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जनभागीदारी से होगा पंचायती राज मजबूत

Tue, 26 Apr 2016 06:34 PM IST
भूपेंद्र यादव
भूपेंद्र यादव Updated Tue, 26 Apr 2016 06:34 PM IST
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Panchayati Raj strenthen by public Participation
भूपेंद्र यादव

हमारे देश का लोकतंत्र जैसे-जैसे परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है, उसमें नागरिक भागीदारी की मांग ज्यादा बढ़ रही है। संविधान के अनुच्छेद 243 के 73वें संशोधन के द्वारा देश में पंचायती राज को सांविधानिक ताकत देने का कार्य किया गया। हर वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन इसे सांविधानिक मान्यता मिली। इस संसोधन में जहां एक ओर पंचायती राज को सांविधानिक दर्जा देने का कार्य किया गया, वहीं संविधान में 11 वीं अनुसूची में 29 विषयों को जोड़कर पंचायती राज के क्षेत्राधिकार में लाया गया। सामुदायिक विकास की अवधारणा एवं बिजली, पानी, गरीबी उन्मूलन, साक्षरता, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास एवं सार्वजनिक वितरण जैसे विषयों को पंचायती राज के अंतर्गत रखा गया।

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चौदहवें वित्त आयोग ने केंद्र सरकार से सिफारिश की, कि स्थानीय निकायों को उनकी बुनियादी सेवाओं पर अनुदान के लिए 2015 से 2020 तक की अवधि के लिए दो लाख 87 हजार करोड़ रुपये का अनुदान प्रस्तावित किया जाए। वित्त आयोग की सिफारिश का मूल आधार यह था कि पंचायती राज को मजबूत बनाने के लिए स्थानीय स्वशासी संस्थाओं को आर्थिक ताकत देना आवश्यक है। केंद्र सरकार ने वित्त आयोग की समीक्षा को स्वीकार करते समय इस वर्ष की बजट राशि में उसकी सिफारिशों के अनुरूप ही राशि का आवंटन किया, जिसका परिणाम यह होगा की देश की प्रत्येक पंचायत को आगामी पांच वर्षों में 80 लाख रुपये विकास कार्यों के लिए उपलब्ध होंगे।
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पंचायती राज के द्वारा हम विकास की राह में चुनौतियां भी कम नहीं है। ग्रामीण पंचायती राज में महिला एवं समाज के कमजोर तबके का प्रतिनिधित्व तो बढ़ा है, परंतु क्या वे निर्णयों में भागीदारी लेने में समर्थ हो पाए हैं? यह एक चुनौती भरा विषय है। विशेष रूप से जब ग्रामीण क्षेत्र में महिला सरपंच के स्थान पर उनके परिवार का कोई सदस्य उनके प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित होता है, तब यह प्रश्न उठता है की हम भागीदारी के प्रश्न को कितना प्रभावशाली बना पाएंगे? क्या हम ग्राम पंचायत में एक महिला सभा के भी प्रस्ताव को जोड़ने का प्रावधान कर सकते हैं, जिससे महिलाओं की भी विकास कार्यों में रूचि एवं भागीदारी बढ़ेगी।
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पंचायती राज एक ऐसा माध्यम है, जिसमें हम सरकार की विकास योजना को नीचे तक ले जा सकते हैं। हम अपने संविधान में इस बात की गारंटी तो देते हैं कि सभी नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए, परंतु आजादी के इतने लंबे समय के बाद भी बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को अभी तक पूरा नहीं कर पाए। इसका एक बड़ा कारण यही है कि अभी तक हमने जो व्यवस्था बनाई है, उसमें ऊपर से जो धनराशि दी जाती है या तो वह नीचे तक पहुच ही नहीं पाती या वह राशि सुसंगत योजना के अभाव में खर्च ही नहीं हो पाती है। केंद्र सरकार ने न केवल राशि का आवंटन किया है, बल्कि 'ग्राम उदय से भारत उदय' के अभियान को चलाकर सीधे पंचायतों से संवाद कायम करने का काम किया है, क्योंकि पंचायती राज को केवल परंपरागत प्रशासनिक तरीके से ही सफल नहीं बनाया जा सकता, बल्कि इसे जनभागीदारी का कार्यक्रम बनाना आवश्यक है।

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