{"_id":"6477fc7af82f54b86c0333b6","slug":"wmo-report-global-temperature-rising-to-new-records-ocean-warming-melting-of-glaciers-extreme-weather-changes-2023-06-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौसम: नए रिकॉर्ड की ओर वैश्विक तापमान, चरम परिवर्तनों की घोर आशंका","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
मौसम: नए रिकॉर्ड की ओर वैश्विक तापमान, चरम परिवर्तनों की घोर आशंका
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो :
iStock
विस्तार
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले पांच वर्ष वैश्विक तापमान के सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगे। 'ग्लोबल एनुअल टू डिकेडल क्लाइमेट अपडेट, 2023-2027' शीर्षक से डब्ल्यूएमओ की नई रिपोर्ट में अगले पांच वर्षों के लिए जो भविष्यवाणियां की गई हैं, वे भयानक हैं : जैसे नए रिकॉर्ड तक तापमान का बढ़ना, समुद्र का गर्म होना, समुद्री जल का अम्लीकरण, ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना, समुद्र स्तर में वृद्धि, और मौसम में चरम स्तर तक परिवर्तन। रिपोर्ट में इस तरह के चरम परिवर्तनों की 98 प्रतिशत तक आशंका जताई गई है।
सबसे आश्चर्यजनक बात है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने का लक्ष्य अगले पांच वर्ष में ही टूट जाएगा। ऐसे वक्त में जब संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं से लेकर राष्ट्रीय सरकारें और जलवायु प्रबंधन की नीतियां तथा कार्यक्रम बनाने में जुटे वैज्ञानिक तक यत्न कर रहे हैं कि सृष्टि के तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं बढ़ने दिया जाए, डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट सबको सन्न कर जाती है और विशेषज्ञों की आशाओं पर पानी फेर जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 से 2027 के बीच प्रत्येक वर्ष पूर्व-औद्योगिक औसत (1850-1900) की तुलना में 1.1-1.8 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म होगा। इन वर्षों में से किसी एक के वार्षिक औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस को पार करने की 66 प्रतिशत आशंका है।
डब्ल्यूएमओ के महासचिव प्रोफेसर पेटेरी तालस का कहना है, 'इस रिपोर्ट का आशय यह नहीं कि हम पेरिस समझौते में निर्दिष्ट 1.5 डिग्री सेल्सियस के स्तर को स्थायी रूप से पार कर लेंगे, जो कई वर्षों में दीर्घकालिक गर्माहट को संदर्भित करता है। डब्ल्यूएमओ चेतावनी दे रहा है कि हम बढ़ती आवृत्ति के साथ अस्थायी आधार पर 1.5 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर लेंगे।'
डेढ़ डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार करने का 'अस्थायी आधार' बताकर महासचिव बेशक डर को थोड़ा कम कर रहे हैं, लेकिन इसके बारे में वह कोई ठोस तर्क नहीं देते हैं। तापमान अबाध रूप से लक्ष्य के आगे नहीं बढ़ेगा, इसकी भी कोई तार्किक गारंटी नहीं हो सकती। हां, तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तापमान के लक्ष्य से ऊपर पहुंचने के संकेत देती है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार, एक वर्ष में 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने या बढ़ने की आशंका नाटकीय रूप से बढ़ गई है। वर्ष 2015 में ऐसी आशंका लगभग शून्य थी, 2017 से 2021 तक यह 10 प्रतिशत थी। लेकिन अब यह बढ़कर 66 प्रतिशत हो गई है।
ब्रिटिश मौसम विज्ञान कार्यालय के वैज्ञानिक डॉ. लियोन हरमनसन के अनुसार, 'वैश्विक तापमान में वृद्धि जारी रहने की भविष्यवाणी हमें उस जलवायु से और आगे ले जाती है, जिसके हम आदी हैं।' जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, समुद्री बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने में तेजी आती है, दुनिया भर में वर्षा की दर में परिवर्तन आता है, बाढ़ और सूखे का कुचक्र चलता है, समुद्र का स्तर बढ़ता है, चरम मौसमी घटनाएं बढ़ती हैं और वनों में आग लगने की घटनाएं उग्र होने लगती हैं।
अगले पांच वर्षों के वैश्विक दृष्टिकोण से परे डब्ल्यूएमओ की यह रिपोर्ट कई अन्य संभावित क्षेत्रीय प्रभावों पर भी प्रकाश डालती है। उदाहरण के लिए, 2023 से 2027 तक लगभग पूरे विश्व में शीत ऋतु सामान्य से अधिक गर्म होने वाली है और शीतकाल में आर्कटिक क्षेत्र का तापमान वैश्विक औसत तापमान से तीन गुना ज्यादा बढ़ जाने का अनुमान है। सर्दियों के महीनों में विश्व के शेष हिस्सों की तुलना में आर्कटिक कितना गर्म होगा, यह वास्तव ने बहुत बड़ी चिंता का विषय है।
डब्ल्यूएमओ मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के अनुमानित निकट-भविष्य के प्रभावों की एक झलक प्रदान करने के लिए और जलवायु प्रभावों को प्राकृतिक रूप से होने वाली अल नीनो जैसी घटनाओं से जोड़ने के लिए वार्षिक आधार पर रिपोर्ट तैयार करता है। इस रिपोर्ट से पर्यावरण विशेषज्ञों, जलवायु चिंतकों, वैज्ञानिकों और नीति निर्धारकों से लेकर आम लोगों तक में हलचल होती है। इस बार की रिपोर्ट तो अद्भुत हलचल पैदा करने वाली है। संभव है कि इस वर्ष नवंबर-दिसंबर में दुबई में होने वाली संयक्त राष्ट्र की 28वीं जलवायु कॉन्फ्रेंस में कुछ नई गर्माहट पैदा हो।
डॉ. तालस कहते हैं, 'आने वाले महीनों में एक वार्मिंग अल नीनो के उभरने की आशंका है और यह मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर वैश्विक तापमान को अज्ञात क्षेत्र में धकेल देगा। स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन, और पर्यावरण के लिए इसके दूरगामी प्रभाव होंगे। हमें तैयार रहने की आवश्यकता है। अवश्य ही सृष्टि का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की लक्ष्मण रेखा से पार होने की आशंका निरंतर बढ़ रही है, लेकिन कई विशेषज्ञों ने उस सीमा को स्थायी रूप से पार करने से बचने के लिए पहले से ही रास्ते तैयार कर लिए हैं।' लेकिन सवाल उठता है कि बचने के कौन-से रास्ते तैयार किए गए हैं, और 1.5 डिग्री सेल्सियस को 'अस्थायी' बनाए रखने के कौन-से तैयार उपाय हैं, इस बारे में डब्ल्यूएमओ के महासचिव ने खुलकर नहीं बताया।
जलवायु परिवर्तन पर अंतर राजकीय पैनल (आईपीसीसी) ने अप्रैल, 2022 में अपनी छठी रिपोर्ट में बताया था कि ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में बड़े परिवर्तनों की आवश्यकता होगी, जैसे जीवाश्म ईंधन के उपयोग में भारी कमी, व्यापक विद्युतीकरण, वैकल्पिक ईंधन (जैसे हाइड्रोजन), उच्च ऊर्जा दक्षता, आदि।
वैसे इस तरह के सुझाव और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की संस्तुतियां बार-बार सामने आती रहती हैं, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदायी ऊर्जा के चलताऊ संसाधनों को छोड़कर स्वच्छ ऊर्जा संसाधनों पर पूर्ण रूप से निर्भर होना अभी एक स्वप्न ही बना हुआ है। ऊर्जा के स्वच्छ वैकल्पिक संसाधनों को लागू करना राष्ट्रीय सरकारों के हाथ में है और उनसे अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन कराया जा सके, अभी तक यह असंभव बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के पास इतनी शक्ति नहीं कि दुनिया के देशों को जलवायु हितों के अनुरूप कार्यक्रम लागू करने के लिए बाध्य कर सके।
-प्रोफेसर एमेरिटस, पर्यावरण विज्ञान, जी बी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय।