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टेम्स की तरह साफ होगी यमुना

Fri, 15 Mar 2013 09:52 PM IST
Updated Fri, 15 Mar 2013 09:52 PM IST
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yamuna will be clean as thames river

यमुना रक्षक दल के साथ सफल समझौता कर चुके केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत का कहना है कि गंगा-यमुना को टेम्स जैसी साफ-सुथरा तभी बनाया जा सकता है, जब राज्यों का सहयोग मिले। इस पूरे मुद्दे पर विजय गुप्ता ने उनसे बातचीत की -

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प्र- प्रयमुना की स्वच्छता से जुड़े आंदोलनकारियों के साथ समझौता तो हो गया, इस पर अमल कब तक हो पाएगा?
यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का काम राज्यों को करना है, खासकर हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश को। केंद्र सरकार तो इस योजना में तेजी लाने और इनमें आपसी समन्वय का ही काम करा सकती है, जिसमें वह पीछे नहीं हटेगी।
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प्र- यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए करीब दो दशक पहले कार्ययोजना शुरू की गई थी। लगभग तीन हजार करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद यमुना पहले से ज्यादा मैली क्यों दिखती है?
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ऐसा नहीं है कि यमुना की सफाई की दिशा में कोई काम ही न हुआ हो। इस दौरान दिल्ली की आबादी भी तो तेजी से बढ़ी है। इसलिए इस कार्ययोजना के नतीजे दिख नहीं रहे। चूंकि यमुना का ज्यादातर पानी पीने और खेती के लिए इस्तेमाल होने लगा है और उसमें गंदे नालों का ही पानी जा रहा है, इसलिए वह मैली दिखती है।

प्र- ऐसे में यमुना को निर्मल बनाने का सरकार के पास क्या उपाय है?
नदियों में शहरों का गंदा पानी जाने से रोकना होगा। इसके लिए पहले से काम चल रहा है। हमारा मुख्य ध्यान यमुना में पानी की उपलब्धता बढ़ाना है। इसके लिए दो कमेटियां बनी हैं। केंद्रीय जल आयोग के चेयरमैन की अध्यक्षता में बनी कमेटी यमुना पर बन रहे लखवार व्यासी, किसाउ और रेणुका बांध परियोजनाओं पर तेजी से काम करने पर गौर करेगी। दूसरी कमेटी मंत्रालय के परियोजना आयुक्त की अध्यक्षता में बनी है, जो उत्तराखंड तथा हिमाचल में यमुना और उसकी सहायक नदियों पर झीलें बनाने की संभावना तलाशेगी, ताकि बारिश के पानी को इन झीलों में रोका जा सके। हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी ऐसी बड़ी झीलें बनाने की संभावना तलाशी जाएगी, जहां बरसात के दौरान उफनती यमुना के पानी को पंपों के सहारे जमा किया जा सके। इससे उस इलाके का भू-जल स्तर ऊपर बढ़ेगा, और नदी में पानी घटने पर उसे फिर यमुना में डाला जा सकेगा। हम वही प्रयोग करना चाहते हैं, जो टेम्स और डेन्यूब नदियों के लिए किया गया है।

प्र- जब पहले की कार्ययोजना का लाभ नहीं मिला, तो नई योजना की सफलता की गारंटी क्या है?
केंद्र सरकार ने दीर्घकालिक नीति बनाई है, जिसे संबंधित राज्यों के साथ मिलकर शुरू किया जाएगा। इसके तहत मंत्री और अधिकारियों की अलग-अलग कमेटियां बनाई गई हैं, जिनमें पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी भी होंगे। एक कमेटी विभिन्न मंत्रालयों की भी बनाई गई है, जिसमें कृषि, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और जल संसाधन मंत्रालय आदि हैं। ये कमेटियां नदियों को प्रदूषण मुक्त कराने की दिशा में कार्य करेंगी।


प्र- आबादी के बढ़ने और नदियों का प्रवाह कम होने से पेयजल की किल्लत बढ़ रही है। इस दिशा में सरकार क्या कर रही है?
पेयजल की उपलब्धता के मामले में भी केंद्र ने एक नीति बनाई है, जिसके तहत बेसिन का ट्रीटमेंट और मैपिंग कराने का प्रस्ताव है। अभी तक सरकार ने 38 जिलों को चिह्नित किया है, जहां के जल भंडारण क्षेत्रों और नदियों की सैटेलाइट से मैपिंग कराकर उसके आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। उसी के अनुरूप जल भंडारण पर काम किया जाएगा।

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