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AI: कृत्रिम मेधा की दुनिया में वर्ल्डकॉइन, एजेंसियों को सतर्क होने की जरूरत, स्पष्ट नीतियों की दरकार

Arvind Kumar Mishra अरविंद कुमार मिश्रा
Updated Sat, 26 Aug 2023 07:01 AM IST
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सार
यह दावा किया जा रहा है कि वर्ल्डकॉइन का इस्तेमाल लोगों के जीवन में कृत्रिम मेधा की राह आसान बनाएगा।
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Worldcoin crypto and artificial intelligence agencies need to be alert clear policies needed
Artificial Intelligence - फोटो : Istock

विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कृत्रिम मेधा की दुनिया में वर्ल्डकॉइन की दस्तक जितनी रोमांचक है, उतनी ही रहस्यमयी भी। टूल फॉर ह्यूमैनिटी नामक कंपनी ने भारत समेत 20 देशों में वर्ल्डकॉइन प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। इसके सह-संस्थापक चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपेनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन हैं। इसे वैश्विक स्तर पर एक वर्चुअल आईडी विकसित करने का प्रयास बताया गया है। दावा है कि इससे कृत्रिम मेधा पर टिकी सेवाओं का बिजनेस मॉडल खड़ा होगा। इस वर्चुअल आईडी को हासिल करने वाले व्यक्ति को 25 क्रिप्टो करेंसी (लगभग 50 अमेरिकी डॉलर) मुफ्त दिए जा रहे हैं।



सैम ऑल्टमैन ने विगत 24 जुलाई को लॉन्च करते समय इसे मानवता का कदम बताते हुए दावा किया कि दुनिया के हर शख्स की डिजिटल आईडी बनाएंगे। वर्ल्डकॉइन का इस्तेमाल लोगों के जीवन में कृत्रिम मेधा की राह आसान बनाएगा। इस वर्चुअल आईडी के सहारे यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) की व्यवस्था खड़ी करने के तर्क दिए जा रहे हैं। एक डिजिटल आईडी से हर शख्स को कृत्रिम मेधा सेवाओं पर तय आमदनी कैसे मिलेगी? इस पर कंपनी का कहना है कि भविष्य की आर्थिक गतिविधियों में एआई (कृत्रिम मेधा) और इंटरनेट के एडवांस वर्जन वेब-3 की अहम भूमिका होगी। ऐसे में एआई आधारित सेवाओं के लिए वर्चुअल आईडी की दरकार है। कंपनी ने इस वर्चुअल आईडी पर एक्टिवेट होने वाला वर्ल्डएप वॉलेट भी पेश किया है।


वर्ल्डएप में कोई भी व्यक्ति पैसे रखने के साथ दुनिया के किसी भी कोने में पैसे भेज सकता है। एलन मस्क भी एआई के जरिये यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) के पैरोकार रहे हैं। हर व्यक्ति को एआई पर चलने वाली आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर आय की गारंटी देने जैसे दावों के बाद कई जगह वर्ल्डकॉइन सेंटर पर लंबी कतारें लगी हैं। पर कंपनी जिस आक्रामक तरीके से इसे युवाओं के बीच लेकर जा रही है, उससे कई देशों के कान खड़े हो गए हैं। सवाल है कि क्या भविष्य में वर्ल्डकॉइन आईडी एआई से जुड़ी किसी भी आर्थिक गतिविधि के आदान-प्रदान का सबसे बड़ा जरिया होगी। हालांकि फ्रांस, जर्मनी और केन्या ने इस परियोजना पर जांच बैठा दी है और ब्रिटेन भी सख्ती से पेश आ रहा है। इनका कहना है कि वर्ल्डकॉइन के लिए जिस तरह लोगों का बायोमीट्रिक डाटा जुटाया जा रहा है, वह निजता पर हमला है।

वर्ल्डकॉइन तैयार करने के लिए आंखों की पुतलियों (आइरिस) की पहचान कैद की जाती है। लोगों को वर्ल्डकॉइन आईडी बनवाने के बदले कुछ क्रिप्टो फ्री में दिए जा रहे हैं। इंडोनेशिया में नकदी और दूसरे उपहार दिए जाने की खबर है। निजता में दखल के आरोप लगने पर कंपनी ने सफाई दी कि पुतलियों की इमेज से आइरिस कोड जनरेट होते ही इमेज डिलीट हो जाती है और पर्सनल डाटा इन्क्रिप्टेड फॉर्मेट में रखा जाता है। लेकिन लोगों के बायोमीट्रिक डाटा को कंपनी क्यों और कैसे प्रोसेस करेगी, यह साफ नहीं है।

वर्ल्डकॉइन के जरिये क्रिप्टो करेंसी को नया जीवन देने की कोशिश की जा रही है, जबकि अभी क्रिप्टोकेरेंसी को लेकर कोई ग्लोबल फ्रेमवर्क नहीं है। अमेरिका के कुछ राज्यों में इसे कानूनी मान्यता है, तो यूरोपीय संघ में बुनियादी रेगुलेशन विकसित कर इसे टैक्स के दायरे में लाया गया है। कनाडा ने भी क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित किया है। ब्रिटेन में फाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी ने नियम बनाए हैं। लेकिन भारत में अभी यह वर्चुअल करेंसी रेगुलेशन के दायरे में नहीं है और लोग अपने जोखिम से इसमें निवेश करते हैं। क्रिप्टो करेंसी ऐंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021 में पेश किया जाना था, पर मानसून सत्र में भी इसे पेश नहीं किया जा सका। हालांकि वित्तमंत्री ने पिछले बजट में डिजिटल करेंसी पर टैक्स लगाने की घोषणा की, तो इसे वर्चुअल करेंसी को मान्यता के तौर पर देखा गया।

बायोमीट्रिक डाटा की हैकिंग से जुड़ी आशंकाओं को दरकिनार नहीं किया जा सकता। इसकी दस्तक पर जहां एजेंसियों को सतर्क होने की जरूरत है, वहीं हमें जल्दी ही कृत्रिम मेधा और क्रिप्टो से जुड़ी स्पष्ट नीतियां बनानी होंगी।

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