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अंतरराष्ट्रीय: क्या ट्रंप करेंगे ईरान से ऐतिहासिक समझौता? बातचीत को अब और ज्यादा टालना मुश्किल होगा

Sat, 14 Dec 2024 07:42 AM IST
ज्योति भास्कर डॉ जॉन गाजवीनियन, न्यूयॉर्क टाइम्स
डॉ जॉन गाजवीनियन, न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 14 Dec 2024 07:42 AM IST
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सार
ट्रंप खुद को बड़ा सौदेबाज मानते हैं और अप्रत्याशित निर्णय लेते हैं। सब कुछ ठीक रहा, तो वह ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति हो सकते हैं, जो अमेरिका व ईरान के बीच गतिरोध को समाप्त कर देंगे।
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Will Donald Trump make a historic deal with Iran It will be difficult for US to postpone talk endlessly
डोनाल्ड ट्रंप (फाइल) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल में ईरान के प्रति डोनाल्ड ट्रंप का नजरिया कल्पना की लगभग हर सीमा को लांघ गया था। सहयोगियों के चेताने पर भी उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए मई 2018 में ओबामा काल में हुए ऐतिहासिक समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था। ट्रंप ने अपने कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में ईरान की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर सरकार को झुकाने के लिए ‘अधिकतम दबाव’ की सीमा को पार करते हुए उस पर 1,500 से अधिक प्रतिबंध लगाए। बीते कई दशकों में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह सबसे साहसिक और विचित्र ईरान नीति थी।


आज हमें इस बात के पूरे संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप दूसरे कार्यकाल में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर पहले से कम संयमित होंगे। अमेरिका के रक्षा मंत्री मनोनीत किए गए पीट हेगसेत ईरान को ‘राक्षस राज’ बता चुके हैं और ट्रंप से आग्रह किया है कि देश की आर्थिक और सांस्कृतिक धरोहरों पर बमबारी की जाए। हालांकि उनके नामांकित विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने नरम रुख अपनाया है। ट्रंप के घनिष्ठ मित्र, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू यहूदी राज्य के प्रतिद्वंद्वी ईरान से संघर्ष बढ़ाने पर आमादा हैं। विशेषज्ञों को चिंता है कि ट्रंप की निगरानी में पश्चिम एशिया में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। यानी युद्ध हो सकता है, लेकिन इसके कोई अवश्यंभावी कारण नहीं हैं। ट्रंप खुद को बहुत बड़ा सौदेबाज मानते हैं तथा अप्रत्याशित निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं, और यह सुलह का रूप ले सकता है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो ट्रंप ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति हो सकते हैं, जो अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध को खत्म कर देंगे, जिसने न केवल पश्चिम एशिया को अस्थिर कर रखा है, बल्कि 1979 से अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए दुखदायी बना हुआ है।


अब आगामी ट्रंप प्रशासन के पास तीन विकल्प बचे हैं : ईरान को नजर अंदाज करे, उसके साथ युद्ध करे या फिर कूटनीति आजमाए। ईरान को नजर अंदाज करना कभी कारगर साबित नहीं हुआ, क्योंकि तेहरान के क्रांतिकारी और अमेरिका के विरोधी नेता इसे होने नहीं देंगे। हालांकि कूटनीति सबसे बेहतर काम कर सकती है, क्योंकि ट्रंप ने पश्चिम एशिया में शांति का वादा किया है, जो उनकी प्रतिष्ठा का सवाल है। इसलिए ऐसा हो सकता है कि ट्रंप व उनके सलाहकार पहले इस्राइल और हमास का युद्ध रुकवा दें, फिर इसका श्रेय लेते हुए ईरान के साथ ऐतिहासिक समझौते के लिए कदम बढ़ाएं। लेकिन ईरान तक अमेरिका की पहुंच दूसरे पक्ष की इच्छा से ही संभव होगी।

बीते कुछ महीनों से ईरान चुपके से अमेरिका के लिए नए प्रस्तावों की तलाश में है और सुधारवादी राष्ट्रपति मौसाद पेजशेकियन नए परमाणु सौदे पर बातचीत के लिए तैयार हैं। पिछले महीने जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि इस्राइल ईरान के परमाणु संयंत्रों को नष्ट करना चाहता है, क्या आप भी ईरान को नुकसान पहुंचाने के बारे में सोच रहे हैं? इस पर ट्रंप ने कहा था, ‘मैं चाहूंगा कि ईरान एक सफल देश बने।’ अभी यह तो नहीं कहा जा सकता कि दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता करेंगे, लेकिन यह सोचना भी मुश्किल है कि बातचीत को अब और ज्यादा टाला जा सकेगा। तमाम सीमित विकल्पों को देखते हुए लगता है कि नए राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस नाटक (युद्ध) के समापन का पर्दा गिरेगा।

©The New York Times 2024
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