छोटे आयकरदाताओं की बजट से अपेक्षाएं

जयंतीलाल भंडारी Updated Mon, 08 Feb 2016 08:40 PM IST
विज्ञापन
Wish of small income tax payer

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
इन दिनों देश भर के नौकरीपेशा और छोटे आयकरदाता वित्त मंत्री अरुण जेटली से वर्ष 2016-17 के बजट में आयकर राहत की अपेक्षा कर रहे हैं। वस्तुत: इस समय व्यक्तिगत आयकर छूट का दायरा एक तो आयकरदाताओं को महंगाई से राहत देने के लिए बढ़ाया जाना चाहिए, और दूसरे, आयकरदाताओं की क्रयशक्ति बढ़ाकर मांग में वृद्धि करने के लिए। अभी देश में आयकरदाताओं की संख्या करीब साढ़े तीन करोड़ है, जो कुल आबादी का करीब तीन प्रतिशत है। इनमें से 90 फीसदी करदाता उस श्रेणी में आते हैं, जिनकी कर योग्य आय पांच लाख रुपये वार्षिक तक है। कुल आयकर संग्रह में इस श्रेणी की आयकर हिस्सेदारी 10 फीसदी ही है। यह वर्ग आयकर राहत की जरूरत अनुभव कर रहा है। नौकरीपेशा आयकरदाताओं को मिलने वाली राहत संबंधी अधिकांश छूटों और भत्तों के मापदंड करीब 10-15 साल पहले तय हुए थे। पर पिछले तीन-चार वर्षों से रहन-सहन के खर्च, ट्रांसपोर्ट की लागत, बच्चों की स्कूल फीस चुकाने के बाद वे नई खरीदी के लिए कुछ बचा ही नहीं पाते। छोटे आयकरदाता और वेतनभोगी आयकरदाता महसूस करते हैं कि बजट में आयकर छूट सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर चार लाख रुपये की जानी चाहिए।
विज्ञापन

चूंकि मुद्रास्फीति की दर और अन्य वस्तुओं की लागत बढ़ने से वेतनभोगी कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, अतः मानक कटौती को फिर से लागू करना चाहिए। आयकर नियमों को सरल बनाने के उपाय तलाशने के लिए गठित जस्टिस ईश्वर की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की सीमा तर्कसंगत रूप से बढ़ाई जानी चाहिए तथा इस पर कर की दर में कमी भी होनी चाहिए। होम लोन के ब्याज पर छूट की सीमा भी कम से कम तीन लाख रुपये करनी चाहिए। अभी यह दो लाख रुपये है। कर गणना के लिए लीव एनकैशमेंट की सीमा भी बढ़ाकर 10 लाख रुपये की जानी चाहिए। अभी इसकी सीमा तीन लाख रुपये है, जो करीब 16 साल पहले तय की गई थी। ट्रांसपोर्ट अलाउंस और बच्चों की पढ़ाई के खर्च की सीमा भी बढ़ाई जानी चाहिए। यद्यपि आर्थिक विकास दर और सबसे तेजी से बढ़ते मध्यवर्ग की दृष्टि से भारत पहले क्रम पर है, पर आयकर देने वाले वालों के लिहाज से भारत सबसे पीछे है। देश में मध्यवर्ग के 17 करोड़ लोग हैं, पर इनमें से बड़ी संख्या में लोग आयकर नहीं चुकाते। गली-कूचों में अनेक दुकानदारों को भारी लाभ होता है, पर वे आयकर नहीं देते।
एक ओर दुकानदारों, उद्यमियों और सेवा प्रदाताओं में से नए आयकरदाता खोजकर कर आधार बढ़ाया जा सकता है, वहीं आयकर की उच्चतम सीमा के तहत आयकर चुकाने वालों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। सरकार ने आयकर विभाग को चालू वित्त वर्ष में हर महीने कम से कम 25 लाख नए आयकरदाता खोजकर आयकर दायरे में लाने के जो लक्ष्य रखे गए थे, वे पूरे नहीं हुए। आयकर विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण कदम यह भी उठाया जाना चाहिए कि वर्ष 2016-17 में आयकर स्क्रूटनी सीमित करके आयकर बकाये की वसूली पर आयकर अधिकारियों और आयकर कर्मचारियों का ध्यान केंद्रित किया जाए। हम आशा करें कि नए बजट में वित्त मंत्री नौकरीपेशा वर्ग और छोटे आयकरदाताओं के चेहरे पर मुस्कराहट लाने के लिए अपनी मुट्ठी खोलेंगे!
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us