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दूर है महिला समानता की मंजिल

Fri, 01 Sep 2017 10:06 AM IST
सुभाषिनी सहगल अली
सुभाषिनी सहगल अली Updated Fri, 01 Sep 2017 10:06 AM IST
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Women equality is far
सुभाषिनी सहगल अली

जिस दिन सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक की प्रथा को असांविधानिक घोषित किया, उस दिन ऐसा लगा कि महिला अधिकार के जितने पक्षधर भारतीय और खासतौर से भारतीय पुरुष हैं, उतने दुनिया में और कहीं हो ही नहीं सकते। लोग उछल-उछल कर लड्डू  बांट रहे थे और मुस्लिम महिलाओं की खुशनसीबी पर अपनी पीठ थपथपा रहे थे। समस्त महिला आंदोलनकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया और उन मुस्लिम महिलाओं और मुस्लिम महिला संगठनों का अभिनंदन किया, जिन्होंने बड़ी हिम्मत के साथ यह लड़ाई लड़ी थी। तमाम महिलाओं में इसकी उम्मीद पैदा हुई कि हर समुदाय की महिलाओं के अंदर मौजूद असमानता दूर हो जाएगी और ऐसे कानून बन जाएंगे, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

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दुर्भाग्यवश अगले कुछ दिनों के घटनाक्रम ने इन तमाम आशा और उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया। विगत 25 अगस्त को हरियाणा के पंचकूला में सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष एक बलात्कारी को हाजिर होना था। वह केवल बलात्कारी ही नहीं बल्कि हत्या का भी आरोपी था। ऐसे लोगों को अमूमन हथकड़ी पहनाकर, पुलिस हिरासत में न्यायालय के सामने पेश किया जाता है। लेकिन यह अपराधी एक बाबा था, जिसे पिछले साल अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने 'हिंदू रत्न' की उपाधि से सम्मानित किया था। हरियाणा सरकार के मंत्री और नेता उसके पैर छूते थे। दो मंत्रियों ने हाल ही में उनके आश्रम तक जाकर 50-50 लाख रुपये भी दिए थे। इस अपराधी के एक लाख से अधिक अनुयायियों को न्यायालय के सामने जमा होने दिया गया और हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सीधे-सादे भक्त हैं, जिनको सरकार खिलाएगी।
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अपराधी दो सौ गाड़ियों का काफिला लेकर न्यायालय पहुंचा। गाड़ियों में हथियार भी मौजूद थे। अब बताया जा रहा है कि अपराधी हिंसक भीड़ का इस्तेमाल अपने भाग निकलने के लिए करना चाहता था। पर इसकी आशंका तो सरकार ने अपनी करतूतों से पैदा की। अगर न्यायालय का रख सख्त न होता और कछ प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन न करते, तो जो कुछ उस दिन चंडीगढ़-पंचकूला में हुआ, उससे भी अधिक होता और शायद अपराधी भाग भी जाता। करीब चालीस मौतों और करोड़ों के नुकसान के बाद अब उसे बीस साल की सजा सुनाई गई है। पिछले पंद्रह साल से न्याय के लिए लड़ने वाली बलात्कार की शिकार वे दो महिलाएं अब शांति की नींद सो रही होंगी।
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यह मामला चल ही रहा था की सर्वोच्च न्यायालय को उस बच्ची की याद आई, जिसने चार साल पहले आसाराम के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज किया था, जिसकी सुनवाई अभी तक शुरू नहीं हुई है। इस अपराधी के समर्थक भी बड़ी कुर्सियों पर बैठे हैं। वह लड़की अपने घर में पांच साल से कैद है, क्योंकि अपराधी के खिलाफ गवाही देने वाले दो लोगों की हत्या हो चुकी है। अब उसके दिल में उम्मीद जागी है कि शायद इस अपराधी को भी जल्द सजा होगी।


इस बीच वैवाहिक बलात्कार को अपराध मानकर उसके खिलाफ कानून बनाने की मांग फिर चर्चा का विषय बन गई है। इस पर आश्चर्यजनक टिपण्णियां की गई हैं। एक केंद्रीय मंत्री के पति ने यहां तक कह दिया है कि अगर यह कानून पारित हो गया, तो संसद में कम और जेल में अधिक पुरुष दिखाई देंगे।

महिला समानता की मंजिल अभी दूर है। रास्ता तय करने के लिए सबसे अधिक हिम्मत महिलाओं को ही जुटानी होगी।

-माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य

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