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अनुराग ठाकुर माफी मांगें या फिर जेल जाएं: सुप्रीम कोर्ट
टीम डिजिटल, अमर उजाला/ नई दिल्ली
Updated Thu, 15 Dec 2016 09:18 PM IST
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अनुराग ठाकुर
- फोटो : getty
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और लोढ़ा समिति के बीच चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर कि मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि अनुराग ठाकुर पर झूठे साक्ष्य पेश करने के आरोप साबित हो जाते हैं, तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। कोर्ट ने पहली दृष्टि में ठाकुर को इसका दोषी पाया। कोर्ट ने ठाकुर को बचाव से जुड़े दस्तावेज पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा।
कोर्ट ने अनुराग ठाकुर से पूछा कि आपका इरादा क्या है और अपना रुख भी साफ करें। जब एक बार उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुना दिया है, तो आप आईसीसी के पास न्यायिक हस्ताक्षेप के जुड़े सुझावों के लिए आईसीसी के पास क्यों गए। न्याय सलाहकार (अमिकस क्यूरी) गोपाल सुब्रह्मण्यम ने कहा कि आप न्यायालय को गुमराह करना चाहते हैं।
कोर्ट ने कहा कि अगर आप झूठे साक्ष्य के आरोपों से बचना चाहते हैं, तो आपको माफी मांगनी चाहिए। आप कोर्ट की सुनवाई में बाधा डाल रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी आपको कोर्ट के फैसले से असहमत होने का अधिकार देती है, उसको लागू होने से रोकने का अधिकार आपके पास नहीं है। उन्होंनी बीसीसीआई के वकील कबिल सिब्बल से दो टूक शब्दों में कहा, आपके क्लाइंट (अनुराग ठाकुर) को जेल चले जाना चाहिए।
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कोर्ट ने अनुराग ठाकुर से पूछा कि आपका इरादा क्या है और अपना रुख भी साफ करें। जब एक बार उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुना दिया है, तो आप आईसीसी के पास न्यायिक हस्ताक्षेप के जुड़े सुझावों के लिए आईसीसी के पास क्यों गए। न्याय सलाहकार (अमिकस क्यूरी) गोपाल सुब्रह्मण्यम ने कहा कि आप न्यायालय को गुमराह करना चाहते हैं।
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कोर्ट ने कहा कि अगर आप झूठे साक्ष्य के आरोपों से बचना चाहते हैं, तो आपको माफी मांगनी चाहिए। आप कोर्ट की सुनवाई में बाधा डाल रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी आपको कोर्ट के फैसले से असहमत होने का अधिकार देती है, उसको लागू होने से रोकने का अधिकार आपके पास नहीं है। उन्होंनी बीसीसीआई के वकील कबिल सिब्बल से दो टूक शब्दों में कहा, आपके क्लाइंट (अनुराग ठाकुर) को जेल चले जाना चाहिए।
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बीसीसीआई में होंगे बहुच बड़े बदलाव
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : SELF
न्याय सलाहकार गोपाल सुब्रह्मण्यम का कहना है कि अनुराग ठाकुर ने कोर्ट के आदेश को लागू होने से रोकने की कोशिश की। पहली नजर में यह कोर्ट की अवमानना का मामला दिखाई पड़ता है। शशांक मनोहर के हलफनामे में कहा कि ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट से आईसीसी अध्यक्ष होने के नाते राय मांगी, जबकि ठाकुर ने अपने हलफनामे में उनका जिक्र पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में किया था।
कोर्ट में आज इस मुद्दे पर सुनवाई की जाएगी। शुक्रवार के बाद इस कोर्ट में शीतकाल अवकाश तक सुनवाई नहीं होगी। इस मामले में बीसीसीआई का रवैया काफी अड़ियल रहा है और वो लोढ़ा समिति के सुझावों को लागू करने से बचता आया है। यदि बीसीसीआई में लोढ़ा समिति के सभी सुझावों को लागू कर दिया जाता है, तो प्रशासनिक तौर पर ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इसके अलावा बोर्ड के ज्यादातर अधिकारियों को बाहर का दरवाजा देखना पड़ सकता है। साथ ही क्रिकेट प्रबंधन नें भी बड़े बदलाव होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 21 अक्टूबर को लोढ़ा समिति को आदेश दिया को वो आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर से इस मामले पर हलफनामा मांगा था। ठाकुर के अलावा बोर्ड अधिकारी रत्नाकर शेट्टी पर भी झूठे साक्ष्य पेश करने के आरोप लगाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि लोढ़ा समिति के सुझावों के बाद बीसीसीआई का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा।
कोर्ट में आज इस मुद्दे पर सुनवाई की जाएगी। शुक्रवार के बाद इस कोर्ट में शीतकाल अवकाश तक सुनवाई नहीं होगी। इस मामले में बीसीसीआई का रवैया काफी अड़ियल रहा है और वो लोढ़ा समिति के सुझावों को लागू करने से बचता आया है। यदि बीसीसीआई में लोढ़ा समिति के सभी सुझावों को लागू कर दिया जाता है, तो प्रशासनिक तौर पर ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इसके अलावा बोर्ड के ज्यादातर अधिकारियों को बाहर का दरवाजा देखना पड़ सकता है। साथ ही क्रिकेट प्रबंधन नें भी बड़े बदलाव होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 21 अक्टूबर को लोढ़ा समिति को आदेश दिया को वो आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर से इस मामले पर हलफनामा मांगा था। ठाकुर के अलावा बोर्ड अधिकारी रत्नाकर शेट्टी पर भी झूठे साक्ष्य पेश करने के आरोप लगाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि लोढ़ा समिति के सुझावों के बाद बीसीसीआई का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा।