{"_id":"57e3e8b24f1c1be555a8424c","slug":"yet-hope-remains-in-syria","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीरिया में अब भी उम्मीदें हैं","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
सीरिया में अब भी उम्मीदें हैं
जिम्मी कार्टर, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति
Updated Thu, 22 Sep 2016 07:50 PM IST
विज्ञापन
जिम्मी कार्टर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस महीने सीरिया में नए संघर्ष विराम की घोषणा एक अच्छी खबर है। पर सीरियाई लड़ाकों और उनके विदेशी समर्थकों के बीच इस समझौते को लेकर भरोसे की कमी (जैसा कि पहले भी एक बार देखा गया है) से इसके ध्वस्त होने की आशंका है। पहले से ही तनाव के काफी गंभीर संकेत दिख रहे हैं। सप्ताहांत में अमेरिका ने सीरिया सरकार के सैनिकों पर अचानक बमबारी की। बीते सोमवार को सीरियाई सेना ने यह घोषणा की कि वह अब समझौते का सम्मान नहीं करेगी और अलेप्पो पर हवाई हमले करेगी। मानव सहायता के एक काफिले पर बमबारी भी की गई।
विज्ञापन
फिर भी उम्मीद की वजहें हैं। अगर रूस और अमेरिका इस समझौते पर पहुंचने के लिए वार्ता की मेज पर आना चाहेंगे, तो इन झटकों से उबरा जा सकता है। मानवीय सहायता काफिले पर निशाना साधना युद्धापराध है, इससे भी रूस एवं अमेरिका को संघर्ष विराम के लिए एकजुट होना चाहिए। यदि सभी पक्ष एकजुट हों, तो इस समझौते को बचाया जा सकता है। अभी महत्वपूर्ण लक्ष्य है-नरसंहार पर रोक। विश्वस्त सूत्रों के अनुमान के मुताबिक, अब तक लगभग पांच लाख सीरियाई मारे गए हैं और बीस लाख से ज्यादा लोग घायल हैं। युद्ध से पहले सीरिया की आबादी करीब 2.2 करोड़ थी, जिनमें से आधे से अधिक विस्थापित हो गए। इन चौंकाने वाले आंकड़ों को देखकर यह मानना चाहिए कि युद्ध मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघन है और सीरिया का परम शत्रु।
विज्ञापन
यदि यह संघर्ष विराम लंबा खिंचता है, तो अमेरिका और रूस को आपसी विश्वास की कमी को दूर कर, जिसने बीतेे फरवरी में संघर्ष विराम को कमजोर किया था, काम के तरीके ढूंढने चाहिए। पिछले संघर्ष विराम के दो महीनों के भीतर ही दमिश्क, मध्य एवं उत्तरी सीरिया तथा अलेप्पो के आसपास के इलाकों में लड़ाई फिर शुरू हो चुकी थी। नतीजतन अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र द्वारा जिनेवा में प्रायोजित शांति वार्ता टल गई।
विज्ञापन
उससे पहले भी हालांकि एक गंभीर कोशिश की गई थी, जब अमेरिका और रूस ने अपने सहयोगियों पर लड़ाई खत्म करने और वार्ता को एक मौका देने के लिए दबाव बनाया था। पर एक अगस्त तक अंतरिम शासन के मुद्दे पर एक समझौते पर पहुंचने की अमेरिका और रूस की उम्मीद अवास्तविक थी। पांच वर्षों के नरसंहार के बाद, और विश्वास बहाली के किसी संकेत के बगैर सीरियाई दलों और उनके समर्थकों को सत्ता में साझेदारी के लिए दबाव बनाने को कुछ लोगों ने जहां धमकी के रूप में देखा, वहीं दूसरों ने इसे अपर्याप्त बताया। हैरानी नहीं कि वे हिंसा की तरफ मुड़ गए। इस महीने जिनेवा में जब वार्ता शुरू होगी, तब मुख्य प्राथमिकता नरसंहार रोकने की होनी चाहिए। साथ ही, शासन के महत्वपूर्ण सवालों से जुड़ी चर्चा टाल देनी चाहिए, जैसे-कब राष्ट्रपति बशर अल असद को पद छोड़ देना चाहिए या उन्हें हटाने के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है आदि।
संघर्ष विराम की नई पहल मौजूदा क्षेत्रीय नियंत्रणों को अस्थायी रूप से बेअसर कर सकती है। इसके अलावा, लड़ाकों द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में हालात को स्थिर करने के लिए कुछ उपायों पर सहमत हुआ जा सकता है, जिसमें मानवीय सहायता के निर्बाध पहुंच की गारंटी हो। अलेप्पो के नजदीक एक सहायता काफिले पर हमले को देखते हुए यह एक महत्वपूर्ण मांग है। इसमें हालांकि कम चुनौतियां नहीं हैं। विदेशी खिलाड़ी, जो सीरिया के विखंडन पर चिंतित होने के बजाय अपना हित देखते हैं, ऐसी स्थिति में खुश नहीं होंगे। रूस की दिलचस्पी भूमध्य बंदरगाह में है, ईरान लेबनान में हिजबुल्ला के साथ संपर्क चाहता है, तुर्की का प्रमुख लक्ष्य कुर्दों की महत्वाकांक्षा को कमजोर करना है, तो सऊदी अरब को सबसे ज्यादा चिंता अरब जगत में ईरान के पैर जमाने की कोशिश को रोकने को लेकर है। विभिन्न देशों के ये निजी हित पहले से ही कमजोर संघर्ष विराम के लिए खतरनाक हैं।
फिर भी नरसंहार रोकने और यथास्थिति बरकरार रखने से हार-जीत का यह खेल बिना नुकसान के खेल में बदल जाएगा। लड़ाके अपने महत्वपूर्ण हितों पर नहीं मानेंगे और न ही वे सहयोग या समझौते के लिए तैयार होंगे, खासकर तब, जब उनमें आपस में आत्मविश्वास है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच आपस में विश्वास की कमी है। मौजूदा स्थिति के तहत सीरियाई सरकार और विद्रोही, दोनों को कोई भी रियायत या समझौता नीलामी के रूप में महसूस होगा। हालांकि नरसंहार रोकने का प्रस्ताव आकर्षक हो सकता है। कम से कम इसे खारिज करना तो मुश्किल होगा ही। ये उपाय वहां काम नहीं कर सकते, जहां इस्लामिक स्टेट और अन्य आतंकी संगठनों का कब्जा है। लेकिन यदि मुल्क के बाकी इलाकों में हत्याएं रुकती हैं, तो उनके खेमे को लड़ाकों को उन्हें छोड़ने के लिए प्रलोभन दिया जा सकता है और वे उन इलाकों का रुख करेंगे, जहां जीवन की बेहतर स्थितियां हैं। यह आतंकियों को पराजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।
अमेरिकी-रूसी नेतृत्व इस दृष्टिकोण पर काम करने के लिए गंभीर है। हर पक्ष को अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को इसके लिए राजी करना होगा। अकेले प्रयास पर्याप्त नहीं होगा। सीरिया के लोगों को अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए और स्पष्ट रूप से कहना चाहिए कि हत्याएं बंद करो। पिछले पांच वर्षों के दौरान सीरियाई समाज मानवतावादी, मानवाधिकार और शांति बहाली जैसी पहलों पर काम करने वाले संगठनों के साथ एकजुट हुए हैं, उन्हें हत्याएं रोकने के खिलाफ भी खड़ा होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को इसमें उनका साथ देना चाहिए। हत्याएं रोकने के लिए जनता का उभार सीरियाई लड़ाकों और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को इसे संज्ञान में लेने और उचित कदम उठाने पर मजबूर करेगा। हत्याएं रुकने पर ही सीरियाई अपनी खोई गरिमा हासिल करेंगे।