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स्कूली बच्चे जैसा बर्ताव

Sun, 08 Jun 2014 07:34 PM IST
सहीराम
सहीराम Updated Sun, 08 Jun 2014 07:34 PM IST
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work as school children

याद है, नवाज शरीफ ने एक बार मनमोहन सिंह जी के बारे में कहीं यह कहा था कि वह देहाती औरत की तरह व्यवहार करते हैं। तब मनमोहन सिंह हमारे प्रधानमंत्री थे और मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद के लिए दौड़ बस शुरू ही की थी। अब कुछ ऐसा ही इधर इमरान खान ने कर दिया है। उन्होंने कहा है कि इंडिया में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के साथ स्कूली बच्चे जैसा व्यवहार किया गया। वह तो नवाज शरीफ ने मनमोहन सिंह को देहाती औरत कह दिया था, लेकिन अगर वह उन्हें मास्टर टाइप जैसा कुछ देते, तो मनमोहन सिंह निश्चय ही बहुत खुश होते कि चलो, किसी ने तो उनके इल्म की कद्र की। लेकिन पता नहीं नवाज शरीफ साहब इस बात से कितना खुश होंगे कि इमरान खान ने उनकी तुलना स्कूली बच्चे से कर दी।

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इससे कम से कम एक बात तो साबित होती है कि पाकिस्तान में स्कूल भी होते हैं और बच्चे स्कूल जाते भी हैं। वरना हमारे यहां तो यही माना जाता है कि पाकिस्तान में सिर्फ मदरसे होते हैं। अब इमरान खान साहब को चाहे कितना ही तालिबान समर्थक क्यों न कहा जाए, पर उनके जहन में मदरसे नहीं, स्कूली ही हैं-यह तय है। अलबत्ता यह बताया गया कि नवाज शरीफ जब हमारे प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में आए थे, तो सेना की आज्ञा लेकर ही आए थे। ऐसे में इमरान खान को यह जरूर बताना चाहिए कि आर्मी की परमिशन से चलने वाले हुक्मरान को क्या कहते हैं। क्योंकि स्कूली बच्चों को तो आर्मी की परमिशन की शायद वैसे भी जरूरत नहीं होती होगी। हां, तालिबान जरूर यह चाहते होंगे कि स्कूली बच्चे भी उनकी वैसे ही परमिशन लें, जैसे नवाज शरीफ ने आर्मी की परमिशन ली। वरना उनका हाल मलाला जैसा हो सकता है।
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खैर, जैसे नवाज शरीफ फौज से पंगा नहीं लेना चाहते, वैसे ही इमरान खान साहब भी नहीं लेना चाहते होंगे। पर वह पाकिस्तान के नरेंद्र मोदी जरूर बनना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने कहा है कि भारत में नवाज शरीफ के साथ स्कूली बच्चे जैसा बर्ताव हो रहा था।
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