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क्यों जरूरी है पेट्रोल की कीमत पर डीजल

Sun, 23 Aug 2020 04:10 AM IST
O.P. Joshi ओपी जोशी
Updated Sun, 23 Aug 2020 04:10 AM IST
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Why diesel is important at the cost of petrol
petrol diesel price - फोटो : social media

जीवाश्म ईंधन जैसे पेट्रोल, डीजल, लकड़ी एवं कोयला दहन एवं जलने से महीन कण (पीएम, 2.5 एवं 10) नाइट्रोजन-ऑक्साइड, सल्फर डायऑक्साइड तथा कार्बन मोनो एवं डायऑक्साइड उत्सर्जित होकर वायुमंडल में प्रदूषण पैदा करते हैं। एक डीजल चलित कार पेट्रोल चलित कार की तुलना में सात गुना प्रदूषण फैलाती है। डीजल से पैदा हुए धुएं में महीन कण 90 गुना अधिक होते हैं और नाइट्रोजन ऑक्साइड 30 गुना। इसके साथ ही कार्बन डायऑक्साइड, बेंजीन एवं फॉर्मल-डीहाइड की मात्रा भी अधिक होती है।


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विभिन्न देशों में किए गए अध्ययन दर्शाते हैं कि डीजल का धुआं पर्यावरण और जन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से संबंधित इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के वर्ष 2012 के अध्ययन में डीजल से पैदा हुए धुएं को मानव कैंसर-कारक पदार्थ की सूची में रखा गया था। इसके पहले इसे संभावित श्रेणी में रखा गया था।

अमेरिका के 'नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ऑक्यूपेशनल सेफ्टी ऐंड हेल्थ' ने डीजल को व्यवसाय जनित कैंसर का संभावित कारण बताया है। डीजल के धुएं से कैंसर बढ़ने के खतरे को अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने भी स्वीकार किया है। जापान के वैज्ञानिकों ने भी डीजल के धुएं में कैंसर के लिए जिम्मेदार एक अन्य पदार्थ 3 नाइट्रोबेजेन की उपस्थिति देखी है।

हमारे देश में लंबे समय तक डीजल पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता रहा है, क्योंकि सरकार इस पर सब्सिडी देती रही है। इसे सस्ता बनाए रखने के दो कारण थे। एक तो यह कि कृषि प्रधान देश होने के नाते यह किसानों को सस्ते में उपलब्ध हो ताकि उन पर खेती के कार्यों में अधिक आर्थिक बोझ न पड़े।

दूसरा यह कि व्यावसायिक वाहनों में इसके उपयोग से माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन सस्ता बना रहे। इन दो कारणों से इसकी सब जगह उपलब्धता आसान बनाई गई। डीजल के कम दाम एवं इसकी सर्वत्र उपस्थिति का फायदा उठाकर वाहन निर्माताओं ने डीजल कार के कई मॉडल बाजार में उतार दिए। 2010 के आसपास कुल कारों की बिक्री में पचास फीसदी डीजल की कारें थीं।

यही नहीं, वर्ष 2013 की पहली छमाही में कारों की कुल बिक्री में 56 फीसदी डीजल की कारें थीं। नतीजतन आज देशभर में डीजल की कुल खपत का 15 फीसदी निजी कारों में हो रहा है। सार्वजनिक यातायात को सुगम बनाने के लिए भी शहरों में डीजल बसों की संख्या बढ़ी है।

शिक्षण संस्थानों ने भी स्कूल बसों के रूप में डीजल वाहनों को प्राथमिकता दी। नेटवर्क चलाने के लिए दूरसंचार कंपनियों ने भी बिजली कटौती के समय डीजल से चलने वाले जनरेटर का उपयोग किया। ये कंपनियां सालाना दो हजार करोड़ रुपये के डीजल का इस्तेमाल करती हैं। शहरों के बड़े बड़े बाजारों और शो रूम में बिजली कटौती के समय डीजल से चलने वाले जनरेटर इस्तेमाल किए जाते हैं।

इस तरह से डीजल का इस्तेमाल बढ़ने से वातावरण में विषाक्तता बढ़ने लगी और जन स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने लगा। सिरदर्द, चक्कर आना, सीने एवं आंखों में जलन आदि डीजल के धुएं के प्रारंभिक प्रभाव देखे गए हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने से जो प्रभाव देखे गए हैं, उनमें कम वजन वाले शिशुओं का जन्म, शिशुमृत्यु दर में वृद्धि, कुछ जन्मजात विकृत्तियां, फेफड़ के रोग एवं कैंसर शामिल है।

डीजल के धुएं से पैदा खतरे के मद्देनजर दुनियाभर में इसके इस्तेमाल को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इटली की राजधानी रोम की सिटी काउंसिल द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार वहां सुबह साढ़े सात बजे से रात साढ़े आठ बजे के बीच डीजल कारों पर रोक लगाई गई है।

जर्मनी के कई शहरों में डीजल कारों पर अलग अलग समय के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। चीन वर्ष 2025 तक डीजल कारों पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए प्रयासरत है। डीजल वाहनों की संख्या निश्चित करना, ज्यादा रोड टैक्स एवं पार्किंग शुल्क, प्रदूषण कर इत्यादि ऐसे प्रयास हैं, जो अनेक देशों में किए जा रहे हैं।

हमारे देश में भी डीजल कारों में अतिरिक्त उत्पादन शुल्क लगाने का प्रस्ताव 2012 के बजट में था, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निजी डीजल कारों पर 30 फीसदी पर्यावरण कर लगाने का सुझाव दिया था।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली तथा 15 प्रमुख शहरों में दस वर्ष पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था, फिर भी डीजल के धुएं से होने वाले प्रदूषण को रोकने के प्रयास सफल नहीं हो पाए। इस वर्ष जून में कुछ अतिरिक्त कर लगाने से पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग बराबर हो गए हैं। डीजल के जहरीले धुएं से निजात पाने के लिए भविष्य में भी ऐसे कदम उठाने  की जरूरत होगी। (सप्रेस)

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