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इस बदहाली का जिम्मेदार कौन

Sun, 14 Jun 2015 07:30 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 14 Jun 2015 07:30 PM IST
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Who is responsible for this plight

इस देश में एक ही राजनीतिक दल है, जिसकी पैदाइश, परवरिश और प्रचार हम मीडिया वालों की बदौलत हुआ है। इस राजनीतिक दल का नाम है, आम आदमी पार्टी। अरविंद केजरीवाल साहब की याददाश्त कमजोर है, सो आजकल मीडिया वालों को वह धमकाते-डराते फिरते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि हम पत्रकार उनकी सरकार को खत्म करने की सुपारी ले चुके हैं। अरे अरविंद जी, याद कीजिए जरा कि हमने आपके लिए कितना किया है। याद कीजिए, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान के वे दिन, जब हमने दिल लगाकर अन्ना हजारे के उपवास और भ्रष्टाचार-विरोधी उस आंदोलन का प्रचार न किया होता, तो कई वर्ष लग जाते आपको दिल्ली के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने में।

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बात आ ही गई है अन्ना की, तो इस पर भी ध्यान दीजिए कि इस बीच हम मीडिया वालों ने अन्ना और उनके आंदोलन को भुला दिया, तो देश भी भूल चुका है। लेकिन केजरीवाल साहब अब भी हमारे हीरो हैं। यही कारण है कि हमने उनकी सरकार के सौ दिनों का हिसाब नहीं मांगा है, जिस तरह मोदी सरकार के सौ दिन पूरे होने पर मांगा था। पर इसका नतीजा उल्टा ही हुआ। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने हिसाब न मांगे जाने का फायदा उठाकर कई टीवी चैनलों का बड़ी चतुराई से इस्तेमाल किया है। जाने-माने टीवी पत्रकारों को इंटरव्यू देकर दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार यदि कोई ठोस काम कर नहीं पाई है, तो सिर्फ इसलिए कि केंद्र सरकार उनके रास्ते में रोड़ा बनकर खड़ी है। सबसे बड़ा रोड़ा उनकी राय में दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग साबित हुए हैं, सो मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों बेझिझक उन्हें कोसा है। बरखा दत्त के शो पर उन्होंने नजीब जंग को केंद्र सरकार का पॉलिटिकल एजेंट तक कहा। जबकि सच तो यह है कि गवर्नर से झगड़ा खुद केजरीवाल ने ही शुरू किया था। कभी वह अधिकारों को लेकर लड़ पड़ते हैं, तो कभी कानून-व्यवस्था को अपने अधीन लाए जाने की मांग पर।
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नतीजा यह है कि विधानसभा में शानदार जीत हासिल करने के बाद भी दिल्ली के लिए अभी तक केजरीवाल साहब कुछ कर नहीं पाए हैं। हमने सौ दिनों का हिसाब मांगा होता, जैसे प्रधानमंत्री से मांगा था, तब दिल्लीवासियों को पता चलता कि पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर कई दिनों तक कूड़ा पसरा रहा, बिजली-पानी का हाल पूर्ववत है, और मुफ्त में शायद ही किसी को वाईफाई मिल रहा है।
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मेरे घर में बिजली इतनी बार जाने लगी है कि जिस कंप्यूटर पर यह लेख लिखा गया, वह बैटरी पर चल रहा था। बिजली की समस्या के बारे में मैंने जब ट्वीट किया, तो कई इलाकों से बहुत सारे ट्वीट आए ये कहने के लिए कि उनके यहां भी बिजली गुल होती रहती है। पिछली सरकारों के कार्यकाल में जब ऐसा होता था, तो खबर सुर्खियां बनती थीं। लेकिन जब से आप की सरकार आई है, इतने तमाशे अन्य किस्म के हुए हैं कि बिजली-पानी की समस्याएं सुर्खियां नहीं बन पातीं। पिछली बार केजरीवाल भाग गए थे बनारस नरेंद्र मोदी को हराने। इस बार कहा जा रहा है कि उनकी नजरें पंजाब के विधानसभा चुनाव पर हैं। दोबारा भाग जाते हैं, तो क्या हम मीडिया वाले तब भी साथ देंगे उनका? क्यों नहीं, जब आम आदमी पार्टी को हमने इतने प्यार से बनाया है? ऐसे में, हम भविष्य में भी आप की कमियों को छिपाने का ही काम करते रहेंगे। केजरीवाल तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।

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