्रेलियाई चुनौती के आगे पस्त होना पड़ा।
1983 में पहली बार विश्व कप के फाइनल में पहुंचने के बाद भारत 20 साल के बाद फाइनल में पहुंचा था। कप्तानी के अलावा गांगुली बतौर बल्लेबाज भी खासे सफल रहे और तीन शतकों की मदद से 465 रन बनाए।