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युवा खिलाड़ियों ने बदली तस्वीर, अभी और आगे जाना है
Thu, 26 Sep 2019 03:52 AM IST
मनोज चतुर्वेदी
मनोज चतुर्वेदी
मनोज चतुर्वेदी
Published by: मनोज चतुर्वेदी
Updated Thu, 26 Sep 2019 03:52 AM IST
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम
- फोटो : सोशल मीडिया
देश में आम तौर पर अगर किसी खेल की चर्चा होती है, तो वह क्रिकेट है। क्रिकेट से पहले हॉकी में भारत का दबदबा था। दूसरे खेलों में हमारे खिलाड़ी ज्यादा प्रभावित करते नजर नहीं आए थे। पर पिछले कुछ वर्षों में खेलों के ट्रेंड में बदलाव नजर आ रहा है। इसी का परिणाम है कि कई बार हमारे मुक्केबाज और पहलवान क्रिकेटरों से ज्यादा सुर्खियां बटोरते दिखे हैं। यह एक सकारात्मक बदलाव है।
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एक दशक पहले तक भी हमारे खिलाड़ी ओलंपिक खेलों और विश्व चैंपियनशिपों में भाग लेने के लिए जाते थे और खाली हाथ लौटते थे। कोई खिलाड़ी कांस्य पदक जीत लेता था, तो वह खेल में हमारी बड़ी उपलब्धि होती थी। अब हमारे खिलाड़ी दुनिया के दिग्गजों को टक्कर देने लगे हैं। यह बात हमें पिछले दिनों मुक्केबाजी विश्व चैंपियनशिप में अमित पंघाल के रजत पदक और मनीष कौशिक के कांस्य पदक जीतने के अलावा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में दीपक पूनिया के रजत पदक तथा राहुल अवारे, बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट के कांस्य पदक जीतने के दौरान देखने को मिली। पहलवान दीपक फाइनल में चोटिल होने की वजह से ईरान के पहलवान के खिलाफ खेलने ही नहीं उतर सके। ऐसे ही बजरंग पुनिया को सेमी फाइनल में विवादास्पद ढंग से हरा दिया गया। यानी विश्व कुश्ती में हमारा प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था।
निशानेबाजी, बैडमिंटन, वेटलिफ्टिंग और टेबल टेनिस में भी शानदार परिणाम देखने को मिले हैं। निशानेबाजी में नई पीढ़ी ने देशवासियों को अपनी क्षमता से हतप्रभ कर दिया है। भारत ने पिछले 33 साल में विश्व कप में 12 स्वर्ण पदक जीते थे। पर इस साल के पहले नौ महीने में ही हमारे निशानेबाजों ने 16 स्वर्ण सहित 22 पदकों पर निशाना साधा। विश्व कप फाइनल के लिए रिकॉर्ड 14 भारतीय निशानेबाज क्वालिफाई कर चुके हैं, तो नौ निशानेबाज अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक का टिकट भी कटा चुके हैं।
स्टार शटलर पीवी सिंधु की सफलता को कैसे भुलाया जा सकता है! वह पिछले दिनों नोजोमी ओकुहारा को हराकर विश्व चैंपियन बनीं। यह उपलब्धि पाने वाली वह पहली भारतीय हैं। टोक्यो ओलंपिक में हम उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद कर रहे हैं। इसी तरह बी साई प्रणीत ने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। हमने पहली बार एशियाई टेबल टेनिस चैंपियनशिप में चैंपियंस डिवीजन का स्वर्ण पदक जीता और साथियान ने पुरुष एकल में क्वार्टर फाइनल तक चुनौती पेश की। निशानेबाजी में सौरभ चौधरी और मनु भाकर ने झंडे गाड़े हैं, तो वेटलिफ्टिंग में 16 साल के जेरेमी लालरीनुंगा ने तमाम रिकॉर्ड स्थापित कर दिए हैं। जेरेमी ने क्लीन और जर्क में 163 किलो और स्नैच में 134 किलो के साथ कुल वजन में 297 किलो का रिकॉर्ड बनाया। यूथ ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट जेरेमी ने इस प्रदर्शन के दौरान 15 नए रिकॉर्ड बनाए, जिनमें छह अंतरराष्ट्रीय, तीन विश्व यूथ, तीन एशियाई यूथ और तीन राष्ट्रीय रिकॉर्ड हैं।
खेलों में इस बदले ट्रेंड की एक प्रमुख वजह युवा जोश का उभरना है। युवा पीढ़ी अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिपों में भाग लेते समय दबाव में नहीं आती। भारत को विश्व स्तर पर पिछले दिनों सफलताएं दिलाने वाले ज्यादातर खिलाड़ी 17 से 20 साल के थे। इस युवा पीढ़ी के सामने प्रमुख लक्ष्य अगले साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में देश को सम्मानजनक पदक दिलाना है। वह यदि पदकों की संख्या को दो अंकों में पहुंचा पाई, तो इस बदले ट्रेंड पर मोहर लग जाएगी।