चल पड़ी है विकास और परिवर्तन की गाड़ी
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इस महीने मोदी सरकार का दूसरा वर्ष पूरा होने वाला है। सो हिसाब करने का समय आ गया है कि नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद देशवासियों ने क्या खोया, क्या पाया है। कितना परिवर्तन आया और कितना विकास हुआ। और क्या निराशा के वे बादल छंट गए हैं, जो 2014 में देश के आसमानों में काली चादर की तरह फैले हुए थे? निराशा के बादल अब नहीं दिखते, लेकिन उनकी जगह एक ऐसी बेसब्र आशा ने ले ली है कि इस वर्ष के समाप्त होने से पहले अगर उनके जीवन में परिवर्तन नहीं दिखा, तो लोग बहुत जल्दी निराश होने लगेंगे। परिवर्तन हर क्षेत्र में जरूरी है, पर सबसे ज्यादा जरूरी है रोजगार के क्षेत्र में। इसी क्षेत्र में मोदी सरकार की सबसे बड़ी विफलता दिखती है। मोदी के मंत्री जितना भी कहते फिरें कि भारतीय अर्थव्यवस्था की गति विश्व में सबसे तेज है, लेकिन यथार्थ कुछ और है। यथार्थ यह है कि जब किसी देश की अर्थव्यवस्था तेजी से दौड़ना शुरू करती है, तो देखते-देखते भारी विकास होने लगता है।
मैं पहली बार 1996 में चीन गई थी। तब चीनी अर्थव्यवस्था की विकास दर लगभग उतनी ही थी, जितनी आज भारत की है यानी साढ़े सात फीसदी। शंघाई में तब विश्व की 35 प्रतिशत टावर क्रेनें मौजूद थीं। टावर क्रेनों की मौजूदगी साबित करती है कि कहीं ऊंची इमारतों का निर्माण हो रहा है। वहां तब एक नई ऊर्जा दिखती थी। मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि भारत में अभी यह ऊर्जा नहीं दिख रही। मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने में अभी तक सफल नहीं हुई है। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने हालांकि कोशिश बहुत की और संभव है कि जल्दी परिणाम भी दिखने लगें।
मोदी सरकार की आर्थिक क्षेत्र में जितनी विफलता दिखती है, शायद उससे अधिक सफलता अन्य क्षेत्रों में दिखती है। विदेश नीति में एक नई दिशा है और यह भी साफ दिखता है कि मोदी ने दुनिया वालों की नजरों में भारत का सम्मान बहुत बढ़ाया है। वे दिन गए, जब भारत के प्रधानमंत्री इतना अदृश्य बनकर विदेश जाते थे कि किसी को पता तक नहीं लगता था। मोदी ने साबित करके दिखाया है कि भारत के प्रधानमंत्री की जगह विश्व के बड़े राजनेताओं में होनी चाहिए। पाकिस्तान के प्रति एक नई नीति दिखने लगी है, जिसका मुख्य संदेश यह है कि आप हमें जितना नुकसान पहुंचाओगे, उससे कहीं ज्यादा हम आपका नुकसान करेंगे। उम्मीद है कि इसे आधार बनाकर हमारे प्रधानमंत्री शीघ्र ही पाकिस्तान को कहेंगे कि कश्मीर भारत का अंदरूनी मसला है और इसमें आपको दखल देने की जरूरत नहीं है।
रही बातें सफाई और सामाजिक क्षेत्र में परिवर्तन लाने की, तो यहां मोदी सरकार ने दिल से कोशिश की है। सफाई अभियान देश भर में चला है और इसके फल भी कहीं-कहीं दिखने लग गए हैं। बेटी बचाओ योजना एक बहुत ही अच्छी कोशिश है और जन-धन योजना के लाभ भी जल्दी ही दिखने लग जाएंगे।
काश कि कोई ठोस पहल दिख गई होती शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में, जहां अब भी बुरा हाल है। सो परिवर्तन और विकास की गाड़ी चल तो पड़ी है, पर गति बढ़ाना बहुत जरूरी है, ताकि वे लोग रास्ते से हट जाएं, जो धर्म-मजहब के झगड़े छोड़कर यह साबित करने की कोशिश में लगे हुए हैं कि भारत अब भी वही पुराना भारत है, जो बेकार की बातों में उलझा रहता था।